अयोध्या/कानून-व्यवस्था डेस्क: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण (Ram Mandir Donation Theft Case) की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, वैसे-वैसे बेहद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. विशेष जांच टीम (SIT) और जांच एजेंसियों के सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार, इस पूरे महाघोटाले को मशीनी गिनती के दौरान नहीं, बल्कि हाथ से नोटों के बंडल बनाते समय अंजाम दिया जाता था.
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 आरोपी मुख्य रूप से दानपात्रों (हुंडियों) से निकले अस्त-व्यस्त नोटों को सीधा करने और उनके बंडल बनाने के काम में लगे थे और इसी दौरान उन्होंने चंदे पर हाथ साफ किया.
मशीनी गिनती से पहले ही हो जाता था ‘खेल’
राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण वहां लगे करीब 40 दानपात्रों में आने वाले अधिकांश नोट मुड़े-तुड़े और अस्त-व्यस्त हालत में होते थे. इन नोटों को बैंक की मशीनों में डालने से पहले एक विशेष प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था, जिसका फायदा आरोपियों ने उठाया:
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मुड़े नोटों को सीधा करने की आड़: नियम के मुताबिक, सबसे पहले इन मुड़े-तुड़े नोटों को हाथ से सीधा कर, गड्डियां बनाकर रबर बैंड लगाया जाता था और एक दिन के लिए सुरक्षित कमरे में रखा जाता था. इसके अगले दिन बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में इन बंडलों को मशीनों से गिना जाता था.
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बंडल बनाते समय चोरी: जांच एजेंसियों का मानना है कि नोटों को सीधा करने और रबर बैंड लगाने के इसी शुरुआती चरण में नोटों की गड्डियों से बड़ी चालाकी से नकदी पार कर दी जाती थी. चूंकि मशीनों में चढ़ने से पहले का कोई लिखित इनपुट नहीं होता था, इसलिए यह चोरी आसानी से पकड़ में नहीं आती थी.
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आभूषणों की भी चोरी: सूत्रों के मुताबिक, नोटों को सीधा करने और दानपात्रों को खाली करने के दौरान नकदी के साथ-साथ चढ़ावे में आए छोटे-मोटे सोने-चांदी के आभूषणों पर भी इन कर्मियों ने हाथ साफ किया.
गिरफ्तार 8 आरोपियों में किसका क्या था काम? (SIT रिपोर्ट)
जांच टीम ने इस पूरे गिरोह में शामिल सभी 8 लोगों की भूमिका को पूरी तरह डिकोड कर लिया है:
1. नोट सीधा करने वाले 6 मुख्य कर्मी:
गिरफ्तार आरोपियों में से निम्नलिखित 6 कर्मियों का काम मशीनी गिनती का नहीं, बल्कि हाथ से नोटों को व्यवस्थित करने का था. इन्होंने ही बंडल बनाने के दौरान हेराफेरी की:
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अनुकल्प मिश्रा
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लवकुश मिश्रा
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मनीष यादव
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रमाशंकर मिश्रा
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अविनाश शुक्ला
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करुणेश पांडेय
2. सुभाष श्रीवास्तव (इन-चार्ज):
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव को इस पूरी काउंटिंग यूनिट का इन-चार्ज (निरीक्षक) बनाया गया था. आरोप है कि उन्होंने मॉनीटरिंग और निगरानी में जानबूझकर घोर लापरवाही और अनदेखी की और अपनी आंखों के सामने सब कुछ होते रहने दिया.
3. रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (किंगपिन):
ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के पूर्व ड्राइवर टिन्नू यादव की भूमिका इस पूरे मामले में सबसे बड़ी और संदेहास्पद पाई गई है.
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बिना तलाशी एंट्री-एग्जिट: टिन्नू यादव सीधे नोट गिनने के काम में शामिल नहीं था, लेकिन व्यवस्था संचालन में उसे विशेष अधिकार प्राप्त थे. उसके पास कई दानपात्रों की चाबियां थीं और वह वॉकी-टॉकी के जरिए परिसर में इतना रसूख रखता था कि बिना किसी सुरक्षा चेकिंग या तलाशी के किसी भी व्यक्ति या सामान की एंट्री और एग्जिट करा सकता था. जांच एजेंसियों को पूरा शक है कि टिन्नू ने इसी ‘सुरक्षा कवच’ का फायदा उठाकर चोरी की गई नकदी को मंदिर परिसर से बाहर भिजवाया.
SBI और ट्रस्ट के MOU के बाद बदली थी व्यवस्था
जांच में यह बात भी सामने आई है कि 9 फरवरी 2024 को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच एक आधिकारिक समझौता (MOU) हुआ था. इस एमओयू के बाद इन सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को ट्रस्ट की सिफारिश पर ‘सैनिक सिक्योरिटीज’ (Sainik Securities) के माध्यम से मानदेय/वेतन दिया जाने लगा था. हालांकि, इनमें से कई आरोपी इस समझौते से पहले (प्राण-प्रतिष्ठा के समय) से ही मंदिर के भीतर इसी डोनेशन रूम में काम कर रहे थे.
फिलहाल, पुलिस ने सभी आरोपियों से करीब 80 लाख रुपये की नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद कर ली है और एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट के बाद मंदिर की सुरक्षा और डोनेशन काउंटिंग की पूरी नियमावली को नए सिरे से बदलने की तैयारी की जा रही है.
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