सोशल मीडिया पर छाया ‘Proteinmaxxing’ का नया खुमार, क्या आप भी खा रहे हैं जरूरत से ज्यादा प्रोटीन? जानें इस ट्रेंड का सच

आज के डिजिटल दौर में फिटनेस और हेल्थ को लेकर सोशल मीडिया पर नए-नए ट्रेंड्स आते रहते हैं। इन्हीं में से एक नया और बेहद लोकप्रिय ट्रेंड इन दिनों इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे ‘प्रोटीनमैक्सिंग’ (Proteinmaxxing) कहा जा रहा है। जिम जाने वाले युवाओं से लेकर सामान्य लोग तक हर कोई अपनी दैनिक डाइट में प्रोटीन की मात्रा को जरूरत से ज्यादा बढ़ाने की होड़ में लगा हुआ है। सुबह की कॉफी में प्रोटीन पाउडर मिलाने से लेकर हाई-प्रोटीन आइसक्रीम, प्रोटीन वाटर्स, प्रोटीन बार्स और हर भोजन में वे प्रोटीन शेक्स ठूंसने तक, लोग किसी भी तरह अपनी रोजाना की प्रोटीन खपत को 150 से 200 ग्राम या उससे भी ज्यादा पहुंचाने में जुटे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वाकई शरीर को इतने अत्यधिक प्रोटीन की जरूरत होती है? या फिर ‘प्रोटीनमैक्सिंग’ का यह अंधाधुंध ट्रेंड आपकी किडनी, लिवर और पाचन तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है?

आखिर क्या है ‘प्रोटीनमैक्सिंग’ का ट्रेंड और क्यों हो रहा है यह इतना लोकप्रिय?

‘प्रोटीनमैक्सिंग’ शब्द असल में ‘प्रोटीन’ और ‘मैक्सिमाइजिंग’ (अधिकतम करना) से मिलकर बना है। इसका सीधा सा मतलब है कि आप दिनभर में जो कुछ भी खाते या पीते हैं, उसमें किसी भी तरह से प्रोटीन की मात्रा को अधिकतम कर देना। फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और रील्स बनाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स यह दावा करते हैं कि ज्यादा से ज्यादा प्रोटीन खाने से मसल मास तेजी से बढ़ता है, फैट बर्न होता है, पेट लंबे समय तक भरा रहता है और वजन तेजी से घटता है। इसी दावे के चक्कर में लोग बिना अपनी शारीरिक गतिविधि या जरूरत को समझे, सामान्य से तीन से चार गुना ज्यादा प्रोटीन लेने लगे हैं। बाज़ार में भी आज हर खाद्य पदार्थ के पैकेट पर ‘High Protein’ या ‘Protein Enriched’ का टैग लगाकर बेचा जा रहा है, जिससे लोग इस मानसिक भ्रम का शिकार हो रहे हैं कि वे जितना ज्यादा प्रोटीन खाएंगे, उतने ही ज्यादा फिट और लीन रहेंगे।

शरीर के लिए वास्तव में कितना प्रोटीन है जरूरी? जानें आईसीएमआर और विशेषज्ञों की राय

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार, एक सामान्य वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन उसके शरीर के वजन के हिसाब से प्रति किलोग्राम लगभग 0.8 से 1.0 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि आपका वजन 60 किलोग्राम है और आप सामान्य दिनचर्या जीते हैं, तो आपके शरीर के लिए प्रतिदिन 48 से 60 ग्राम प्रोटीन पूरी तरह से पर्याप्त है।

हालांकि, जो लोग भारी वजन उठाते हैं, एथलीट हैं, या कठिन शारीरिक वर्कआउट करते हैं, उनके लिए प्रोटीन की यह जरूरत बढ़कर 1.2 से 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन तक हो सकती है। लेकिन ‘प्रोटीनमैक्सिंग’ करने वाले लोग बिना किसी भारी वर्कआउट के भी रोजाना 150 से 250 ग्राम तक प्रोटीन डकार रहे हैं। पोषण विशेषज्ञों (Dietitians) का स्पष्ट कहना है कि हमारा शरीर एक बार में केवल 25 से 35 ग्राम प्रोटीन ही सही तरीके से अवशोषित (Absorb) और इस्तेमाल कर पाता है। इससे अतिरिक्त लिया गया प्रोटीन शरीर के लिए किसी काम का नहीं रहता और वह शरीर से बाहर निकलने या वसा (Fat) के रूप में जमा होने लगता है।

