मुंबई: आधार कार्ड में बायोमेट्रिक अपडेट या तकनीकी गड़बड़ियों के कारण परेशान होने वाले करोड़ों नागरिकों के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट से एक राहत भरी खबर आई है। हाईकोर्ट ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए साफ कहा है कि सिस्टम की खामियों की सजा असली नागरिकों को नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट की दो टूक: नागरिकों को दर-दर भटकने के लिए नहीं छोड़ सकते
जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस हितेन एस. वेणेगांवकर की खंडपीठ ने 6 मई को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान UIDAI को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि आधार डेटाबेस की शुद्धता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसका तरीका ‘नागरिक-केंद्रित’ (Citizen-Centric) होना चाहिए। पीठ ने चिंता जताई कि छोटी-छोटी तकनीकी समस्याओं के लिए लोगों को हाईकोर्ट तक आना पड़ रहा है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
जुड़वां भाइयों के संघर्ष ने बदली आधार की व्यवस्था
यह पूरा मामला 19 वर्षीय जुड़वां भाइयों, रोहित और राहुल निकलजे से जुड़ा है। साल 2012 में जब वे नाबालिग थे, तब उनके आधार कार्ड बने थे। 2022 में जब उन्होंने बायोमेट्रिक्स अपडेट कराने की कोशिश की, तो विभाग ने उन्हें समाधान देने के बजाय भ्रम में डाल दिया:
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पहले अपडेट करने को कहा गया, फिर कार्ड रद्द करने का सुझाव मिला।
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बाद में उनके आधार नंबर ही सस्पेंड कर दिए गए।
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आधार की इस उलझन के कारण उन्हें कॉलेज एडमिशन और स्पोर्ट्स इंश्योरेंस लेने तक में भारी परेशानी हुई।
कोर्ट ने कहा कि अगर बचपन में बायोमेट्रिक्स लेने में कोई गलती हुई थी, तो उसका दोष इन युवाओं पर नहीं डाला जा सकता।
UIDAI को हाईकोर्ट के 4 बड़े निर्देश
भविष्य में आम नागरिकों को होने वाली परेशानी रोकने के लिए हाईकोर्ट ने UIDAI को निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए हैं:
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लिखित मार्गदर्शन अनिवार्य: नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर कटवाने के बजाय उनकी समस्या और समाधान की प्रक्रिया के बारे में लिखित रूप में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
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सुविधा केंद्रों का संचालन: सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में प्रभावी ‘हेल्प डेस्क’ या सुविधा केंद्र बनाए जाएं, जहां नागरिकों की समस्याओं का मौके पर समाधान हो सके।
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4 हफ्ते की समय सीमा: किसी भी आवेदन पर हर हाल में चार सप्ताह के भीतर फैसला लेना होगा। यदि दस्तावेज सही हैं, तो तुरंत नया आधार या अपडेटेड कार्ड जारी करना होगा।
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मानवीय दृष्टिकोण: असली आवेदकों के प्रति कठोर होने के बजाय मानवीय रवैया अपनाया जाए ताकि उन्हें अपने अधिकारों से वंचित न होना पड़े।
शुरुआत में लिए गए बायोमेट्रिक्स पर सवाल
अदालत ने स्पष्ट किया कि आधार प्रणाली को इस तरह से काम करना चाहिए कि वह नागरिकों की मदद करे, न कि उनके लिए बाधा बने। 15 दिन के भीतर इन भाइयों को नया एनरोलमेंट करने और विभाग को 4 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया गया है।
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