ओटीटी पर आ गई संजय दत्त की पॉलिटिकल थ्रिलर ‘आखिरी सवाल’, जानिए किस प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं प्रोफेसर और बागी छात्र के वैचारिक टकराव की यह दमदार फिल्म

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय दत्त के फैंस और संजीदा सिनेमा के शौकीनों के लिए डिजिटल एंटरटेनमेंट की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आई है। सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद अब संजय दत्त की बहुचर्चित पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म ‘आखिरी सवाल’ ने ओटीटी की दुनिया में आधिकारिक तौर पर दस्तक दे दी है। यदि आप इस विचारोत्तेजक और समाज के अनसुलझे मुद्दों को छूने वाली फिल्म को सिनेमाघरों के बड़े पर्दे पर देखने से चूक गए थे, तो अब आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। यह फिल्म अब आपके मोबाइल और स्मार्ट टीवी की स्क्रीन पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध करा दी गई है, जहां आप घर बैठे इस दमदार कहानी का आनंद ले सकते हैं।

कहां और कब देख सकते हैं ‘आखिरी सवाल’? जानिए स्ट्रीमिंग से जुड़ी पूरी जानकारी

डिजिटल दर्शकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही था कि संजय दत्त की यह फिल्म किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दस्तक देगी। फिल्म निर्माताओं ने इसे प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ‘लायंसगेट प्ले’ (Lionsgate Play) पर रिलीज किया है। लायंसगेट प्ले ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर फिल्म का आकर्षक प्रोमो और पोस्टर साझा करते हुए इसके डिजिटल प्रीमियर की घोषणा की है।

जो भी दर्शक इस फिल्म को देखना चाहते हैं, वे लायंसगेट प्ले के ऐप या वेबसाइट पर जाकर इसका सब्सक्रिप्शन लेकर इसे फुल एचडी में देख सकते हैं। इसके अलावा जो यूजर्स विभिन्न ओटीटी बंडल पैक्स और टेलीकॉम सेवाओं के जरिए लायंसगेट प्ले का एक्सेस रखते हैं, वे भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस पॉलिटिकल ड्रामा को सीधे स्ट्रीम कर सकते हैं। डिजिटल रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इस फिल्म को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं और सिनेमा प्रेमी इसे अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर रहे हैं।

क्या है ‘आखिरी सवाल’ की कहानी? एक प्रोफेसर और बागी छात्र के बीच का वैचारिक युद्ध

फिल्म ‘आखिरी सवाल’ की मूल कहानी महज एक सामान्य ड्रामा नहीं है, बल्कि यह देश के सामाजिक ताने-बाने, इतिहास और विचारधाराओं के बीच की गहरी खींचतान को दर्शाती है। कहानी का मुख्य केंद्र प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी (संजय दत्त) हैं, जो एक बेहद संजीदा, सिद्धांतों पर चलने वाले और प्रतिष्ठित शिक्षाविद हैं। वहीं दूसरी तरफ उनका एक बेहद मेधावी लेकिन विद्रोही सोच रखने वाला छात्र विक्की हेगड़े (नमाशी चक्रवर्ती) है।

कहानी में नया मोड़ तब आता है जब छात्र विक्की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर गहन शोध करने के बाद अपने प्रोफेसर के सामने पांच बेहद तीखे और असहज करने वाले सवाल रखता है। क्लासरूम की चारदीवारी से शुरू हुआ यह सवाल-जवाब का सिलसिला धीरे-धीरे एक राष्ट्रीय बहस का रूप ले लेता है। मीडिया, राजनीतिक दल और आम जनता इस विवाद में कूद पड़ते हैं। फिल्म यह पड़ताल करती है कि क्या किसी विचारधारा के प्रति अंधभक्ति ही अंतिम सत्य है या फिर समय के साथ खुद से सवाल पूछने का साहस ही असली बौद्धिकता है।

संजय दत्त का संजीदा अभिनय और दमदार कलाकारों की जुगलबंदी

‘आखिरी सवाल’ में संजय दत्त का अंदाज उनके पारंपरिक एक्शन और गैंगस्टर किरदारों से बिल्कुल जुदा है। प्रोफेसर गोपाल नाडकर्णी के रूप में संजय दत्त ने अपनी संवाद अदायगी, चेहरे के भावों और आंखों की गहराई से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया है। संजय दत्त ने अपने एक बयान में भी कहा था कि प्रोफेसर नाडकर्णी का किरदार केवल कठोर सिद्धांतों वाला नहीं है, बल्कि उसके भीतर एक संवेदनशीलता, करुणा और खुद की मान्यताओं को टटोलने का साहस है।

