इस्लामाबाद/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका एक बार फिर संदेह के घेरे में आ गई है। एक ताजा अमेरिकी रिपोर्ट ने दावा किया है कि पाकिस्तान एक तरफ तो ‘मध्यस्थ’ (Mediator) होने का दिखावा कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ उसने गुप्त रूप से ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हवाई हमलों (Air Strikes) से बचाने के लिए अपने एयरबेस पर सुरक्षित पनाह दी थी। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिका में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से की लहर है।
नूर खान एयरबेस: ईरान के ‘खुफिया विमान’ का नया ठिकाना?
CBS न्यूज की एक विशेष रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से चौंकाने वाला दावा किया गया है।
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गुप्त मिशन: रिपोर्ट के अनुसार, 8 अप्रैल को जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम की घोषणा करने वाले थे, ठीक उसी समय ईरान ने अपने कई महत्वपूर्ण विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेज दिया था।
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आरसी-130 विमान: इन विमानों में ईरान का एक ‘आरसी-130’ टोही और खुफिया जानकारी जुटाने वाला विमान भी शामिल था। माना जा रहा है कि ईरान ने अपने सबसे कीमती सैन्य उपकरणों को अमेरिकी बमबारी से बचाने के लिए पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किया।
“पुनर्मूल्यांकन का समय”: अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की चेतावनी
इस खुलासे के बाद अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए इस रिपोर्ट की गंभीरता से जांच की मांग की है।
सीनेटर ग्राहम ने कहा: “अगर यह रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना होगा। इजरायल के प्रति पाकिस्तान के रुख को देखते हुए, अगर यह खबर सच निकलती है तो मुझे बिल्कुल हैरानी नहीं होगी।”
पाकिस्तान का बचाव: “इतने बड़े बेड़े को छिपाना नामुमकिन”
इस्लामाबाद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने तर्क दिया कि नूर खान एयरबेस एक घनी आबादी वाले इलाके के बीच में स्थित है। अधिकारी का कहना है कि वहां विदेशी सैन्य विमानों के बेड़े को उतारना और उसे आम जनता या उपग्रहों (Satellites) की नजरों से छिपाकर रखना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
क्या अफगानिस्तान में भी छिपे थे ईरानी जहाज?
रिपोर्ट के तार केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि अफगानिस्तान से भी जुड़े हैं।
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काबुल कनेक्शन: दावा है कि युद्ध शुरू होने से ठीक पहले ईरान की ‘महान एयर’ का एक नागरिक विमान काबुल में लैंड हुआ था।
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हेरात शिफ्टिंग: बाद में जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा, तो इस विमान को सुरक्षा कारणों से हेरात (ईरान सीमा के करीब) भेज दिया गया। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है।
ट्रंप की दो टूक: “ईरान लाइफ सपोर्ट पर है”
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया है जब शांति की सभी उम्मीदें दम तोड़ती नजर आ रही हैं। ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘कचरा’ (Trash) करार दिया। ट्रंप ने तीखे लहजे में कहा, “ईरान लाइफ सपोर्ट पर है और यह सीजफायर भी अब आखिरी सांसें गिन रहा है।” ईरान ने भी पलटवार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं करेगा।
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