9 महीने बाद अडियाला जेल में इमरान खान से मिलीं पत्नी बुशरा बीबी और बहन नोरीन नियाजी: सेहत और अस्पताल ट्रांसफर पर हुई अहम बातचीत

पाकिस्तान की राजनीति के सबसे बड़े केंद्र बने रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी अडियाला जेल के भीतर मंगलवार को उस समय भावुक और कूटनीतिक हलचल तेज हो गई, जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने मुलाकात की। सुरक्षा पाबंदियों और कड़े प्रतिबंधों के चलते करीब 9 महीने के लंबे अंतराल के बाद इस साल परिवार के किसी सदस्य की इमरान खान से यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

जेल सूत्रों के अनुसार, यह बैठक जेल परिसर के कॉन्फ्रेंस रूम में आयोजित की गई। बहन नोरीन नियाजी और इमरान खान के बीच बातचीत करीब 15 मिनट तक चली। इस संक्षिप्त बातचीत के दौरान नोरीन ने सबसे पहले 73 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री की शारीरिक सेहत और मानसिक स्थिति का हालचाल जाना। नोरीन ने इमरान खान को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस ऐतिहासिक अंतरिम फैसले की पूरी जानकारी दी, जिसमें अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि इमरान खान को मेडिकल जांच और सघन इलाज के लिए इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। बातचीत के दौरान चल रहे कानूनी मामलों, वकीलों की नई याचिकाओं और परिवार की चिंताओं पर भी संक्षिप्त चर्चा हुई। मुलाकात खत्म होने के बाद नोरीन नियाजी ने इमरान खान से मिलने की पुष्टि की, लेकिन कोर्ट को दिए गए पूर्व वादे के मुताबिक उन्होंने बाहर मौजूद मीडिया से कोई भी राजनीतिक बयानबाजी नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: ‘परिवार से मिलना मौलिक अधिकार, कोई अहसान नहीं’

अडियाला जेल में हुई यह बहुप्रतीक्षित मुलाकात पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ द्वारा दिए गए एक कड़े आदेश के बाद ही मुमकिन हो सकी। अदालत में जस्टिस शाहिद वहीद की अध्यक्षता वाली बेंच ने जेल प्रशासन और शहबाज शरीफ सरकार की उन दलीलों को खारिज कर दिया, जिनके तहत सुरक्षा का हवाला देकर परिवार और वकीलों की मुलाकातों पर अघोषित प्रतिबंध लगा दिया गया था।

शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि किसी भी विचाराधीन या सजायाफ्ता कैदी का अपने परिवार से मिलना कोई सरकारी अहसान नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त उसका मौलिक मानवाधिकार है। अदालत ने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि इमरान खान को हफ्ते में एक बार उनके परिवार के सदस्यों से मिलने की नियमित अनुमति दी जाए। इसके साथ ही, विदेश में रह रहे उनके दोनों बेटों (कासिम और सुलेमान) से सप्ताह में दो बार फोन कॉल के जरिए बात कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। अदालत ने पिछले 3 वर्षों के दौरान इमरान खान, उनकी बहनों और बेटों के बीच हुई सभी मुलाकातों और फोन कॉल्स का आधिकारिक रिकॉर्ड भी तलब किया है। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त भी जोड़ी कि इन पारिवारिक मुलाकातों का इस्तेमाल किसी भी तरह के राजनीतिक लाभ या भड़काऊ बयानों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में इलाज का निर्देश: इमरान की सेहत पर क्या है अपडेट?

इमरान खान के परिवार और वकीलों ने अदालत में बार-बार यह चिंता जताई थी कि जेल में लंबे समय तक अकेले बंद रहने के कारण उनकी सेहत लगातार गिर रही है। जेल की मेडिकल रिपोर्ट्स में भी उनके ब्लड प्रेशर के अनियंत्रित होने और गंभीर मानसिक तनाव की पुष्टि हुई थी। इसके अतिरिक्त, उनके वकीलों ने अदालत को बताया कि जेल की कोठरी में रोशनी की कमी और अनुचित परिस्थितियों के चलते इमरान खान की दाहिनी आंख की दृष्टि में काफी कमी आई है।

इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि इमरान खान को दो दिनों के भीतर इस्लामाबाद के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल ‘शिफा इंटरनेशनल’ में शिफ्ट किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक कि डॉक्टरों का विशेष बोर्ड उनके स्वास्थ्य की पूरी जांच न कर ले। इस मेडिकल बोर्ड में इमरान खान के निजी चिकित्सक डॉ. फैसल सुल्तान और उनकी बहन डॉ. उजमा खान को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया है, ताकि इलाज की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। 16 सितंबर को अदालत इस मामले की अगली सुनवाई करेगी।

