
भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने देश के भीतर अपराध करके विदेशों में छिपने वाले अपराधियों और आतंकवादियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल कदम उठाते हुए देश का नया और अत्याधुनिक ‘प्रत्यर्पण पोर्टल’ (Extradition Portal) आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। इस उन्नत तकनीकी मंच के जरिए दुनिया भर के अलग-अलग 36 देशों से अब तक कुल 288 कुख्यात भगोड़ों को सफलतापूर्वक भारत वापस लाया जा चुका है। मोदी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत उठाए गए इस कदम से देश के उन भगोड़े आर्थिक अपराधियों, ड्रग्स तस्करों और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के बीच हड़कंप मच गया है जो कानून की पकड़ से बचने के लिए विदेशियों की धरती को अपनी शरणस्थली बनाए बैठे थे। इस नए पोर्टल और समन्वित अभियानों के जरिए अब भारत विरोधी ताकतों और देश के दुश्मनों के लिए दुनिया के किसी भी कोने में छिपना नामुमकिन होने जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को एक अभेद्य कवच मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
नया प्रत्यर्पण पोर्टल और इसकी अत्याधुनिक तकनीकी विशेषताएं
भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया यह नया प्रत्यर्पण पोर्टल केवल एक साधारण डेटाबेस नहीं है, बल्कि यह देश की सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों, सीबीआई (CBI), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), विदेश मंत्रालय और इंटरपोल (Interpol) के बीच एक सहज डिजिटल ब्रिज का काम करेगा। इस पोर्टल के माध्यम से भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण (Extradition) अनुरोधों, रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice), कानूनी दस्तावेजों और प्रत्यर्पण संधियों (Extradition Treaties) की प्रगति पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। पहले जहां अलग-अलग विभागों के बीच कागजी कार्रवाई और समन्वय के अभाव में फाइलों का आदान-प्रदान होने में महीनों या साल लग जाते थे, वहीं अब इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के आ जाने से कागजी देरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी और अपराधियों को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया में तेजी आएगी। गृह मंत्रालय के इस कदम से यह सुनिश्चित हो गया है कि भारतीय कानून के चंगुल से बचकर दुनिया के किसी भी देश में भागने वाले अपराधी को अब न्याय के कटघरे में खड़ा होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
36 देशों से 288 भगोड़ों की वापसी: भारत की कूटनीतिक और जांच एजेंसियों की बड़ी जीत
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक मोर्चे पर यह अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है, जहां पिछले कुछ वर्षों के भीतर दुनिया के 36 अलग-अलग देशों से कुल 288 भगोड़ों को भारत की धरती पर वापस लाया गया है। इन अपराधियों में कई ऐसे हाई-प्रोफाइल लोग शामिल हैं जो करोड़ों रुपये के बैंक घोटालों, मनी लॉन्ड्रिंग, हवाला कारोबार और देश विरोधी आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने के बाद विदेशों में शरण लिए हुए थे। भारत सरकार ने मित्र देशों के साथ अपनी मजबूत कूटनीतिक संधियों, पारस्परिक कानूनी सहायता समझौतों (Mutual Legal Assistance Treaties) और खुफिया एजेंसियों के सटीक समन्वय के बल पर इन सभी को प्रत्यर्पित कराने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इनमें से कई आतंकवादी और गैंगस्टर्स ऐसे थे जो विदेशी जमीन से बैठकर भारत में टारगेट किलिंग, ड्रग्स सिंडिकेट और आपराधिक साजिशों को अंजाम दे रहे थे। इन तमाम भगोड़ों की स्वदेश वापसी से यह साफ हो गया है कि भारतीय न्याय प्रणाली और सुरक्षा तंत्र का हाथ अब बहुत लंबा हो चुका है।
आतंकवाद और संगठित अपराध पर होगा सीधा और करारा ‘प्रहार’
गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम का मुख्य उद्देश्य देश की आंतरिक सुरक्षा को पूरी तरह सुरक्षित करना और सीमा पार से फैलने वाले आतंकवाद तथा संगठित अपराधों के नेटवर्क को पूरी तरह नेस्तनाबूद करना है। आतंकवादियों के पास न केवल बंदूकें होती हैं, बल्कि उनके पास अवैध रूप से अर्जित धन और वैश्विक शरणस्थलियों का एक मजबूत नेटवर्क भी होता है। जब तक उनके वित्तीय स्रोतों और सुरक्षित ठिकानों को खत्म नहीं किया जाता, तब तक आतंकवाद का पूरी तरह सफाया करना मुमकिन नहीं होता। नए प्रत्यर्पण पोर्टल के शुरू होने से आतंकवाद से जुड़े मामलों में वांछित चल रहे भगोड़ों को दुनिया के किसी भी देश में कानूनी पनाह मिलना बंद हो जाएगा। सरकार का यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट है कि देश के नागरिकों की सुरक्षा और देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न छिपा बैठा हो।
वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत होती वैश्विक स्थिति
आज के समय में जब पूरी दुनिया आतंकवाद, साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय धोखाधड़ी जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, तब भारत का यह कदम वैश्विक समुदाय के सामने एक मजबूत मिसाल पेश कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार यह मांग करता रहा है कि आतंकवादियों और भगोड़ों को शरण देने वाले देशों के खिलाफ सख्त सामूहिक कार्रवाई की जानी चाहिए। नया प्रत्यर्पण पोर्टल इस दिशा में भारत की तकनीकी और प्रशासनिक प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करता है। दुनिया के विकसित और विकासशील देश अब भारत के इस प्रोफेशनल और तकनीकी रुख का समर्थन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पोर्टल के जरिए और भी कई बड़े और कुख्यात अपराधियों के भारत लाए जाने की पूरी संभावना है, जिससे देश के भीतर कानून का राज और अधिक मजबूत होगा तथा आम नागरिकों का सुरक्षा व्यवस्था पर विश्वास और ज्यादा गहरा होगा।
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