आजम खान के खिलाफ कार्रवाई से चर्चा में आए IAS आंजनेय सिंह की यूपी से विदाई तय: केंद्र से नहीं मिला 8वां सेवा विस्तार, 11 साल बाद मूल कैडर सिक्किम होगी वापसी

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में पिछले एक दशक से सबसे चर्चित और दबंग छवि वाले प्रशासनिक अधिकारियों में शुमार आईएएस आंजनेय कुमार सिंह का यूपी में सफर अब थम गया है। शासन स्तर पर हुए ताजा प्रशासनिक फेरबदल और तबादला सूची के बाद यह साफ हो गया है कि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह को आठवीं बार सेवा विस्तार (Inter-Cadre Deputation Extension) नहीं मिल सका है। इसके साथ ही अब उनके अपने मूल काडर सिक्किम लौटने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त पद पर लंबे समय से तैनात रहे आंजनेय सिंह की जगह शासन ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संगीता सिंह को मुरादाबाद का नया कमिश्नर नियुक्त कर दिया है। इस प्रशासनिक बदलाव की पुष्टि Navbharat Times की रिपोर्ट में भी की गई है।

सिक्किम कैडर में वापसी का रास्ता साफ, मुरादाबाद को मिलीं नई कमिश्नर

उत्तर प्रदेश शासन द्वारा देर रात जारी की गई 17 आईएएस अधिकारियों की तबादला सूची में सबसे बड़ा आकर्षण मुरादाबाद कमिश्नरी का बदलाव रहा। 14 अगस्त को अपना सातवां सेवा विस्तार पूरा होने के बाद आंजनेय कुमार सिंह अवकाश पर चले गए थे। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर थी कि राज्य सरकार द्वारा केंद्र को भेजी गई सिफारिश के आधार पर उन्हें एक और एक्सटेंशन मिल सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के स्तर पर नियमों के तहत आठवीं बार विस्तार पर सहमति नहीं बन सकी।

शासन ने अनिश्चितता की स्थिति को खत्म करते हुए अलीगढ़ की मंडलायुक्त रहीं संगीता सिंह को मुरादाबाद की कमान सौंप दी। इसके साथ ही आंजनेय सिंह के यूपी में बने रहने की तमाम अटकलों पर हमेशा के लिए विराम लग गया और अब उन्हें सिक्किम सरकार में रिपोर्ट करना होगा।

7 बार मिला सेवा विस्तार, 11 साल तक यूपी में रहने का बना रिकॉर्ड

2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। वे 15 फरवरी 2015 को तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में पहली बार 5 वर्षों के लिए अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर सिक्किम से उत्तर प्रदेश आए थे। 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी, तब भी उनके प्रशासनिक कौशल और सख्त निर्णयों के चलते उन्हें लगातार जिम्मेदारियां मिलती रहीं।

साल 2020 में उनका मूल 5 साल का डेप्युटेशन पूरा हुआ, जिसके बाद उन्हें पहला सेवा विस्तार मिला। इसके बाद वर्ष 2021, 2022 और 2023 में केंद्र से एक-एक साल का विस्तार दिया गया। वर्ष 2024 में छह-छह माह के दो एक्सटेंशन और 2025 में एक साल का विस्तार मिला। कुल मिलाकर उन्हें लगातार सात बार सेवा विस्तार मिला, जिसके चलते वे 11 वर्षों तक यूपी में प्रतिनियुक्ति पर सेवा देते रहे। किसी भी आईएएस अफसर के लिए दूसरे राज्य में इतने लंबे समय तक प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहना प्रशासनिक इतिहास में बेहद दुर्लभ माना जाता है।

रामपुर में डीएम रहते आजम खान पर शिकंजा, जब चर्चा में आए आंजनेय सिंह

आंजनेय कुमार सिंह के पूरे करियर का सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल दौर फरवरी 2019 में शुरू हुआ, जब उन्हें रामपुर जिले का जिलाधिकारी (DM) बनाया गया। रामपुर उस समय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान का राजनीतिक गढ़ माना जाता था, जहां दशकों से उनका एकछत्र प्रभाव था। डीएम पद संभालते ही आंजनेय सिंह ने कानून-व्यवस्था और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया।

