
उत्तर प्रदेश में मानसून के मिजाज में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। राजधानी लखनऊ समेत राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश के अलर्ट के बीच मौसम ने अचानक करवट ली है। जहां पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों में शनिवार सुबह हल्की से मध्यम बारिश की फुहारों ने राहत दी, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र में तीखी धूप और 91 फीसदी की रिकॉर्ड उमस ने जनजीवन को पूरी तरह से बेहाल कर दिया है।
राज्य के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जारी झमाझम बारिश के थमते ही शुक्रवार को तेज धूप खिली, जिससे अधिकतम तापमान में सीधे 3.8 डिग्री सेल्सियस का जबर्दस्त उछाल दर्ज किया गया। चिपचिपी गर्मी और पसीने छुड़ाने वाली उमस के चलते घरों और दफ्तरों में बंद पड़े एयर कंडीशनर (AC) और कूलर एक बार फिर पूरी रफ्तार से चलने लगे हैं।
पारे में 3.8 डिग्री की छलांग और 91 फीसदी उमस का डबल अटैक
मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 20 अगस्त को अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो 21 अगस्त की दोपहर तक बढ़कर 35.2 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा। महज 24 घंटे के भीतर पारे में 3.8 डिग्री का यह उछाल सीधे तौर पर बादलों के छंटने और तीखी धूप निकलने की वजह से देखा गया। वहीं न्यूनतम तापमान भी 27.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
तापमान में वृद्धि से ज्यादा लोगों को उमस के स्तर ने परेशान किया। शुक्रवार की सुबह 8:30 बजे वातावरण में नमी (Humidity) का स्तर 91 फीसदी दर्ज किया गया। सुबह 7:30 बजे तक आसमान में बादलों का पहरा था, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, सूरज की तपिश तेज होती गई। हालांकि शाम 5:30 बजे तक उमस का स्तर घटकर 74 फीसदी पर आ गया, लेकिन हवा की रफ्तार सुस्त होने के कारण देर रात तक चिपचिपी गर्मी का असर बना रहा।
पश्चिमी यूपी में सुबह की फुहारें, मेरठ और एनसीआर का हाल
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपदों में मौसम का रुख थोड़ा अलग नजर आया। शनिवार की तड़के मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद-नोएडा के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे सुबह के समय लोगों को गर्मी से आंशिक राहत मिली।
मेरठ में अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि यहां का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 114 के मध्यम स्तर पर रहा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसूनी ट्रफ के असर से पश्चिम के जिलों में स्थानीय स्तर पर घने बादल बन रहे हैं, जिससे रुक-रुक कर बौछारें पड़ने का सिलसिला जारी रहेगा।
मौसम विभाग का 27 अगस्त तक अलर्ट: इन 48 जिलों में चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंचलिक मौसम केंद्र, लखनऊ ने 27 अगस्त तक पूरे प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने का पूर्वानुमान जारी किया है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम पुरवाई हवाओं और दक्षिण-पूर्वी यूपी पर बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) के प्रभाव से मानसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ सकता है।
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भारी बारिश का येलो अलर्ट: प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, चित्रकूट, संत रविदास नगर (भदोही), मीरजापुर और सोनभद्र जिलों में अनेक स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
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मध्यम और छिटपुट बारिश का दायरा: लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, आजमगढ़, गाजीपुर, जौनपुर और वाराणसी सहित करीब 48 जिलों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना है।
रिकॉर्ड बारिश के बाद मानसून की जल्दी विदाई के संकेत
इस मानसूनी सीजन में उत्तर प्रदेश में अब तक बादलों ने जमकर मेहरबानी दिखाई है। आमतौर पर 1 जून से 30 सितंबर तक चलने वाले चार महीनों के मानसूनी सीजन में पश्चिमी यूपी में औसत बारिश का कोटा 645.3 मिमी होता है, लेकिन इस साल 21 अगस्त तक ही 983.7 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यानी सामान्य से काफी अधिक बारिश महज तीन महीनों के भीतर पूरी हो चुकी है।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर और आईएमडी के प्राथमिक आकलनों के अनुसार, अत्यधिक बारिश के बाद इस साल मानसून समय से पहले विदा हो सकता है। अनुमान जताया गया है कि सितंबर के दूसरे सप्ताह तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू हो सकती है। इसके चलते अगस्त के अंतिम दिनों और सितंबर महीने में केवल छिटपुट बारिश का दौर ही देखने को मिलेगा और व्यापक पैमाने पर भारी बारिश की संभावनाएं कम रहेंगी।
13 जिलों में नदियों का बढ़ा जलस्तर और बाढ़ का खतरा
लगातार हुई भारी बारिश और पहाड़ों से छोड़े जा रहे पानी के कारण प्रदेश की प्रमुख नदियों—गंगा, यमुना, घाघरा, सरयू और बेतवा के जलस्तर में तेज इजाफा हुआ है। प्रयागराज, वाराणसी, बहराइच, गाजीपुर और बलिया समेत 13 जिलों के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है।
जिला प्रशासनों ने तटवर्ती गांवों और मजरों में राहत व बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में जलनिकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें ताकि धान और तिलहन की फसलों को जलभराव से नुकसान न पहुंचे।
बदलते मौसम में डॉक्टरों की सलाह: उमस भरी गर्मी से रहें सावधान
अचानक तापमान में 3.8 डिग्री के उछाल और उच्च आर्द्रता (Humidity) के चलते मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 90 फीसदी से ऊपर की उमस में शरीर से पसीना ठीक से वाष्पीकृत नहीं हो पाता, जिससे डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन, घमौरियां और फंगल इन्फेक्शन की शिकायतें बढ़ जाती हैं।
चिकित्सकों ने नागरिकों को सीधे धूप में निकलने से बचने, दिनभर में 3 से 4 लीटर पानी व तरल पदार्थों का सेवन करने और बासी या खुले खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी है।
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