
उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल के प्रमुख राजनीतिक केंद्र गोंडा में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ एक बार फिर तीखा मोर्चा खोल दिया है। गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव के ‘स्वदेशी अभियान’ से लेकर उनके आंदोलन करने के तौर-तरीकों पर तीखे कटाक्ष किए।
अपने बेबाक और आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व सांसद ने दावा किया कि बाबा रामदेव ने जिस स्वदेशी के नाम पर देश भर में अपना साम्राज्य खड़ा किया, वह अब केवल व्यापार और नकली उत्पादों के कारोबार तक सीमित हो चुका है। बृजभूषण सिंह ने रामदेव की आंदोलन करने की क्षमता पर सीधा सवाल उठाते हुए उन्हें चुनौती दी कि यदि वे कोई आंदोलन करना चाहते हैं, तो इस बार मैदान में टिककर निर्णायक लड़ाई लड़ें।
‘स्वदेशी के नाम पर शुरू हुआ खेल, विदेशी चड्ढी और नकली घी तक पहुंचा’
समारोह में उपस्थित विशाल जनसमूह और स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि आयुर्वेद और बाबा रामदेव के व्यावसायिक मॉडल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव ने वर्षों पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के बहिष्कार और भारतीय घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देने का दावा करते हुए स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की थी।
पूर्व सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि स्वदेशी की वकालत करते-करते अब स्थिति यह हो गई है कि वे विदेशी शैली के अंडरगारमेंट्स (चड्ढी) और तरह-तरह के गैर-पारंपरिक उत्पाद बनाने और बेचने लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में बड़े पैमाने पर नकली घी बेचने का जो कल्चर फैला है, उसकी शुरुआत और उसे बढ़ावा देने में बाबा रामदेव के व्यावसायिक तंत्र की बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने साफ कहा कि शुद्धता के नाम पर बाजार में उपभोक्ताओं के भरोसे के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
‘सलवार और सिंदूर छोड़ इस बार मर्द की तरह मैदान में उतरें’
बृजभूषण शरण सिंह ने केवल उत्पादों तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि बाबा रामदेव के पुराने राजनीतिक व सामाजिक आंदोलनों की याद दिलाते हुए उन पर व्यक्तिगत प्रहार भी किए। उन्होंने वर्ष 2011 के दिल्ली के रामलीला मैदान में काले धन के खिलाफ हुए आंदोलन का अप्रत्यक्ष संदर्भ देते हुए कहा कि जो व्यक्ति पुलिस कार्रवाई के डर से महिलाओं के कपड़े और सलवार पहनकर भाग खड़ा हुआ हो, उसे अब देश का कोई भी नागरिक गंभीरता से नहीं लेता है।
पूर्व सांसद ने दो टूक शब्दों में कहा कि बाबा रामदेव में जन आंदोलन का नेतृत्व करने का नैतिक साहस और क्षमता नहीं बची है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर बाबा रामदेव को सचमुच किसी मुद्दे पर आंदोलन करना है, तो इस बार उन्हें सिंदूर, टिकुली या सलवार पहनने की जरूरत नहीं है, बल्कि एक मर्द की तरह मैदान में डटकर आर-पार की लड़ाई लड़नी चाहिए।
देश में मिलावटखोरी और खाद्य पदार्थों के संकट पर बड़ा दावा
कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने देश में खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावटखोरी के गंभीर संकट पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत में उपलब्ध वास्तविक दूध उत्पादन की मात्रा देश की कुल आबादी की दैनिक जरूरत के मुकाबले काफी कम है। इसके बावजूद बाजार में दूध, पनीर, मावा और घी की भारी उपलब्धता इस बात का प्रमाण है कि मिलावटी और सिंथेटिक उत्पादों का जाल कितना गहरा फैल चुका है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वे पिछले दो दशकों से नकली घी, मिलावटी तेल और केमिकल युक्त खाद्य पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाते आ रहे हैं। पूर्व सांसद ने दावा किया कि यदि देश और प्रदेश स्तर पर खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावटखोरों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त अभियान चला दे, तो चारों तरफ हड़कंप मच जाएगा।
गोंडा के रघुकुल विद्यापीठ में 1400 मेधावी छात्रों का सम्मान
यह पूरा घटनाक्रम गोंडा जिले के रघुकुल विद्यापीठ परिसर में आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह के दौरान सामने आया। कार्यक्रम में विकासखंड पडरी कृपाल, झंझरी, रूपईडीह और गोंडा सदर के 47 विभिन्न माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 1400 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया।
बृजभूषण शरण सिंह ने छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शिक्षित और संस्कारवान युवा ही राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी पूंजी हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप उर्फ बमबम, पूर्व जिलाध्यक्ष सूर्य नारायण तिवारी, ब्लॉक प्रमुख आशीष मिश्रा, सुमित भूषण सिंह, पंकज सिंह, डॉ. ओएन पांडेय सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और स्थानीय शिक्षक मौजूद रहे।
बृजभूषण बनाम रामदेव: पहले भी टकरा चुके हैं दोनों दिग्गज
यह पहला मौका नहीं है जब बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव पर निशाना साधा है। दोनों के बीच तल्खी का इतिहास पुराना रहा है:
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महर्षि पतंजलि की जन्मस्थली विवाद: वर्ष 2022 में भी बृजभूषण शरण सिंह ने बाबा रामदेव और पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ मोर्चा खोला था। उन्होंने मांग की थी कि कंपनी को ‘पतंजलि’ नाम का व्यावसायिक उपयोग बंद करना चाहिए, क्योंकि उन्होंने महर्षि पतंजलि की ऐतिहासिक जन्मस्थली (गोंडा के कोंडर गांव) के विकास के लिए कोई ठोस योगदान नहीं दिया।
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पतंजलि घी की शुद्धता पर सवाल: पूर्व में भी उन्होंने पतंजलि के घी के सैंपल्स और उसकी शुद्धता पर सार्वजनिक सवाल खड़े किए थे, जिसे लेकर काफी राजनीतिक और कानूनी हलचल मची थी।
बृजभूषण शरण सिंह के इस नए बयान के बाद सोशल मीडिया और उत्तर प्रदेश के सियासी हलकों में बहस छिड़ गई है।
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