2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खान के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन और आपत्तिजनक बयानों को लेकर जिला प्रशासन ने कई गंभीर मुकदमे दर्ज कराए। उस समय आजम खान और रामपुर प्रशासन के बीच सीधा टकराव देखने को मिला था। आंजनेय सिंह ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के चुनाव आयोग की गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन कराया, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर मीडिया और राजनीतिक हलकों की सुर्खियों में आ गए।

जौहर यूनिवर्सिटी से लेकर सरकारी संपत्तियों की बहाली तक की कार्रवाई

रामपुर में जिलाधिकारी रहते हुए आंजनेय सिंह ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कई कानूनी और प्रशासनिक मामलों में सीधी कार्रवाई की। शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे, किसानों की जमीनों को जबरन वक्फ बोर्ड या ट्रस्ट में शामिल करने के आरोप, और सरकारी जमीन पर बने अवैध निर्माणों के मामलों में राजस्व टीमों को सक्रिय किया गया।

प्रशासनिक जांच के आधार पर दर्जनों एफआईआर दर्ज की गईं और करोड़ों रुपये की सरकारी व सार्वजनिक संपत्तियों को कब्जा मुक्त कराया गया। इस दौरान आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई कानूनी शिकंजे कसे गए। समाजवादी पार्टी नेतृत्व ने कई बार आंजनेय सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाए और उन्हें जिले से हटाने की मांग को लेकर चुनाव आयोग से लेकर अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उनके फैसलों को राज्य सरकार और अदालतों से लगातार समर्थन मिलता रहा।

मुरादाबाद में साढ़े पांच साल कमिश्नरी का अनूठा रिकॉर्ड

मार्च 2021 में योगी सरकार ने आंजनेय कुमार सिंह को पदोन्नत करते हुए मुरादाबाद मंडल का मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) नियुक्त किया। मुरादाबाद मंडल में रामपुर, मुरादाबाद, संभल, अमरोहा और बिजनौर जिले आते हैं। कमिश्नर बनने के बाद भी पूरे मंडल, विशेषकर रामपुर के मामलों पर उनकी प्रशासनिक निगरानी लगातार बनी रही।

मुरादाबाद कमिश्नर के रूप में आंजनेय सिंह ने लगातार साढ़े पांच वर्षों से अधिक समय तक सेवाएं दीं। उत्तर प्रदेश में मंडलायुक्त जैसे महत्वपूर्ण फील्ड पद पर साढ़े पांच साल तक एक ही अधिकारी का जमे रहना अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक रिकॉर्ड है। इस दौरान उन्होंने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, मंडल में बुनियादी ढांचे के विकास, पीतल उद्योग के आधुनिकीकरण और कानून-व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण में अहम भूमिका निभाई।

केंद्र की गाइडलाइंस और अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति के कड़े नियम

अखिल भारतीय सेवाओं (IAS/IPS/IFS) के नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को अपने मूल कैडर से दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए ही दी जाती है। असाधारण परिस्थितियों में राज्य सरकार के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार अधिकतम सीमाओं को ध्यान में रखते हुए सेवा विस्तार देती है।

आंजनेय सिंह के मामले में यूपी सरकार ने जनहित और महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्वों का हवाला देते हुए आठवीं बार भी एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा था। लेकिन पहले ही 11 साल का लंबा कार्यकाल पूरा हो जाने और पूर्वोत्तर राज्यों में वरिष्ठ अधिकारियों की जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने नियमों में अतिरिक्त ढील देने से इनकार कर दिया।

प्रशासनिक गलियारों में विदाई की गूंज और आगे की चुनौतियां

आंजनेय सिंह के मूल कैडर सिक्किम लौटने के फैसले से यूपी के प्रशासनिक हलकों में एक युग का अंत माना जा रहा है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष में उन्हें एक बेहद ईमानदार, निडर और सख्त प्रशासक के तौर पर याद किया जा रहा है, वहीं विपक्षी खेमे में उनकी विदाई को प्रशासनिक संतुलन के तौर पर देखा जा रहा है।

सिक्किम कैडर में लौटने के बाद 2005 बैच के इस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को वहां मुख्य सचिव स्तर अथवा प्रमुख सचिव स्तर के अत्यंत महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में 11 वर्षों का उनका सेवाकाल यह साबित करता है कि प्रशासनिक दृढ़ता और स्पष्ट नीति के साथ काम करने वाला अधिकारी कैसे राजनीतिक उतार-चढ़ावों के बीच भी अपनी अमिट पहचान बना सकता है।

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