
बॉलीवुड के ‘शहंशाह’ और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचना किसी भी इंसान के लिए एक सपने जैसा है। पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने भारतीय सिनेमा को ‘एंग्री यंग मैन’ से लेकर ‘विजय दीनानाथ चौहान’ और ‘अश्वत्थामा’ जैसे अनगिनत ऐतिहासिक किरदार दिए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बुलंद आवाज, विशालकाय कद-काठी और दमदार अभिनय के आज पूरी दुनिया में करोड़ों दीवाने हैं, करियर के शुरुआती दिनों में उसी लंबाई और आवाज के लिए अमिताभ बच्चन को घोर अपमान, तानों और रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था? हाल ही में रियलिटी गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18) के मंच पर बिग बी ने अपने संघर्ष के दिनों का एक ऐसा अनसुना और भावुक किस्सा साझा किया, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे एक दौर में उन्हें “एक्टिंग नहीं आती” कहकर घर जाने की सलाह दी जाती थी और एक डायरेक्टर ने शूटिंग पर थोड़ी देर से पहुंचने पर सीधे ‘गेट आउट’ कहकर सेट से बाहर निकाल दिया था।
‘तुम बहुत लंबे हो, घर जाओ’: जब कद और एक्टिंग को लेकर मिले थे तीखे ताने
‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ के एक विशेष एपिसोड में अमिताभ बच्चन देश का मान बढ़ाने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट एथलीटों—लवलीना बोरगोहेन, झंडू कुमार, शर्मिला धनखड़ और अस्मिता डे का स्वागत कर रहे थे। खेल और कड़े अभ्यास की चर्चा के दौरान युवा जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने बिग बी से एक मासूम सवाल पूछा कि जैसे खेल में गलती करने पर उनके कोच उन्हें कड़ी डांट लगाते हैं, क्या फिल्मों में काम करते समय निर्देशकों से कभी बड़े अभिनेताओं को भी ऐसी डांट पड़ती है?
इस सवाल पर अमिताभ बच्चन पहले तो मुस्कुराए और फिर उन्होंने अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों की यादों के पन्ने खोल दिए। बिग बी ने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें निर्देशकों और फिल्म निर्माताओं की जबरदस्त डांट सुननी पड़ती थी। उन्होंने बताया, “हमको बड़ी डांट पड़ती है, शुरू-शुरू में तो बहुत ज्यादा पड़ी थी। लोग सीधे मुंह पर कह देते थे—’तुम्हें कुछ आता-जाता नहीं है, एक्टिंग-वैक्टिंग, तुम बहुत लंबे हो, जाकर घर वापस बैठो’।” उस समय की फिल्म इंडस्ट्री में 6 फीट से अधिक लंबे नायक की कल्पना करना निर्देशकों के लिए मुश्किल था। निर्माताओं को लगता था कि इतनी लंबी कद-काठी वाले हीरो के सामने कोई भी अभिनेत्री फिट नहीं बैठेगी और उनका स्क्रीन फ्रेम अजीब दिखेगा।
उधार की कार, शूटिंग में देरी और डायरेक्टर का फरमान: ‘पैकअप हो गया, गेट आउट’
अमिताभ बच्चन ने सेट पर हुए एक बेहद अपमानजनक और दिल तोड़ने वाले वाकये को याद करते हुए बताया कि कैसे एक बार उन्हें सेट से बेइज्जत करके बाहर निकाल दिया गया था। बिग बी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी समय की पाबंदी (Punctuality) के लिए जाने जाते हैं, लेकिन करियर के शुरुआती दौर में एक दिन वे शूटिंग के लिए देर से पहुंचे।
उस दौर में अमिताभ बच्चन के पास अपनी खुद की कोई गाड़ी नहीं थी। वे मुंबई की तंग गलियों में बस और लोकल ट्रेनों से सफर करते थे या कभी-कभार दोस्तों से मदद मांगते थे। उस दिन भी वे किसी दूसरे की कार मांगकर भारी ट्रैफिक के बीच जैसे-तैसे सेट पर पहुंचे। जब वे पहुंचे, तो फिल्म के निर्देशक सेट के मुख्य दरवाजे पर ही गुस्से में खड़े थे। बिग बी को देखते ही निर्देशक ने बेहद कड़े लहजे में कहा, “शूटिंग पैकअप हो चुकी है। यहां से सीधे निकलो (Get out from here)।” उस समय के युवा अमिताभ बच्चन के पास अपनी सफाई देने का कोई मौका नहीं था और उन्हें बिना शूटिंग किए वहां से लौटना पड़ा। अमिताभ ने बताया कि इस कड़वे अनुभव ने उन्हें जीवन भर के लिए समय का सबसे बड़ा महत्व सिखा दिया।
‘क्या यह कोई तरीका है डायलॉग बोलने का?’: काम मिलने के बाद भी नहीं थमी थी आलोचना
अमिताभ बच्चन ने आगे खुलासा किया कि जब उन्हें फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिलने शुरू हुए, तब भी उनकी राह आसान नहीं हुई। सेट पर हर शॉट के बाद उन पर टिप्पणियां की जाती थीं। बिग बी ने कहा, “फिर जब आखिरकार काम मिलना शुरू हुआ, तो डायरेक्टर कहते थे—’अच्छा चलो ठीक है, उधर खड़े हो जाओ और डायलॉग बोलो।’ जैसे ही मैं बोलता, वे टोकते—’ऐसे कोई डायलॉग बोलने का तरीका है?'”