मिथुन चक्रवर्ती के बेटे नमाशी चक्रवर्ती ने बागी छात्र की भूमिका में जबरदस्त ऊर्जा और आत्मविश्वास दिखाया है। संजय दत्त जैसे महानायक के सामने स्क्रीन शेयर करते हुए नमाशी का स्क्रीन प्रेजेंस बेहद प्रभावशाली नजर आता है। इनके अलावा फिल्म में अमित साध, समीरा रेड्डी, नीतू चंद्रा, त्रिधा चौधरी और अर्चना आर्या जैसे मंझे हुए कलाकारों ने सहायक भूमिकाओं में कहानी को मजबूत सहारा दिया है। हर किरदार का अपना एक वैचारिक दृष्टिकोण है जो दर्शकों को लगातार सोचने पर विवश करता है।

बॉक्स ऑफिस के बाद ओटीटी पर फिल्म को मिल रहा है नया जीवन

मई के महीने में जब ‘आखिरी सवाल’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, तो बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। बड़े बजट के एक्शन और कमर्शियल मसाला फिल्मों की भीड़ में यह गंभीर पॉलिटिकल थ्रिलर टिकट खिड़की पर दर्शकों को बड़ी संख्या में खींचने में संघर्ष करती दिखी।

हालांकि, सिनेमा विश्लेषकों का हमेशा से यह मानना रहा है कि वैचारिक और संजीदा विषय पर बनी फिल्में सिनेमाघरों की तुलना में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कहीं अधिक सफल होती हैं। ओटीटी का दर्शक वर्ग ऐसी कहानियों को शांति से बैठकर देखना और उनके तर्कों को समझना पसंद करता है। लायंसगेट प्ले पर आते ही आईएमडीबी (IMDb) और सोशल मीडिया पर दर्शकों के सकारात्मक रिव्यू मिलने शुरू हो गए हैं। दर्शकों का कहना है कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे हर उस व्यक्ति को जरूर देखना चाहिए जो समाज, इतिहास और राजनीति की गहरी समझ रखना चाहता है।

अभिजीत वारंग का निर्देशन और डॉ. कुमार विश्वास की कलम का जादू

इस फिल्म की तकनीकी और रचनात्मक टीम भी उतनी ही खास है। फिल्म का निर्देशन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक अभिजीत मोहन वारंग ने किया है, जिन्होंने कहानी के प्रवाह को कभी भी उबाऊ नहीं होने दिया। उन्होंने हर दृश्य में वैचारिक तनाव और किरदारों की मानसिक कशमकश को बहुत ही खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है।

फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार मोंटी शर्मा ने तैयार किया है, जिनका बैकग्राउंड स्कोर कहानी के सस्पेंस और गंभीरता को कई गुना बढ़ा देता है। वहीं फिल्म के गीतों को भारत के सुप्रसिद्ध कवि और गीतकार डॉ. कुमार विश्वास ने अपने शब्दों से सजाया है। कुमार विश्वास के लिखे गीत कहानी की आत्मा से सीधे जुड़ते हैं और फिल्म के मुख्य संदेश को दर्शकों के दिलों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

वीकेंड पर घर बैठे क्यों देखनी चाहिए ‘आखिरी सवाल’?

यदि आप इस वीकेंड किसी ऐसी फिल्म की तलाश में हैं जो केवल सतही मनोरंजन न दे बल्कि आपके दिमाग को झकझोरे और नई सोच दे, तो ‘आखिरी सवाल’ आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यह फिल्म किसी एक विचारधारा का अंधा समर्थन या विरोध नहीं करती, बल्कि यह सवाल पूछने की लोकतांत्रिक परंपरा को जीवित रखने की वकालत करती है।

संजय दत्त का सधा हुआ अभिनय, नमाशी चक्रवर्ती का विद्रोही तेवर, अभिजीत वारंग का कसा हुआ निर्देशन और कुमार विश्वास के विचारशील बोल इस फिल्म को एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं। लायंसगेट प्ले पर जाकर आप इस दिलचस्प बौद्धिक टकराव का हिस्सा बन सकते हैं।

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