कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ‘दीदी’ के 15 साल पुराने अभेद्य किले को ध्वस्त कर भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में अधिकारी ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। कभी ममता बनर्जी के सबसे खास सिपहसालार रहे शुभेंदु ने इस बार भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी को हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
सादगी भरा जीवन: अविवाहित हैं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
57 वर्षीय शुभेंदु अधिकारी का जीवन पूरी तरह से जनसेवा और राजनीति के प्रति समर्पित रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ही तरह शुभेंदु अधिकारी भी अविवाहित हैं। उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा संगठन और राज्य के विकास में लगाई है। शिशिर कुमार अधिकारी के पुत्र शुभेंदु ने अपनी उच्च शिक्षा रबिंद्र भारती यूनिवर्सिटी से पूरी की, जहां से उन्होंने साल 2011 में एमए की डिग्री हासिल की थी। उनके निजी जीवन की सादगी अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है।
कितनी है संपत्ति? हलफनामे में हुआ खुलासा
राजनीति के इस मंझे हुए खिलाड़ी के पास संपत्ति के नाम पर बहुत कुछ नहीं है। चुनावी हलफनामे के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी ने अपनी कुल संपत्ति लगभग 85,87,600 रुपये घोषित की है। चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के इतने बड़े पद पर पहुंचने वाले इस नेता के पास अपनी कोई निजी गाड़ी तक नहीं है। हलफनामे के मुताबिक उन पर किसी भी बैंक या वित्तीय संस्थान का कोई कर्ज (Loan) नहीं है। वे पेशे से एक कारोबारी भी रहे हैं, लेकिन उनकी मुख्य पहचान एक जननेता के रूप में ही है।
पार्षद से मुख्यमंत्री तक का सफर: बेमिसाल राजनीतिक अनुभव
शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक ग्राफ बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने महज 31 साल की उम्र में कांग्रेस के पार्षद के रूप में अपना पहला चुनाव जीता था। इसके बाद वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हुए और 2006 में पहली बार विधायक बने। 2007 के चर्चित नंदीग्राम आंदोलन में शुभेंदु ही ममता बनर्जी के मुख्य रणनीतिकार थे, जिन्होंने वामपंथी शासन की चूलें हिला दी थीं। वे सांसद और ममता सरकार में कद्दावर मंत्री भी रह चुके हैं, जिससे उनके पास संगठन और सत्ता दोनों का लंबा अनुभव है।
नंदीग्राम से भवानीपुर तक: ‘जाइंट किलर’ की छवि
साल 2021 में भाजपा में शामिल होने के बाद शुभेंदु ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। उसी जीत ने उन्हें बंगाल में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा बना दिया। 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर जोखिम लिया और ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में उन्हें चुनौती दी। नतीजा एक बार फिर शुभेंदु के पक्ष में रहा और उन्होंने न केवल चुनाव जीता, बल्कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनाकर इतिहास रच दिया।
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