
अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में जहां उत्तर भारत में धीरे-धीरे गुलाबी ठंड का आगाज हो रहा था, वहीं एक नए और तीव्र सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने मौसमी समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र पर सक्रिय इस सिस्टम और हरियाणा व सीमावर्ती पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के असर से 13 अक्टूबर को उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मौसम करवट लेगा। इसके चलते दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तरी राजस्थान के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ आंधी और रुक-रुक कर बारिश का येलो/ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी और दिन में भी हल्की ठंडक का अहसास होगा।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत पूरे एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में 13 अक्टूबर को आसमान में घने बादलों का डेरा रहेगा।
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हवा की गति और आंधी का खतरा: मौसम विभाग के अनुसार, दोपहर और शाम के समय 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी हवाएं चल सकती हैं, जो झोंकों में 60 किमी/घंटा तक पहुंच सकती हैं।
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बारिश और गरज-चमक: दिल्ली के मध्य, दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने की प्रबल संभावना है।
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तापमान और वायु गुणवत्ता: अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। बारिश और तेज हवाओं के चलते हवा में मौजूद धूलकण बह जाएंगे, जिससे वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में बना रहेगा।
पश्चिमी विक्षोभ का सीधा असर पंजाब और हरियाणा के सीमावर्ती जिलों पर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।
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पंजाब के संवेदनशील जिले: मौसम वैज्ञानिकों ने गुरदासपुर, पठानकोट, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, पटियाला और चंडीगढ़ में तेज गरज-चमक के साथ आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। खुले और ग्रामीण इलाकों में तेज आंधी के कारण बिजली के तारों और कच्चे ढांचों को नुकसान पहुंच सकता है।
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हरियाणा का हाल: अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र, रोहतक, हिसार और पानीपत समेत उत्तरी व मध्य हरियाणा में 13 अक्टूबर को छिटपुट से लेकर व्यापक बारिश और 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। मौसम में आए इस बदलाव से उमस से तो पूरी तरह निजात मिल जाएगी, लेकिन धान की कटाई कर रहे किसानों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
यह मौसमी हलचल केवल दो राज्यों तक सीमित नहीं रहने वाली है; आसपास के राज्यों में भी इसका मिला-जुला प्रभाव दिखाई देगा:
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश: सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, शामली, बागपत और बुलंदशहर में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और 40 से 50 किमी/घंटा की गति से आंधी चलने के आसार हैं। मध्य और पूर्वी यूपी (लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी) में आंशिक बादल छाए रहेंगे और मौसम मुख्य रूप से शुष्क व गर्म बना रहेगा।
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राजस्थान: उत्तरी और पश्चिमी राजस्थान (श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू) में 30 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी हो सकती है।
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पहाड़ी राज्य (हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर): जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाली चोटियों पर हल्की बर्फबारी की संभावना जताई गई है। पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को भूस्खलन और फिसलन को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम में अचानक आने वाले इस बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने आम जनता और किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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धान और खरीफ फसलों की सुरक्षा: जिन किसानों ने धान, बाजरा या कपास की फसल काटकर खेतों या खलिहानों में रखी है, वे उसे तुरंत सुरक्षित गोदामों में ले जाएं या तिरपाल से अच्छी तरह ढककर बांध दें ताकि तेज हवा और बारिश से दाने न भीगें।
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सिंचाई और कीटनाशक छिड़काव रोकें: आगामी 24 से 48 घंटों तक खड़ी फसलों में नई सिंचाई करने या किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करने से बचें।
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आकाशीय बिजली से बचाव: बारिश और तेज गरज-चमक के दौरान खेतों, खुले मैदानों, बड़े पेड़ों या लोहे के बिजली के खंभों के नीचे बिल्कुल खड़े न हों।
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सड़क सुरक्षा: आंधी और अचानक दृश्यता (Visibility) कम होने की स्थिति में दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक अपनी गति धीमी रखें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
मौसम विभाग का कहना है कि 13 अक्टूबर की शाम या देर रात तक पश्चिमी विक्षोभ का मुख्य प्रभाव मैदानी क्षेत्रों से आगे निकल जाएगा, जिसके बाद 14 अक्टूबर से आसमान साफ होने लगेगा और रात के तापमान में तेजी से गिरावट के साथ उत्तर भारत में ठंड की आहट और गहरी हो जाएगी।
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