
भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट मुकाबले के निर्णायक मोड़ पर भारतीय टीम की रणनीतिक योजना को लेकर क्रिकेट गलियारों में बड़ी बहस छिड़ गई थी। भारतीय टीम ने पहली पारी में 462 रन बनाकर 178 रनों की मजबूत बढ़त हासिल की थी और दूसरी पारी में 48.5 ओवर में 193 रनों पर ऑलआउट होकर मेजबान श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा था। हालांकि चौथे दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने दूसरी पारी में 84 रन पर अपने 4 प्रमुख विकेट गंवा दिए थे, लेकिन भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ रहे पूर्व दिग्गज बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा का मानना था कि टीम इंडिया ने अपनी पारी घोषित करने के समय में थोड़ी चूक कर दी थी। पुजारा के अनुसार, यदि पांचवें दिन मौसम बिगड़ता या बारिश खलल डालती, तो भारतीय खेमे को 5-6 ओवर पहले पारी घोषित न करने का भारी मलाल हो सकता था।
‘बारिश आने पर होता पछतावा’: डिक्लेरेशन टाइमिंग पर पुजारा की दो-टूक
क्रिकेट विशेषज्ञ के तौर पर ईएसपीएन क्रिकइन्फो पर मैच का विश्लेषण करते हुए चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय कप्तान और टीम प्रबंधन की डिक्लेरेशन रणनीति पर खुलकर बात की। पुजारा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय टीम को अपनी दूसरी पारी ऑलआउट होने का इंतजार किए बिना 5 से 6 ओवर पहले ही घोषित कर देनी चाहिए थी।
पुजारा ने अपनी राय रखते हुए कहा, “5-6 ओवर पहले पारी घोषित हो जानी चाहिए थी। एक टीम के तौर पर अगर आप 370 रनों के स्कोर तक पहुंचना चाहते हैं, तो शायद आप थोड़ी और तेजी से रन बनाने की कोशिश कर सकते हैं। अगर बारिश ने अड़ंगा नहीं लगाया तो भारत यह मैच आसानी से जीत सकता है। हालांकि, अगर बारिश ने परेशान किया तो आप पांचवें दिन ऐसी स्थिति में बिल्कुल नहीं रहना चाहेंगे जहां आप ड्रेसिंग रूम में बैठकर यह सोचें कि काश हम पांच-छह ओवर पहले पारी घोषित कर देते।” पुजारा का यह तर्क गॉल के अनिश्चित मौसम और तटीय इलाकों में अचानक होने वाली बारिश की आशंका को ध्यान में रखकर दिया गया था, जहां कई बार एक छोटा सा स्पैल भी पूरे मैच का नतीजा ड्रॉ में बदल देता है।
गॉल का ऐतिहासिक रिकॉर्ड और 372 रनों का अभेद्य लक्ष्य
पुजारा के इस बयान के पीछे गॉल के मैदान का ऐतिहासिक ट्रैक रिकॉर्ड भी एक बड़ा आधार था। गॉल के मैदान पर चौथी पारी में 300 से अधिक रनों का लक्ष्य हासिल करना हमेशा से नामुमकिन जैसा रहा है। टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में इस मैदान पर केवल एक बार 300 से अधिक रन का सफल चेज हुआ है। यह रिकॉर्ड साल 2022 में पाकिस्तान की टीम ने बनाया था, जब उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 344 रनों का ऐतिहासिक लक्ष्य हासिल किया था।
ऐसे में श्रीलंका को दिया गया 372 रनों का लक्ष्य इस मैदान के सबसे बड़े सफल रन चेज के रिकॉर्ड से भी 28 रन अधिक था। पुजारा का मानना था कि जब लक्ष्य पहले ही ऐतिहासिक रूप से सुरक्षित दायरे में पहुंच चुका था, तो भारतीय बल्लेबाजों को टेल-एंडर्स के साथ समय बिताने के बजाय कुछ ओवर पहले पारी घोषित करके चौथे दिन के अंतिम सत्र में श्रीलंकाई बल्लेबाजों पर और अधिक ओवरों का मानसिक दबाव बनाना चाहिए था।
