
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर आस्था, धार्मिक प्रतीकों और खान-पान को लेकर जोरदार सियासी संग्राम छिड़ गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या दौरे के बाद तारून इलाके में कथित ‘मछली भोज’ के आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए तीखे प्रहार के बाद मामला पूरी तरह गरमा गया है। रायबरेली की जनसभा से सीएम योगी द्वारा कांग्रेस के दोहरे आचरण और ‘अंदर राम-राम, बाहर मछली की दावत’ वाले तंज पर अजय राय ने पलटवार किया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उनके पास मछली खाने या परोसने का कोई भी प्रामाणिक वीडियो या फोटो है, तो उसे जनता के सामने पेश करें। इस तीखे राजनीतिक घटनाक्रम की पुष्टि Live Hindustan की रिपोर्ट और Dainik Jagran की रिपोर्ट में भी की गई है।
अयोध्या में दर्शन और तारून में ‘मछली भोज’ पर शुरू हुआ सियासी तूफान
इस पूरे राजनीतिक विवाद की शुरुआत रविवार को उस समय हुई जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्वांचल प्रभारी अभिषेक दत्त और प्रदेश प्रवक्ता अखिलेश सिंह के साथ रामनगरी अयोध्या पहुंचे। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले सुप्रसिद्ध सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कर अपने संगठनात्मक अभियानों की शुरुआत की।
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला अयोध्या के ग्रामीण क्षेत्र तारून में आयोजित एक संगठनात्मक कार्यकर्ता बैठक में शामिल होने पहुंचा। इसी बैठक के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय हलकों में यह खबर तेजी से फैली कि पवित्र सावन मास के दौरान कांग्रेस नेताओं के स्वागत में ‘मछली की दावत’ का आयोजन किया गया था। जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई, भारतीय जनता पार्टी और अयोध्या के संत समाज ने इसे सावन के महीने में करोड़ों सनातनियों की धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात बताते हुए कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोल दिया।
रायबरेली से गरजे सीएम योगी: ‘गिरगिट भी शरमा जाए, अंदर राम-राम बाहर दावत’
सोमवार को 1857 के अमर स्वतंत्रता सेनानी राणा बेनी माधव बख्श सिंह की 222वीं जयंती समारोह के अवसर पर रायबरेली पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंच से सीधे तौर पर कांग्रेस और अजय राय पर निशाना साधा। सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के दोहरे चरित्र को देखकर तो गिरगिट भी शरमा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, “कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कल अयोध्या गए थे। वहां वे हनुमानगढ़ी में जाकर बजरंग बली के सामने दंडवत होने का ढोंग करते हैं और मंदिर की चौखट से बाहर निकलते ही मछली की दावत उड़ाने बैठ जाते हैं। बेशर्मी की भी कोई पराकाष्ठा होती है। यदि किसी को कुछ खाना ही था तो वह अयोध्या धाम की सीमा से बाहर जाकर खा सकता था। लेकिन सावन के पवित्र महीने में धार्मिक नगरी में इस प्रकार का आचरण करना यह साबित करता है कि कांग्रेस के लिए आस्था सिर्फ एक दिखावा और राजनीतिक स्वांग है।”
अजय राय की दो टूक चुनौती: ‘झूठ की बुनियाद पर चल रही भाजपा, दिखाएं एक भी फोटो’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तीखे बयानों के कुछ ही देर बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मीडिया के सामने आकर जोरदार खंडन किया और भाजपा पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। अजय राय ने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बिना किसी तथ्य और प्रमाण के इस तरह की निराधार बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।
अजय राय ने चुनौती देते हुए कहा, “मैं सीएम योगी को खुली चुनौती देता हूं कि यदि मेरे या हमारे किसी शीर्ष नेता द्वारा अयोध्या में मछली खाने या मछली भोज का आयोजन करने का एक भी फोटो या पुख्ता सबूत उनके पास हो, तो उसे तुरंत सार्वजनिक करें। भाजपा के पास बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई और अयोध्या में विकास के नाम पर हुए कथित घोटालों का कोई जवाब नहीं है, इसलिए वे सावन में बेबुनियाद खान-पान के मुद्दों को उछालकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। हम सनातनी हैं और अपनी परंपराओं का पूरी निष्ठा से पालन करते हैं।”
