
भारतीय टेस्ट क्रिकेट के एक सदी से भी लंबे इतिहास में कई महान विकेटकीपरों ने अपने दस्तानों और बल्ले से देश का मान बढ़ाया है। फारुख इंजीनियर के बेखौफ अंदाज से लेकर सैयद किरमानी की तकनीकी महारत और महेंद्र सिंह धोनी की शांत फिनिशिंग व कप्तानी तक—भारत ने हमेशा विश्वस्तरीय कीपर देखे हैं। लेकिन लाल गेंद के सबसे लंबे और कठिन प्रारूप (Test Cricket) में जब विशुद्ध बल्लेबाजी प्रभाव, मैच जिताऊ पारियों और खेल का रुख पलटने की क्षमता की बात आती है, तो 28 वर्षीय ऋषभ पंत ने उन सभी पैमानों को बहुत पीछे छोड़ दिया है। श्रीलंका के खिलाफ गॉल (Galle) में खेले गए पहले टेस्ट मैच की दूसरी पारी में 69 गेंदों पर 66 रनों की तूफानी पारी खेलने और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज 100 छक्के लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद क्रिकेट जगत के विशेषज्ञों ने एकमत से यह घोषणा कर दी है कि ‘भारतीय टेस्ट इतिहास में ऋषभ पंत से बेहतर विकेटकीपर-बल्लेबाज कभी नहीं हुआ’।
‘नॉस्टैल्जिया अपनी जगह, लेकिन पंत जैसा कोई नहीं’: पूर्व दिग्गजों का बेबाक दावा
गॉल टेस्ट में श्रीलंका के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाने के बाद पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज व मशहूर क्रिकेट विश्लेषक आकाश चोपड़ा ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर ऋषभ पंत के कद को रेखांकित करते हुए कहा, “यह पारी एक बार फिर दुनिया को याद दिलाती है कि भारतीय टेस्ट क्रिकेट के पूरे इतिहास में ऋषभ पंत से बेहतर कोई कीपर-बैटर पैदा नहीं हुआ है। वह लगातार रन बनाते हैं, विकेट के पीछे बेहतरीन हैं, टीम को निडरता से आगे बढ़ाते हैं और अपनी नॉन-स्टॉप कमेंट्री से सबको जगाए रखते हैं। वह शुद्ध रूप से मैच के ‘एक्स-फैक्टर’ हैं।” चोपड़ा ने आगे कहा कि पंत एक ऐसे दुर्लभ खिलाड़ी हैं जो दर्शकों को टेस्ट क्रिकेट के प्यार में पड़ने पर मजबूर कर देते हैं।
वहीं, पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज दोड्डा गणेश ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पुरानी यादों और वास्तविक आंकड़ों के बीच संतुलन बनाते हुए लिखा, “पुरानी यादें (Nostalgia) अपनी जगह बहुत खूबसूरत हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि भारत के पास टेस्ट प्रारूप में ऋषभ पंत से बेहतर कोई विकेटकीपर-बल्लेबाज कभी रहा है। पिछले 50 से अधिक टेस्ट मैचों में उन्होंने बल्ले से जो प्रभाव छोड़ा है और अकेले दम पर जितने मैच भारत को जिताए हैं, वह अतीत के सबसे महान बल्लेबाजों के बराबर है। पंत टेस्ट फॉर्मेट में सचमुच एक जीनियस हैं।”
गॉल में रचा विश्व कीर्तिमान: सबसे तेज 100 टेस्ट छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज
ऋषभ पंत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट की दूसरी पारी में जैसे ही छक्का लगाकर अपना पचासा पूरा किया, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एक नया अध्याय लिख दिया। वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में 100 छक्के लगाने वाले दुनिया के सबसे तेज बल्लेबाज बन गए। पंत ने यह ऐतिहासिक मुकाम अपने 51वें टेस्ट मैच की 89वीं पारी में हासिल किया।
इस मामले में उन्होंने आधुनिक क्रिकेट के सबसे आक्रामक खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया:
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ऋषभ पंत (भारत): मात्र 89 पारियों में 100 छक्के (दुनिया में सबसे तेज और इकलौते भारतीय)।
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एडम गिलक्रिस्ट (ऑस्ट्रेलिया): 130 पारियों में 100 छक्के।
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बेन स्टोक्स (इंग्लैंड): 151 पारियों में 100 छक्के।
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ब्रेंडन मैकुलम (न्यूजीलैंड): 170 पारियों में 100 छक्के।
पंत टेस्ट इतिहास में 100 छक्के पूरे करने वाले दुनिया के केवल चौथे बल्लेबाज और भारत के पहले क्रिकेटर हैं। भारत की तरफ से टेस्ट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का पिछला रिकॉर्ड पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग (91 छक्के) और रोहित शर्मा के नाम था, जिन्हें पंत ने बहुत कम पारियों में पीछे छोड़ दिया।
आंकड़ों की गवाही: 8 शतकों के साथ एमएस धोनी को भी छोड़ा पीछे