निर्देशक उन्हें लगातार टोकते, सुधारते और अपनी शैली बदलने का दबाव बनाते थे। लेकिन अमिताभ बच्चन ने इन तीखी आलोचनाओं को कभी नकारात्मकता के रूप में नहीं लिया। उन्होंने कभी किसी निर्देशक से बहस नहीं की, बल्कि हर डांट को अपने अभिनय को निखारने का जरिया बनाया। वे लगातार शीशे के सामने घंटों संवाद बोलने का अभ्यास करते और अपनी कमियों को दूर करने में जुटे रहते थे।
आवाज के लिए रेडियो ने नकारा, लगातार 12 फ्लॉप फिल्में: पर कभी नहीं मानी हार
अमिताभ बच्चन का शुरुआती फिल्मी सफर असफलताओं की एक लंबी दास्तान रहा है। अभिनय में कदम रखने से पहले 1969 में उन्होंने मृणाल सेन की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘भुवन शोम’ में एक वॉइस-ओवर आर्टिस्ट के तौर पर अपनी आवाज दी थी। उसी दौर में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में समाचार वाचक (न्यूजरीडर) की नौकरी के लिए ऑडिशन दिया था। लेकिन आकाशवाणी के अधिकारियों ने यह कहकर उनका चयन करने से इनकार कर दिया कि उनकी आवाज जरूरत से ज्यादा भारी, अजीब और रेडियो प्रसारण के अनुपयुक्त है।
1969 में ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से अपने अभिनय का आगाज करने के बाद अमिताभ बच्चन को लगातार एक के बाद एक करीब 12 फ्लॉप फिल्मों का सामना करना पड़ा था। लोग उन्हें ‘अनलकी एक्टर’ का तमगा देने लगे थे और कई बड़े फिल्ममेकर्स ने उनके साथ काम करने से हाथ खींच लिए थे। लेकिन 1973 में जब प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ रिलीज हुई, तो बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तूफान आया जिसने हिंदी सिनेमा का इतिहास हमेशा के लिए बदल दिया। जिस आवाज, जिस लंबी कद-काठी और जिस गंभीर तेवर को कभी इंडस्ट्री ने खारिज किया था, वही पूरे देश में ‘एंग्री यंग मैन’ का प्रतीक बन गई।
जिन कमियों पर समाज ने कसा था तंज, उन्हीं को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत
अमिताभ बच्चन की यह जीवन यात्रा सिर्फ एक फिल्मी किस्सा नहीं है, बल्कि दुनिया भर के युवाओं और संघर्ष कर रहे कलाकारों के लिए एक महान प्रेरणा है। जिस समाज और फिल्म बिरादरी ने उनकी शारीरिक बनावट (हाइट), उनकी आवाज के बैरिटोन और उनकी अनूठी संवाद अदायगी को कमजोरी बताकर रिजेक्ट किया था, अमिताभ बच्चन ने उन्हीं विशेषताओं को अपनी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) बना दिया।
‘दीवार’, ‘शोले’, ‘डॉन’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ और ‘अग्निपथ’ से लेकर ‘मोहब्बतें’, ‘ब्लैक’, ‘पा’, ‘पीकू’ और ‘पिंक’ तक—अमिताभ बच्चन ने हर दशक में खुद को नए सिरे से गढ़ा। आज 83 वर्ष की आयु में भी वे 24-24 घंटे के लंबे शेड्यूल में शूटिंग करते हैं और ‘कल्कि 2898 एडी’ के सीक्वल जैसी भव्य पैन-इंडिया फिल्मों में युवा एक्शन हीरोज को टक्कर देते हैं। उनका यह सफर साबित करता है कि जब दुनिया आप पर हंसती है और आपकी राह में रिजेक्शन की दीवारें खड़ी करती है, तो आपका धैर्य, अनुशासन और लगातार सीखने की भूख ही आपको आम से ‘महानायक’ बनाती है।
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