
सनातन धर्म में श्रावण मास देवाधिदेव महादेव की आराधना के लिए वर्ष का सबसे पवित्र और ऊर्जावान समय माना जाता है। सावन का प्रत्येक दिन शिव कृपा प्राप्त करने के लिए श्रेष्ठ है, लेकिन सावन के सोमवार का महत्व शास्त्रों में सबसे सर्वोच्च बताया गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और संपूर्ण सृष्टि के संचालन, पालन और कल्याण का दायित्व भगवान आशुतोष संभालते हैं।
सोमवार का दिन चंद्र ग्रह का दिन है और भगवान शिव ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर रखा है। जब भक्त सावन सोमवार के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करते हैं, तो उन्हें न केवल कायिक, वाचिक और मानसिक पापों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उनकी सभी मनोकामनाएं शीघ्र फलित होती हैं।
सावन सोमवार का व्रत रखने के 7 चमत्कारी और महापुण्यकारी लाभ
शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार सावन सोमवार का नियमित व्रत रखने वाले साधकों को जीवन में निम्नलिखित 7 दिव्य लाभ प्राप्त होते हैं:
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मनोवांछित जीवनसाथी और शीघ्र विवाह: कुंवारी कन्याओं और अविवाहित युवकों द्वारा सावन सोमवार का व्रत रखने से विवाह में आ रही सभी प्रकार की ग्रह बाधाएं और मांगलिक दोष दूर होते हैं। मां पार्वती की तरह ही सुयोग्य, संस्कारी और दीर्घायु जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
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अखंड सौभाग्य और दांपत्य सुख: विवाहित महिलाएं जब अपने पति और परिवार की रक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं, तो उनके वैवाहिक जीवन में प्रेम, समझ और स्थायित्व बढ़ता है। गृह क्लेश समाप्त होते हैं और परिवार में शांति स्थापित होती है।
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मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्ति: यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, विष योग बन रहा है या आप डिप्रेशन, अनिद्रा व अत्यधिक तनाव से जूझ रहे हैं, तो सावन सोमवार का व्रत मानसिक स्थिरता और आत्मबल प्रदान करता है।
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अकाल मृत्यु और गंभीर रोगों से रक्षा: भगवान शिव महामृत्युंजय हैं। सावन सोमवार के दिन व्रत रखकर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से जातक को असाध्य रोगों, दुर्घटनाओं और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।
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दरिद्रता का नाश और अकूत धन लाभ: सावन सोमवार पर शिवलिंग पर दूध, शहद, गन्ने का रस या अक्षत अर्पित करने से कुबेर देव और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। व्यापार में घाटा समाप्त होकर आय के नए स्रोत बनते हैं और भारी कर्ज से मुक्ति मिलती है।
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कालसर्प और राहु-केतु दोष का निवारण: चूंकि नाग देवता भगवान शिव के कंठ का आभूषण हैं, इसलिए सावन सोमवार के दिन व्रत व पूजा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष, पितृ दोष और राहु-केतु के दुष्प्रभावों का तुरंत शमन होता है।
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समस्त पापों का क्षय और मोक्ष की प्राप्ति: सावन सोमवार का व्रत व्यक्ति के संचित कर्मों के नकारात्मक बंधनों को काटता है और जातक को अंत समय में शिवलोक (मोक्ष) की प्राप्ति करवाता है।
बेलपत्र का आध्यात्मिक रहस्य: क्यों है यह भोलेनाथ को सर्वाधिक प्रिय?