पांचवें दिन तेज गेंदबाजों का महत्व: पुजारा ने सुझाया पेस-स्पिन रोटेशन प्लान
गॉल की घूमती और टूटती पिच पर पांचवें दिन जहां हर किसी की नजरें सिर्फ स्पिनरों पर टिकी थीं, वहीं चेतेश्वर पुजारा ने एक अलग और रणनीतिक दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने आगाह किया कि पांचवें दिन भारतीय तेज गेंदबाजों की भूमिका को कतई कम नहीं आंका जाना चाहिए।
पुजारा ने 5वें दिन की सुबह भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए सटीक योजना सुझाते हुए कहा, “मुझे लगता है कि भारत को एक छोर से सीमर (तेज गेंदबाज) के साथ शुरुआत करनी चाहिए। मैं चाहूंगा कि मोहम्मद सिराज एक छोर से गेंदबाजी की शुरुआत करें और दूसरे छोर से आप कुलदीप यादव या मानव सुथार में से किसी एक स्पिनर को गेंद थमाएं। रणनीति यह होनी चाहिए कि सिराज के चार ओवर और उसके बाद प्रसिद्ध कृष्णा के चार ओवर एक छोर से कराए जाएं। एक छोर से तेज गेंदबाजों का दबाव बना रहे और दूसरे छोर से स्पिनरों को लगातार रोटेट किया जाए।” पुजारा का मानना था कि सुबह की ताजगी और रिवर्स स्विंग का फायदा उठाकर पेसर्स विपक्षी टीम की मध्यक्रम की कमर तोड़ सकते हैं।
मानव सुथार का ऐतिहासिक पंजा और गॉल में टीम इंडिया की प्रचंड विजय
मैच के पांचवें दिन पुजारा की रणनीति और भारतीय गेंदबाजों के अनुशासन का शानदार तालमेल देखने को मिला। हालांकि कप्तान धनंजय डिसिल्वा (59) और पहली पारी के शतकवीर सोनल दिनुशा (84) ने पांचवें विकेट के लिए 95 रनों की जुझारू साझेदारी करके भारतीय खेमे की धड़कनें थोड़ी देर के लिए बढ़ाईं, लेकिन लंच के बाद युवा लेफ्ट-आर्म स्पिनर मानव सुथार ने गेंद से ऐसा कहर बरपाया कि श्रीलंकाई टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
मानव सुथार ने 75वें ओवर में तीन गेंदों के भीतर तीन बड़े झटके देकर श्रीलंका की उम्मीदों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। सुथार ने दूसरी पारी में 55 रन देकर 6 विकेट चटकाए और मैच में कुल 10 विकेट अपने नाम किए। श्रीलंका की पूरी टीम दूसरी पारी में 206 रनों पर सिमट गई और भारत ने यह मुकाबला 165 रनों के विशाल अंतर से जीतकर दो मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली।
क्या पुजारा की चिंताएं जायज थीं? टेस्ट क्रिकेट में रणनीतिक समय का महत्व
भले ही भारतीय टीम ने अंततः मुकाबला 165 रनों से जीत लिया, लेकिन चेतेश्वर पुजारा का विश्लेषण आधुनिक टेस्ट क्रिकेट की उस गहरी समझ को दर्शाता है जहां मैच जीतने के लिए एक-एक सत्र और कुछ ओवरों का अंतर निर्णायक साबित होता है। विदेशी पिचों पर खेलते समय मौसम, ओवर रेट और डिक्लेरेशन का सही समय कई बार जीत और ड्रॉ के बीच की रेखा खींच देता है।
पुजारा का यह बयान भारतीय टीम प्रबंधन के लिए भविष्य के विदेशी दौरों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सबक की तरह है कि जब विपक्षी टीम पर भारी मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल हो, तो समय को अपने पक्ष में रखते हुए अधिक आक्रामक निर्णय लेना ही एक चैंपियन टेस्ट टीम की असली पहचान होता है।
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