यदि पारंपरिक विकेटकीपिंग आंकड़ों की तुलना की जाए, तो महेंद्र सिंह धोनी ने भारत के लिए 90 टेस्ट मैचों में 38.09 की औसत से 4,876 रन बनाए थे, जिसमें 6 शतक और 33 अर्धशतक शामिल थे। वहीं, ऋषभ पंत ने केवल 51 टेस्ट मैचों में 43 से अधिक की शानदार औसत और 74 से ऊपर के हैरतअंगेज स्ट्राइक रेट से 3,600 से अधिक रन बना लिए हैं।
सबसे बड़ा अंतर शतकों की संख्या में है। भारतीय विकेटकीपरों की सूची में पंत 8 टेस्ट शतकों के साथ शीर्ष पर काबिज हैं, जबकि धोनी 6 शतकों के साथ दूसरे, रिद्धिमान साहा 3 शतकों के साथ तीसरे और फारुख इंजीनियर व सैयद किरमानी 2-2 शतकों के साथ उनके पीछे हैं। पंत इकलौते ऐसे भारतीय विकेटकीपर हैं जिन्होंने इंग्लैंड के हेडिंग्ले में खेले गए टेस्ट की दोनों पारियों में शतक जड़ने का करिश्मा किया था। दस्तानों के साथ भी पंत 180 से अधिक शिकार (कैच और स्टंपिंग) करके धोनी और किरमानी के बाद भारत के तीसरे सबसे सफल विकेटकीपर बन चुके हैं।
सेना (SENA) देशों में विदेशी पिचों पर बेखौफ राज: गाबा से लेकर सिडनी और ओवल तक
ऋषभ पंत को दुनिया के बाकी सभी विकेटकीपरों से अलग खड़ा करने वाली सबसे बड़ी खूबी विदेशी पिचों पर उनका दबदबा है। एशियाई उपमहाद्वीप के विकेटकीपर बल्लेबाजों के लिए ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका (SENA Countries) की उछाल भरी और तेज पिचों पर रन बनाना हमेशा से सबसे कठिन चुनौती रहा है। लेकिन पंत का विदेशी धरती पर औसत 41 से अधिक का है।
पंत दुनिया के अकेले ऐसे एशियाई विकेटकीपर हैं जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया (सिडनी और ब्रिस्बेन), इंग्लैंड (ओवल और एजबेस्टन) और दक्षिण अफ्रीका (केपटाउन) तीनों देशों की सरजमीं पर टेस्ट शतक जड़े हैं। साल 2021 में ब्रिस्बेन के गाबा (Gabba) मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के 32 साल के अजेय किले को ढहाते हुए पंत की नाबाद 89 रनों की ऐतिहासिक पारी को भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे महान चौथी पारी माना जाता है। इसी तरह मेलबर्न, सिडनी और नॉटिंघम में संकट के समय उनकी आक्रामक पारियों ने मैच को ड्रॉ कराने के बजाय सीधे भारत की झोली में जीत डाली।
सिर्फ रन नहीं, मैच का मिजाज बदलने वाला असली ‘एक्स-फैक्टर’
ऋषभ पंत की उपयोगिता केवल स्कोरबोर्ड पर बने रनों से नहीं आंकी जा सकती, बल्कि जिस अंदाज में वे रन बनाते हैं वह विपक्षी कप्तानों की पूरी फील्डिंग और रणनीति को तहस-नहस कर देता है। जब टीम इंडिया 50 रन पर 4 या 5 विकेट गंवाकर संकट में होती है, तब पारंपरिक बल्लेबाज केवल क्रीज पर टिकने और गेंदें खाली निकालने की सोचते हैं। इसके विपरीत, पंत गेंदबाजों पर टूट पड़ते हैं और रिवर्स स्वीप, स्कूप व कदमों का इस्तेमाल कर दबाव को सीधे विपक्षी टीम पर ट्रांसफर कर देते हैं।
विकेट के पीछे भी पंत का ऊर्जावान रवैया टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत है। स्टंप माइक में कैद होने वाली उनकी मजेदार टिप्पणियां, गेंदबाजों की हौसलाअफजाई और बल्लेबाजों का ध्यान भटकाने की कला खेल के नीरस से नीरस सत्र में भी टीम के उत्साह को चरम पर रखती है। जब हालात सबसे कठिन होते हैं, तब पंत का खेल अपने सर्वोच्च स्तर पर होता है।
मौत के मुंह से निकलकर वापसी: अदम्य साहस और समर्पण की बेमिसाल दास्तान
पंत का यह मुकाम इसलिए भी अकल्पनीय है क्योंकि दिसंबर 2022 में हुए एक भीषण कार हादसे में वे बाल-बाल बचे थे। उस हादसे में उनके घुटने के सभी लिगामेंट्स फट गए थे और डॉक्टरों ने यहां तक आशंका जताई थी कि क्या वे कभी दोबारा सामान्य रूप से चल भी पाएंगे। लेकिन कठिन सर्जरी, 15 महीने के दर्दनाक रिहैबिलिटेशन और अटूट इच्छाशक्ति के बल पर पंत ने न केवल मैदान पर वापसी की, बल्कि पहले टी20 विश्व कप जीता और फिर टेस्ट क्रिकेट में लौटते ही दुनिया के गेंदबाजों की नींद उड़ा दी।
28 साल की उम्र में ऋषभ पंत अपने करियर के उस स्वर्णिम पड़ाव पर हैं जहां उनके सामने कई साल का क्रिकेट बाकी है। जिस रफ्तार से वे रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर रहे हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि संन्यास लेते वक्त वे न केवल भारत के, बल्कि एडम गिलक्रिस्ट के बाद दुनिया के सर्वकालिक महानतम टेस्ट विकेटकीपर-बल्लेबाजों की श्रेणी में निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर खड़े होंगे।
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