भाई अवधेश राय हत्याकांड और माफिया कनेक्शन पर गरमाई पुरानी रंजिश
रायबरेली के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केवल मछली भोज पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि उन्होंने अजय राय के अतीत और उनके बड़े भाई स्वर्गीय अवधेश राय हत्याकांड का जिक्र कर सियासी पारे को और चढ़ा दिया। सीएम योगी ने आरोप लगाया कि अजय राय ने अपने सगे भाई के हत्यारे और दुर्दांत माफिया के सामने राजनीतिक कारणों से घुटने टेक दिए थे और उसके खिलाफ मजबूती से गवाही तक देने नहीं पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “जब 2017 में हमारी सरकार आई, तब हमने कानून का राज स्थापित करते हुए उस दुर्दांत माफिया और उसके पूरे आपराधिक साम्राज्य को इतना रगड़ा कि उसकी सारी हेकड़ी निकल गई।” गौरतलब है कि 3 अगस्त 1991 को वाराणसी में अजय राय के बड़े भाई अवधेश राय की उनके घर के बाहर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी, जिसमें पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया था। इस मामले में दशकों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने माफिया मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अयोध्या के संतों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आक्रोश
तारून में कथित मछली भोज की खबरों के बाद अयोध्या के संतों और भाजपा विधायकों ने भी कड़ा एतराज जताया है। अयोध्या धाम के स्थानीय विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की तपस्या और सात्विकता का प्रतीक है। ऐसे समय में प्रभु श्रीराम और हनुमान जी की पावन धरती पर इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना आचरण सनातन संस्कृति का खुला अपमान है।
हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि परिसर से जुड़े कई प्रमुख संतों ने भी बयान जारी कर कहा कि जो लोग मंदिरों में जाकर केवल राजनीतिक चश्मे से दर्शन करते हैं, उनका असली चेहरा समाज के सामने आ जाता है। संतों का कहना था कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा और शुचिता का ध्यान रखना हर राजनीतिक दल और नेता का प्राथमिक दायित्व होना चाहिए।
‘हनुमान जी उठाएं गदा और चंदा चोरों का करें फैसला’—जहां से सुलग उठी चिंगारी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तीखे टकराव की पृष्ठभूमि अजय राय के उस बयान से तैयार हुई थी जो उन्होंने रविवार को हनुमानगढ़ी में दर्शन के तुरंत बाद दिया था। अजय राय ने कहा था कि राम मंदिर को व्यापार का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए और वे बजरंग बली से प्रार्थना करते हैं कि वे अपनी गदा उठाकर ‘चंदा चोरों’ का फैसला करें।
उन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है। इसी आक्रामक बयान के बाद भाजपा ने पलटवार की रणनीति बनाई और जब तारून में कथित खान-पान का मामला सामने आया, तो दोनों पक्षों के बीच वाकयुद्ध व्यक्तिगत और वैचारिक हमलों तक जा पहुंचा।
यूपी की सियासत में खान-पान, आस्था और भविष्य की चुनावी बिसात
उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक प्रतीक, सांस्कृतिक अस्मिता और व्यक्तिगत आचरण हमेशा से चुनावी बहस के केंद्र में रहे हैं। एक तरफ जहां भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘जीरो टॉलरेंस’ और सनातन गौरव के संदेश के जरिए कांग्रेस को सनातन विरोधी खेमे में खड़ा करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे ध्यान भटकाने की राजनीति बताकर स्थानीय व बुनियादी मुद्दों पर डटे रहने का दावा कर रही है।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि जहां भाजपा इस मुद्दे को मंडल और ब्लॉक स्तर तक ले जाने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस पूरे प्रदेश में प्रेस कॉन्फ्रेंस और रैलियों के जरिए सरकार को विकास, सुरक्षा और बेरोजगारी के मोर्चे पर घेरने की योजना बना रही है।
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