ज्यादा प्रोटीन लेने के क्या हैं गंभीर नुकसान? सेहत पर पड़ सकता है भारी

किसी भी पोषक तत्व की अति शरीर के लिए नुकसानदेह होती है, और यही नियम प्रोटीन पर भी लागू होता है। जरूरत से ज्यादा प्रोटीन का सेवन करने से शरीर में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं:

1. किडनी पर अत्यधिक दबाव (Kidney Strain): जब शरीर प्रोटीन को पचाता है, तो उप-उत्पाद के रूप में नाइट्रोजन और यूरिया बनता है। इस नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट को शरीर से बाहर निकालने का काम किडनियों का होता है। अत्यधिक प्रोटीन लेने से किडनियों को दोगुनी गति से काम करना पड़ता है, जिससे उन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। जिन लोगों को पहले से किडनी संबंधी कोई समस्या है, उनके लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।

2. पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज (Digestive Issues): ‘प्रोटीनमैक्सिंग’ के चक्कर में लोग अक्सर अपने भोजन में कार्बोहाइड्रेट्स, ताजे फल, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त चीजों की कटौती कर देते हैं। केवल प्रोटीन पाउडर, अंडे और मांस पर निर्भर रहने से पेट में भारीपन, भयंकर कब्ज, गैस, ब्लोटिंग और पेट दर्द की शिकायत होने लगती है।

3. डिहाइड्रेशन या शरीर में पानी की कमी: प्रोटीन के चयापचय (Metabolism) के दौरान बनने वाले यूरिया को बाहर निकालने के लिए शरीर को ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। यदि कोई व्यक्ति हाई-प्रोटीन डाइट ले रहा है और पर्याप्त पानी नहीं पी रहा है, तो वह बहुत जल्द डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकता है।

4. अनचाहा वजन बढ़ना (Weight Gain): कई लोगों को लगता है कि प्रोटीन खाने से वजन नहीं बढ़ता, जो कि एक बहुत बड़ा भ्रम है। प्रोटीन में भी कैलोरीज़ होती हैं (1 ग्राम प्रोटीन = 4 कैलोरी)। यदि आप अपनी दैनिक जरूरत से ज्यादा प्रोटीन ले रहे हैं और उतनी कैलोरी बर्न नहीं कर रहे हैं, तो अतिरिक्त प्रोटीन अंततः शरीर में फैट के रूप में स्टोर होगा और आपका वजन घटने के बजाय बढ़ने लगेगा।

5. पोषक तत्वों का असंतुलन और दिल के रोग: बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड प्रोटीन प्रोडक्ट्स या अत्यधिक रेड मीट खाने से शरीर में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, केवल प्रोटीन पर ध्यान केंद्रित करने से शरीर में आवश्यक विटामिन्स, मिनरल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स की कमी हो जाती है।

प्रोटीनमैक्सिंग से बचें: कैसे लें सही, प्राकृतिक और संतुलित प्रोटीन आहार?

हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह है कि सोशल मीडिया के अवास्तविक ट्रेंड्स के बहकावे में आकर अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ न करें। कृत्रिम सपलीमेंट्स, सप्लीमेंट ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड प्रोटीन बार्स के बजाय प्राकृतिक और संतुलित भारतीय आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए:

  • प्राकृतिक स्रोतों का चयन करें: अपनी थाली में दालें, चना, राजमा, छोले, पनीर, टोफू, दही, अंडे, मुर्ग (चिकन), मछली, अंकुरित अनाज (Sprouts) और ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें। प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला प्रोटीन न केवल आसानी से पचता है, बल्कि इसके साथ शरीर को फाइबर और जरूरी विटामिन्स भी मिल जाते हैं।

  • प्रोटीन को पूरे दिन में विभाजित करें: एक ही बार में ढेर सारा प्रोटीन खाने के बजाय उसे अपने सुबह के नाश्ते, दोपहर के भोजन और रात के खाने में थोड़ा-थोड़ा करके बांट लें।

  • भरपूर पानी पिएं: यदि आप अपनी शारीरिक गतिविधि के हिसाब से प्रोटीन की मात्रा बढ़ा रहे हैं, तो दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी अवश्य पिएं ताकि किडनियों पर दबाव न पड़े।

  • विशेषज्ञ की सलाह लें: किसी भी हाई-प्रोटीन डाइट प्लान को शुरू करने से पहले अपनी उम्र, वजन, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री के हिसाब से किसी योग्य न्यूट्रिशनिस्ट या डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

Check Also

क्या बढ़ता हुआ मोटापा सचमुच छीन रहा है आपकी जिंदगी के 10 साल? नई मेडिकल रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

आज की तेज रफ्तार और भागदौड़ भरी जिंदगी में मोटापा (Obesity) केवल शारीरिक सुंदरता या …