
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में पिछले कई दिनों से जारी रुक-रुक कर बारिश और घने बादलों के डेरे के बाद अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने लगा है। राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, मेरठ, आगरा और बरेली समेत प्रदेश के तमाम जिलों में आसमान साफ होने लगा है और तेज धूप खिलने लगी है। बंगाल की खाड़ी से आ रहे कम दबाव के क्षेत्र और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण के कमजोर पड़ने के बाद अब मानसूनी हवाओं का जोर घट गया है। मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के अनुसार, प्रदेश में अब भारी या मध्यम दर्जे की बारिश की संभावना न के बराबर है। मौसम के शुष्क होते ही वातावरण में मौजूद नमी और तीखी धूप मिलकर उमस भरी गर्मी का अहसास कराने लगी हैं, जिससे पिछले दिनों ठंडक महसूस कर रहे लोगों को अब पंखे और एसी की जरूरत दोबारा महसूस होने लगी है।
मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दो से तीन दिनों में पूरे प्रदेश में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक का उछाल दर्ज किया जा सकता है। जहां बारिश के चलते दिन का पारा गिरकर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तक आ गया था, वहीं अब इसके बढ़कर 33 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंचने की पूरी संभावना है। रात के तापमान में भी हल्की गर्माहट देखने को मिलेगी और न्यूनतम पारा 24 से 26 डिग्री के आसपास बना रहेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश (नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़, मथुरा) और बुंदेलखंड के इलाकों (झांसी, बांदा, हमीरपुर) में तेज धूप का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा, जहां दोपहर के समय उमस और तपिश लोगों को काफी परेशान कर सकती है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों के मुताबिक, देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) की वापसी की रेखा तेजी से आगे बढ़ रही है। राजस्थान और पंजाब के अधिकांश भागों से मानसून पहले ही विदा हो चुका है और अब यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों को छोड़ते हुए धीरे-धीरे मध्य व पूर्वी यूपी की तरफ आगे बढ़ रहा है। हवाओं की दिशा अब बदलकर उत्तर-पश्चिमी (पछुआ) होने लगी है, जो अपने साथ शुष्क और कम नमी वाली हवाएं लेकर आ रही हैं। आमतौर पर सितंबर के आखिरी सप्ताह से अक्टूबर के पहले पखवाड़े के बीच उत्तर प्रदेश से मानसून की पूरी तरह विदाई हो जाती है। मौजूदा मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए अगले कुछ ही दिनों में राज्य के सभी 75 जिलों से मानसून के औपचारिक विदाई की घोषणा की जा सकती है।
बारिश का दौर थमना और मौसम का शुष्क होना राज्य के लाखों अन्नदाताओं के लिए बड़ी राहत की खबर लेकर आया है। पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश से खेतों में पककर तैयार खड़ी धान, तिल, बाजरा और मक्के की फसलों के गिरने और दाने खराब होने का खतरा पैदा हो गया था। अब तेज धूप निकलने से खेतों में जमा अतिरिक्त पानी तेजी से सूखेगा, जिससे किसान धान की कटाई और मड़ाई का काम बिना किसी रुकावट के शुरू कर सकेंगे। इसके साथ ही, सरसों, आलू, मटर और चने जैसी अगेती रबी फसलों की बुआई के लिए खेतों की जुताई और तैयारी करने में भी मौसम की यह शुष्कता बेहद मददगार साबित होगी। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित खलिहानों या गोदामों में रखें ताकि अचानक होने वाले किसी मौसमी बदलाव से नुकसान न हो।
मानसून की विदाई के ठीक बाद का दौर संक्रमण काल (Transition Phase) कहलाता है। इस दौरान दिन में अक्टूबर की तीखी धूप और रात में हल्की ठंडक का अहसास होना शुरू हो जाता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अक्टूबर के पहले हफ्ते तक दिन का मौसम शुष्क और गर्म बना रहेगा, लेकिन सुबह और देर रात के समय पछुआ हवाओं के असर से हल्की सिहरन या गुलाबी ठंड (Mild Winter) की दस्तक महसूस होने लगेगी। हवा में नमी का स्तर घटने से वातावरण में धुंध (Haze) की शुरुआत भी हो सकती है। आम नागरिकों को इस बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि दिन की गर्मी और रात की ठंडक के इस अंतर से वायरल फीवर, जुकाम और एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं।
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