दहगल चेकपॉइंट पर ड्रामा: केवल नोरीन को मिली जेल में एंट्री

सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी होते ही इमरान खान की तीनों बहनें—अलीमा खान, डॉ. उजमा खान और नोरीन नियाजी—अपने चचेरे भाई कासिम जमान के साथ रावलपिंडी की अडियाला जेल की तरफ रवाना हुईं। जेल की ओर जाने वाले मुख्य रास्ते पर स्थित दहगल चेकपॉइंट पर भारी पुलिस बल ने उनके काफिले को रोक लिया।

चेकपॉइंट पर घंटों चले गतिरोध और बातचीत के बाद पुलिस और जेल अधिकारियों ने केवल नोरीन नियाजी को ही जेल के अंदर जाने की अनुमति दी। अलीमा खान, डॉ. उजमा खान, चचेरे भाई और पीटीआई के अन्य नेताओं को बाहर ही रोक दिया गया। बाहर इंतजार कर रहीं अलीमा खान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि महीनों के अंधेरे के बाद आखिरकार अदालत से राहत की एक किरण दिखी है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा हालात में अभी भी कई अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

बुशरा बीबी से 35 मिनट की बातचीत और बच्चों से अलग मुलाकात

अडियाला जेल में ही बंद इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी को भी इसी दौरान इमरान खान से मिलने की अनुमति दी गई। दोनों के बीच करीब 30 से 35 मिनट तक बातचीत हुई। इस मुलाकात में दोनों ने एक-दूसरे की खैरियत जानी और जेल की परिस्थितियों व कानूनी घटनाक्रमों पर चर्चा की।

इमरान खान से मुलाकात के ठीक बाद, बुशरा बीबी को उनके अपने परिवार के सदस्यों से मिलने का समय दिया गया। जेल के उसी कॉन्फ्रेंस रूम में बुशरा बीबी ने अपने पहले विवाह से हुए बच्चों—मूसा मनेका और मुबाशिरा मनेका—तथा अपनी ननद मेहरुनिस्सा से करीब 35-40 मिनट तक मुलाकात की। परिवार के सदस्यों के लिए यह मुलाकात बेहद भावुक रही, क्योंकि वे भी लंबे समय से बुशरा बीबी से मिलने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।

शहबाज सरकार का पलटवार: निजी अस्पताल ट्रांसफर के खिलाफ रिव्यू पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट के इस मानवीय और मेडिकल राहत भरे आदेश के सामने आते ही पाकिस्तान की सत्ताधारी शहबाज शरीफ सरकार में हड़कंप मच गया। पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने का ऐलान कर दिया।

पाकिस्तान के संघीय कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश मौजूदा कानूनी परिधि से बाहर प्रतीत होता है। सरकार का मुख्य तर्क यह है कि देश की जेलों में हजारों कैदी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और उन सभी का इलाज सरकारी अस्पतालों में तय सरकारी नियमों के तहत होता है। कानून मंत्री ने सवाल उठाया कि यदि किसी एक विशेष राजनीतिक कैदी को बाहर के महंगे निजी अस्पताल में इलाज की विशेष छूट दी जाती है, तो क्या यही नियम देश के बाकी सभी कैदियों पर लागू किया जाएगा? सरकार चाहती है कि इमरान खान का इलाज जेल के भीतर ही डॉक्टरों की टीम से कराया जाए या फिर उन्हें किसी बड़े सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किया जाए।

अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व पीएम: कानूनी पेच और आगे का सियासी सफर

73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से लगातार जेल में बंद हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना भ्रष्टाचार मामले में 3 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उनके लाहौर स्थित आवास से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ सिफर (गुप्त राजनयिक संदेश लीक मामला), अल-कादिर ट्रस्ट और गैर-इस्लामी निकाह (इद्दत) जैसे कई गंभीर मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए और सजाएं सुनाई गईं।

हालांकि, पिछले कुछ महीनों में उच्च अदालतों ने उन्हें सिफर और इद्दत मामलों में बरी कर दिया है और तोशाखाना से जुड़े एक मामले में उनकी सजा पर रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद, अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 14 साल की सजा और कई अन्य नए मामलों के चलते उनकी रिहाई संभव नहीं हो सकी है। पीटीआई का लगातार यह आरोप रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री को राजनीति और चुनावों से पूरी तरह दूर रखने के लिए उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र के तहत झूठे मामले गढ़े गए हैं।

9 महीने बाद परिवार से हुई इस 15 मिनट की मुलाकात और अस्पताल ट्रांसफर के न्यायिक आदेश ने पीटीआई कार्यकर्ताओं और समर्थकों में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है, लेकिन शहबाज सरकार की पुनर्विचार याचिका और 16 सितंबर की अगली सुनवाई यह तय करेगी कि पूर्व प्रधानमंत्री को निजी अस्पताल में इलाज की राहत मिल पाती है या यह विवाद एक नए न्यायिक-राजनीतिक टकराव में तब्दील हो जाएगा।

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