
देश के अधिकांश हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून (Southwest Monsoon) की विदाई प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही मौसम का एक नया चक्र शुरू होने जा रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, प्रायद्वीपीय भारत (Southern Peninsula) पर अगले 2 से 3 दिनों के भीतर उत्तर-पूर्वी मानसून यानी ‘नॉर्थईस्ट मानसून’ के आगमन के लिए मौसमी परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन चुकी हैं। बंगाल की खाड़ी के ऊपर उत्तर-पूर्वी हवाओं का दबाव बनने और निचले क्षोभमंडल में पूर्वी हवाओं के मजबूत होने से दक्षिण भारत के तटीय और आंतरिक क्षेत्रों में बादलों का घना घेरा बनना शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानसून की इस औपचारिक दस्तक के साथ ही अगले 5 से 6 दिनों तक प्रायद्वीपीय भारत के कम से कम 6 प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मूसलाधार से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rain) का लंबा दौर चलने वाला है।
मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण भारत के जिन 6 राज्यों और क्षेत्रों में आगामी पांच दिनों के लिए यलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, उनका विवरण इस प्रकार है:
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तमिलनाडु (Tamil Nadu): उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु के लिए मुख्य जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि राज्य की वार्षिक वर्षा का 48% से अधिक हिस्सा इसी सीजन में प्राप्त होता है। चेन्नई, कांचीपुरम, चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर, तंजावुर, नागपट्टिनम और कुड्डालोर समेत तटीय और डेल्टा जिलों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
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केरल और माहे (Kerala & Mahe): पूरे राज्य में व्यापक बारिश और बिजली गिरने का अनुमान है। इडुक्की, वायनाड, कोट्टायम और पलक्कड़ के पहाड़ी इलाकों में तेज बारिश से भूस्खलन (Landslide) और जलभराव का खतरा जताया गया है।
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तटीय आंध्र प्रदेश और यानम (Coastal Andhra Pradesh & Yanam): बंगाल की खाड़ी से उठने वाले बादलों के चलते विशाखापट्टनम, काकीनाडा, मछलीपट्टनम और नेल्लोर में 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ भारी बारिश के आसार हैं।
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रायलसीमा (Rayalaseema): चित्तूर, तिरुपति, अनंतपुर और कडप्पा जिलों में 15 और 16 अक्टूबर के दौरान एकाध स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
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दक्षिण एवं उत्तर आंतरिक कर्नाटक (Karnataka): बेंगलुरु शहरी और ग्रामीण, मैसूर, मांड्या, हासन और चामराजनगर में व्यापक बारिश होगी, जबकि उत्तर आंतरिक कर्नाटक के जिलों में 17 और 18 अक्टूबर को भारी बारिश का पूर्वानुमान दर्ज किया गया है।
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पुडुचेरी और कराईकल (Puducherry & Karaikal): केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी और इसके तटीय इलाकों में समुद्र के किनारे तेज हवाओं और लगातार मध्यम से भारी बौछारों का दौर जारी रहेगा।
उत्तर-पूर्वी मानसून, जिसे आम बोलचाल में ‘लौटता हुआ मानसून’ या ‘विंटर मानसून’ भी कहा जाता है, आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के महीनों के दौरान सक्रिय रहता है।
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हवाओं का रुख: जब देश के उत्तरी और मध्य भागों में सर्दियां शुरू होती हैं और उच्च वायुदाब बनता है, तो हवाएं जमीन से समुद्र (उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा) की ओर बहने लगती हैं।
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नमी सोखने की प्रक्रिया: ये शुष्क हवाएं जब बंगाल की खाड़ी के ऊपर से गुजरती हैं, तो वहां से भारी मात्रा में नमी सोख लेती हैं। इसके बाद जब ये हवाएं तमिलनाडु, आंध्र तट और पश्चिमी घाट से टकराती हैं, तो जोरदार वर्षा करती हैं।
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कृषि और जलस्रोतों के लिए वरदान: तमिलनाडु, पुडुचेरी और रायलसीमा जैसे सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों में रबी फसलों की बुवाई, धान की खेती और बड़े जल जलाशयों (कावेरी, वैगई व पेरियार बेसिन) को भरने के लिए यह मानसून सबसे अहम भूमिका निभाता है।
आईएमडी और समुद्री मौसम विज्ञान केंद्र ने बंगाल की खाड़ी और दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के तटवर्ती इलाकों के लिए विशेष सुरक्षा बुलेटिन जारी किया है:
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मछुआरों के लिए रेड फ्लैग: मन्नार की खाड़ी, कोमोरिन क्षेत्र और तमिलनाडु-आंध्र तट के पास समुद्र में ऊंची लहरें उठने और 45 से 55 किमी/घंटा की गति से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है। इसके चलते मछुआरों को अगले 4 दिनों तक गहरे समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।
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शहरी क्षेत्रों में जलभराव की चेतावनी: चेन्नई, बेंगलुरु और तिरुवनंतपुरम जैसे बड़े शहरों के नगर निगमों को निचले इलाकों में पानी निकालने के लिए पंपिंग स्टेशन तैयार रखने और सीवर नालों की सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को अलर्ट: भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए तमिलनाडु और केरल के संवेदनशील जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा टीमों को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है।
एक तरफ जहां देश का दक्षिणी प्रायद्वीप अगले 5-6 दिनों तक उत्तर-पूर्वी मानसून की मूसलाधार बारिश से सराबोर रहेगा, वहीं दूसरी तरफ उत्तर और मध्य भारत (उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश) में पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म होते ही मौसम पूरी तरह शुष्क हो जाएगा। उत्तर भारत में शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने से दिन में धूप खिलेगी और रात के तापमान में क्रमिक गिरावट के साथ ठंड का दायरा मजबूत होगा। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल वैश्विक स्तर पर बन रही मौसमी परिस्थितियों के चलते उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान दक्षिणी राज्यों में सामान्य से अच्छी बारिश दर्ज होने की पूरी संभावना है।
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