शास्त्रों में कहा गया है कि ‘दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्’ यानी बेलपत्र के दर्शन और स्पर्श मात्र से पापों का नाश हो जाता है। बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और भगवान शिव के त्रिशूल व त्रिनेत्र का प्रतीक मानी जाती हैं।
समुद्र मंथन के समय जब महादेव ने सृष्टि की रक्षा के लिए हलाहल विष का पान किया था, तब उनके शरीर में तीव्र अग्नि और ताप उत्पन्न हो गया था। उस समय देवताओं ने विष की उग्रता और जलन को शांत करने के लिए भगवान शिव को जल और शीतल प्रकृति का बेलपत्र अर्पित किया था। तभी से भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र सबसे अनिवार्य और प्रिय द्रव्य माना जाता है।
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने और तोड़ने के 6 कड़े शास्त्रसम्मत नियम
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय और बेल के पेड़ से पत्तियां तोड़ते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा पूजा का फल निष्फल हो सकता है:
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इन विशेष तिथियों और दिनों पर बेलपत्र कभी न तोड़ें: शास्त्रों के अनुसार चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, संक्रांति और स्वयं सोमवार के दिन बेल के वृक्ष से पत्तियां तोड़ना पूर्णतः वर्जित है। सावन सोमवार की पूजा के लिए बेलपत्र हमेशा एक दिन पहले यानी रविवार की शाम सूर्यास्त से पूर्व ही तोड़कर रख लेना चाहिए।
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सूर्यास्त के बाद बेलपत्र न तोड़ें: संध्याकाल या सूर्यास्त के पश्चात वृक्षों को स्पर्श करना या पत्ते तोड़ना देव अपराध माना जाता है। बेलपत्र हमेशा दिन के उजाले में ही आदरपूर्वक तोड़ें।
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कटा-फटा या छिद्रित बेलपत्र न चढ़ाएं: शिवलिंग पर सदैव वही बेलपत्र चढ़ाएं जिसकी तीनों पत्तियां आपस में जुड़ी हों और जो कहीं से सूखा, कटा, फटा या कीड़ों द्वारा खाया हुआ (चक्र और वज्र युक्त) न हो।
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बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग से स्पर्श कराएं: बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पत्ते का चिकना (उल्टा) भाग हमेशा शिवलिंग के पत्थर को स्पर्श करना चाहिए और खुरदरा भाग ऊपर की ओर होना चाहिए।
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अंगूठे और अनामिका उंगली का प्रयोग: बेलपत्र की डंडी को अनामिका (रिंग फिंगर), मध्यमा और अंगूठे की सहायता से पकड़कर शिवलिंग के मध्य भाग पर श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
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बेलपत्र कभी बासी नहीं होता: शास्त्रों के अनुसार यदि आपके पास नया बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो मंदिर में पहले से चढ़ाए गए बेलपत्र को शुद्ध गंगाजल से धोकर पुनः शिवलिंग पर अर्पित किया जा सकता है। बेलपत्र कभी अशुद्ध या बासी नहीं माना जाता।
सावन सोमवार पर शिवलिंग अभिषेक और बेलपत्र अर्पण की सरल पूजा विधि
सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त हों और श्वेत, पीले अथवा हरे रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
पूजा के समय तांबे या चांदी के लोटे से गंगाजल और कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके पश्चात सफेद चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं। कम से कम 11, 21, 51 या 108 बेलपत्र लें और उन पर चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘राम’ नाम लिखें। एक-एक बेलपत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा बिल्वाष्टकम् स्तोत्र का पाठ करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें। अंत में धतूरा, भांग, मदार के पुष्प और फल चढ़ाकर धूप-दीप जलाएं और शिव आरती करके प्रसाद का वितरण करें।
काशी, उज्जैन और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में सावन की महिमा
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और संपूर्ण उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सावन सोमवार का उत्साह अद्वितीय होता है।
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श्री काशी विश्वनाथ धाम (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): सावन के सोमवार पर गंगाजल और बेलपत्र से बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक करने से करोड़ों जन्मों के दरिद्र योग नष्ट हो जाते हैं।
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श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश): भस्म आरती और विशेष पंचामृत अभिषेक के साथ नागचंद्रेश्वर व महाकाल का पूजन भक्तों के सभी संकट हर लेता है।
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मनकामेश्वर मंदिर (लखनऊ व प्रयागराज): लखनऊ के गोमती तट और प्रयागराज संगम के पास स्थित प्राचीन मनकामेश्वर मंदिरों में सावन सोमवार पर बेलपत्र चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं शीघ्र सिद्ध होती हैं।
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बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर): मनोकामना ज्योतिर्लिंग पर कांवरियों द्वारा गंगाजल और बेलपत्र अर्पण का विशेष आध्यात्मिक फल मिलता है।
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