
आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए उत्तर प्रदेश में चीनी की बढ़ती कीमतों और कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोशिशों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त प्रशासनिक रुख अपनाया है। शासन स्तर पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि प्रदेश में चीनी की जमाखोरी, सट्टेबाजी और कालाबाजारी में लिप्त कारोबारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाए। बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए तहसील स्तर पर एसडीएम और खाद्य सुरक्षा एवं आपूर्ति विभाग की संयुक्त स्पेशल टीमों का गठन कर दिया गया है। इस बड़े प्रशासनिक कदम का विस्तृत ब्योरा Live Hindustan की रिपोर्ट में भी प्रमुखता से प्रकाशित हुआ है।
त्योहारी सीजन में कृत्रिम महंगाई और जमाखोरी पर योगी सरकार का कड़ा हंटर
रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान बाजार में मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों के लिए चीनी की मांग में भारी उछाल आता है। इसी मांग का अनुचित लाभ उठाने के लिए कुछ थोक व्यापारियों और सिंडिकेट द्वारा चीनी का अत्यधिक भंडारण कर कृत्रिम संकट खड़ा करने की आशंका जताई जा रही थी। प्रदेश के कुछ प्रमुख शहरों—जैसे कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, प्रयागराज, मेरठ, वाराणसी और अलीगढ़ के खुदरा बाजारों में चीनी के दाम 60 से 68 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंचने लगे थे।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और संभागीय आयुक्तों को स्पष्ट किया है कि जनहित सर्वोपरि है। यदि कोई भी व्यापारी या बिचौलिया आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी कर अनुचित मुनाफा कमाने का प्रयास करेगा, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) के तहत कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
30 दिन की समय-सीमा और 400 टन का कैप: स्टॉक नियमों की नई लक्ष्मण रेखा
कालाबाजारी को जड़ से समाप्त करने के लिए सरकार ने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप भंडारण की सख्त सीमा तय कर दी है। नए प्रशासनिक आदेशों के अनुसार, कोई भी अधिकृत चीनी डीलर या थोक व्यापारी 30 दिन से अधिक समय तक चीनी का भंडारण नहीं कर सकता। इसके साथ ही, किसी भी डीलर द्वारा किसी भी एक समय में 400 मीट्रिक टन से अधिक चीनी का स्टॉक रखने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
व्यावसायिक स्तर पर भारी मात्रा में चीनी का उपभोग करने वाले बल्क कंज्यूमर्स (प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक खपत वाली इकाइयां) के लिए भी नियम कड़े कर दिए गए हैं। ऐसे प्रतिष्ठान अब अपनी जरूरत के 15 दिन से अधिक का अग्रिम स्टॉक नहीं रख पाएंगे। शासन के इस कड़े फैसले की रूपरेखा Dainik Jagran की रिपोर्ट में भी विस्तार से रेखांकित की गई है।
तहसील स्तर पर SDM के नेतृत्व में विशेष फ्लाइंग स्क्वॉड तैयार
राजधानी लखनऊ से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों तक निगरानी तंत्र को पुख्ता करने के लिए तहसीलवार विशेष टीमों को मैदान में उतार दिया गया है। उपजिलाधिकारी (SDM) के नेतृत्व में गठित इन विशेष दलों में क्षेत्राधिकारी (पुलिस), जिला पूर्ति अधिकारी (DSO), मंडी सचिव और बाट-माप विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
ये टीमें थोक मंडियों, बड़े वेयरहाउस, निजी कोल्ड स्टोरेज और प्रमुख मिष्ठान निर्माताओं के गोदामों पर 24 घंटे पैनी नजर रख रही हैं। सभी थोक व्यापारियों को अपने मौजूदा स्टॉक और प्रतिदिन की बिक्री का ऑनलाइन व ऑफलाइन ब्योरा संबंधित पोर्टल पर घोषित करने का आदेश दिया गया है। घोषित स्टॉक और भौतिक सत्यापन में अंतर पाए जाने पर गोदामों को तत्काल सील करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रदेश में 179.38 लाख क्विंटल का भरपूर स्टॉक, किल्लत का कोई संकट नहीं
बाजार में फैलाई जा रही अफवाहों को खारिज करते हुए राज्य सरकार ने आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, जिनके मुताबिक प्रदेश में चीनी की कोई भी वास्तविक कमी नहीं है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में वर्तमान में कुल 179.38 लाख क्विंटल चीनी का मजबूत सुरक्षित भंडार उपलब्ध है।
इस कुल भंडार में से 23.60 लाख क्विंटल चीनी सहकारी चीनी मिलों, 5.28 लाख क्विंटल राज्य चीनी निगम की मिलों और 150.50 लाख क्विंटल चीनी निजी क्षेत्र की मिलों के पास सुरक्षित रखी है। उत्तर प्रदेश की मासिक औसत घरेलू और व्यावसायिक खपत लगभग 4 लाख टन है। ऐसे में मौजूदा स्टॉक आगामी कई महीनों की कुल मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है। इस स्टॉक प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े Prabhat Khabar की रिपोर्ट पर भी उपलब्ध हैं।
थोक व खुदरा मंडियों में औचक छापेमारी और स्टॉक रजिस्टर का डिजिटल मिलान
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने अपने सभी फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे जमीनी धरातल पर औचक निरीक्षण करें। जिलेवार कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां कोई भी नागरिक या खुदरा व्यापारी अधिक कीमत वसूलने अथवा माल छिपाने की शिकायत दर्ज करा सकता है।
प्रशासनिक अधिकारी यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि मिलों से निकलने वाली चीनी की खेप सीधे अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरों के माध्यम से खुदरा दुकानों तक पहुंचे और बीच में किसी भी प्रकार की बनावटी रुकावट न आए। किसी भी स्तर पर सट्टा कारोबारियों या बिचौलियों द्वारा अग्रिम बुकिंग के जरिए माल डंप करने की प्रवृत्ति पर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और साइबर सेल द्वारा भी तकनीकी निगरानी रखी जा रही है।
15 अक्टूबर से नया पेराई सत्र और गन्ना किसानों के भुगतान की स्थिति
सरकार ने यह भी रेखांकित किया है कि 15 अक्टूबर से प्रदेश भर में गन्ने का नया पेराई सत्र औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है। नई फसल के आने के साथ ही चीनी का नया उत्पादन तेजी से शुरू हो जाएगा, जिससे आपूर्ति श्रृंखला और अधिक मजबूत होगी।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों के हितों की रक्षा करते हुए लगभग 48 लाख किसानों को 32,000 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान सुनिश्चित किया है। समय पर भुगतान मिलने से किसानों में उत्साह है और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति भी स्थिर बनी हुई है। सरकार का दोहरा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि एक ओर किसानों को उनकी फसल का उचित व समय पर मूल्य मिले और दूसरी ओर आम जनता को उचित मूल्य पर निर्बाध रूप से चीनी की आपूर्ति हो सके।
उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए स्पष्ट प्रशासनिक एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से पैनिक बाइंग (घबराहट में जरूरत से ज्यादा खरीदारी) से बचने का अनुरोध किया है। अधिकारियों का कहना है कि जब उपभोक्ता जरूरत से अधिक सामान घर में जमा करने लगते हैं, तो इससे बाजार पर अनावश्यक दबाव बनता है।
वहीं व्यापारियों को चेतावनी दी गई है कि वे निर्धारित मूल्य सूची अपनी दुकानों के बाहर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से सही वजन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी ग्राहक को बिल देने से इनकार न किया जाए। प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय है और नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाएगा।
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