फरीदाबाद के निजी अस्पतालों में आज से आयुष्मान कार्ड पर इलाज पूरी तरह ठप: करोड़ों के बकाये को लेकर डॉक्टरों का बड़ा फैसला

हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद और पूरे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के गरीब व जरूरतमंद मरीजों के लिए आज का दिन भारी दिक्कतों और असमंजस से भरा साबित हो रहा है। शहर के सभी प्रमुख निजी और पैनलबद्ध (Empanelled) अस्पतालों ने ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ (AB-PMJAY) और हरियाणा सरकार की ‘चिरायु योजना’ के तहत आज से मरीजों का निशुल्क इलाज करने से साफ इनकार कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की फरीदाबाद इकाई और प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम एसोसिएशन के संयुक्त आह्वान पर लिए गए इस कड़े फैसले के बाद निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड धारकों की नई भर्ती, ओपीडी सेवाएं और पहले से तय सर्जरी पूरी तरह रोक दी गई हैं। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (SHA) के पास पिछले कई महीनों से निजी अस्पतालों के करोड़ों रुपये के क्लेम का भुगतान लटके होने के कारण यह नौबत आई है।

बकाये भुगतान को लेकर डॉक्टरों और प्राइवेट अस्पतालों का फूटा गुस्सा: करोड़ों का फंड अटका

फरीदाबाद के निजी अस्पताल संचालकों और डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से चलाने में वे हमेशा आगे रहे हैं, लेकिन पिछले एक साल से अधिक समय से सरकार की ओर से क्लेम पास होने के बावजूद अस्पतालों के खातों में पैसे ट्रांसफर नहीं किए जा रहे हैं। अकेले फरीदाबाद जिले के दर्जनों निजी अस्पतालों का करीब 50 से 70 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सरकार के पास अटका हुआ है, जबकि पूरे हरियाणा में यह आंकड़ा 300 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।

अस्पताल प्रबंधनों का कहना है कि अस्पताल चलाने के लिए दैनिक आधार पर भारी खर्च होता है, जिसमें डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का वेतन, महंगी दवाओं की खरीद, ऑक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और बिजली-पानी का बिल शामिल है। जब सरकार महीनों तक क्लेम का भुगतान नहीं करती, तो दवा कंपनियां अस्पतालों को क्रेडिट पर दवाएं देना बंद कर देती हैं और स्टाफ को वेतन देना मुश्किल हो जाता है। ऐसी विकट वित्तीय परिस्थिति में बिना फंड के अस्पतालों का संचालन करना और गुणवत्तापूर्ण इलाज देना पूरी तरह असंभव हो गया है।

फरीदाबाद और एनसीआर के मरीजों पर टूटा संकट: इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर

इस विरोध प्रदर्शन का सबसे सीधा और दर्दनाक असर उन गरीब परिवारों पर पड़ा है जो गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पूरी तरह आयुष्मान कार्ड पर निर्भर थे। फरीदाबाद के एनआईटी, बड़खल, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद, तिगांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों जैसे पलवल, नूंह और होडल से बड़ी संख्या में मरीज प्रतिदिन निजी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं। आज सुबह जब मरीज और उनके परिजन अपने आयुष्मान और चिरायु कार्ड लेकर शहर के नामी निजी अस्पतालों के रिसेप्शन पर पहुंचे, तो उन्हें साफ बता दिया गया कि आज कार्ड स्वीकार नहीं किए जाएंगे और इलाज के लिए नकद भुगतान करना होगा।

विशेष रूप से किडनी के मरीज जिन्हें हफ्ते में दो से तीन बार डायलिसिस की जरूरत होती है, कैंसर के मरीज जिनकी कीमोथेरेपी का शेड्यूल तय था, और हृदय रोग के गंभीर मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। अचानक लिए गए इस फैसले के कारण कई गरीब मरीजों के पास निजी अस्पतालों में नकद भुगतान करने के पैसे नहीं थे, जिसके चलते उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा या फिर सरकारी अस्पतालों की ओर दौड़ना पड़ा।

आईएमए (IMA) और हॉस्पिटल एसोसिएशन की दो टूक: ‘बिना पैसे के अस्पताल कैसे चलाएं?’

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) फरीदाबाद के वरिष्ठ पदाधिकारियों और डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने यह कड़ा कदम किसी शौक में नहीं, बल्कि अपनी मजबूरी के तहत उठाया है। डॉक्टरों का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण और बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाया गया है। बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के 30 से 40 प्रतिशत तक बिलों में मनमानी कटौती कर दी जाती है और कई क्लेम को महीनों तक अटकाए रखा जाता है।

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों, मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को कई बार लिखित ज्ञापन सौंपकर अपने बकाये के त्वरित निपटारे की गुहार लगाई थी। हर बार केवल मौखिक आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर फंड रिलीज नहीं किया गया। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन जब अस्पताल दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएं, तो उनके पास सेवाएं स्थगित करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।

बीके सिविल अस्पताल में उमड़ी मरीजों की भारी भीड़: सरकारी व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद होने का सीधा असर फरीदाबाद के बादशाह खान (BK) सिविल अस्पताल पर देखने को मिला है। सुबह से ही सरकारी अस्पताल के ओपीडी काउंटर, इमरजेंसी वार्ड और दवा वितरण केंद्र पर मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। सामान्य दिनों की तुलना में आज सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या दोगुनी से भी अधिक दर्ज की गई।

हालांकि, बीके अस्पताल का प्रशासन और डॉक्टर अतिरिक्त शिफ्ट में काम करके स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सीमित संसाधनों, सीमित वेंटिलेटर और सीमित बेड क्षमता के कारण सभी गंभीर मरीजों को एक साथ भर्ती करना सरकारी अस्पताल के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। बल्लभगढ़ के उपमंडल नागरिक अस्पताल में भी मरीजों की भारी भीड़ देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द करते हुए उन्हें अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की प्रतिक्रिया: क्या निकलेगा समाधान का रास्ता?

इस गंभीर स्थिति और मरीजों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए हरियाणा स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। फरीदाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और प्रशासनिक अधिकारियों ने निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। प्रशासन का कहना है कि सरकार आयुष्मान योजना के दावों के सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया को तेज कर रही है ताकि सभी वैध क्लेम का भुगतान चरणबद्ध तरीके से जल्द से जल्द किया जा सके।

प्रशासन ने निजी अस्पतालों से अपील की है कि वे मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इमरजेंसी, डायलिसिस, प्रसव (डिलीवरी) और आईसीयू में भर्ती मरीजों का इलाज न रोकें। स्वास्थ्य अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगले कुछ दिनों के भीतर एक विशेष फंड जारी कर अस्पतालों के बकाये का बड़ा हिस्सा क्लियर कर दिया जाएगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शाम तक प्रशासन और डॉक्टरों के बीच सहमति बन पाएगी ताकि कल से निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड पर सेवाएं दोबारा बहाल हो सकें।

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