Vastu Alert: आज की आधुनिक और भागदौड़ भरी जीवनशैली में अक्सर लोग घर लौटते ही आलस्य या अनजाने में अपने जूते-चप्पल सीधे बेडरूम (शयनकक्ष) तक ले जाते हैं और वहीं बेड के पास या नीचे उतार देते हैं। देखने में यह एक बहुत ही सामान्य सी आदत लग सकती है, लेकिन वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार यह आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है।
बेडरूम हमारे आराम करने, सोने और मानसिक शांति प्राप्त करने की सबसे निजी जगह होती है। यहाँ बाहर की गंदगी और नकारात्मक ऊर्जा से सने जूते-चप्पल रखना पूरे घर के वास्तु चक्र को बिगाड़ देता है। आइए जानते हैं कि बेडरूम में जूते रखने से आपको क्या-क्या बड़े नुकसान उठाने पड़ सकते हैं और इन्हें रखने की सही दिशा क्या है।
दांपत्य जीवन पर वज्रपात: पति-पत्नी में बढ़ने लगता है कलह
वास्तु विज्ञान के मुताबिक, बेडरूम में जूते-चप्पल रखने का सबसे सीधा और घातक असर वैवाहिक जीवन पर पड़ता है। जूतों के साथ आने वाली राहु और केतु की नकारात्मक तरंगें पति-पत्नी के बीच अविश्वास और तनाव पैदा करती हैं। इसके कारण:
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बिना किसी ठोस वजह के छोटी-छोटी बातों पर गंभीर झगड़े होने लगते हैं।
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घर का सुख-चैन और आपसी तालमेल पूरी तरह छिन जाता है।
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यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो रिश्तों में अलगाव (Divorce) तक की नौबत आ सकती है।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है बेहद बुरा असर
जूतों से आने वाली धूल, गंदगी और सूक्ष्म गंदी महक बेडरूम के वातावरण को दूषित कर देती है। वास्तु के अनुसार, बिस्तर के नीचे या आस-पास जूते होने से जातक की नींद में लगातार बाधा आती है। इससे अनिद्रा (Insomnia), डरावने सपने, मानसिक तनाव और सुबह उठने के बाद भारी थकान महसूस होती है। समय रहते यदि इस आदत को न बदला जाए, तो यह व्यक्ति को डिप्रेशन या अन्य गंभीर मानसिक बीमारियों का शिकार बना सकती है।
अनजाने में बढ़ता है ‘शनि दोष’, हर काम में आती है रुकावट
ज्योतिष शास्त्र में पैरों और जूते-चप्पलों का संबंध शनि देव से माना गया है। जब आप घर में जूते-चप्पलों को बेतरतीब ढंग से फैलाकर रखते हैं या उन्हें बेडरूम जैसी पवित्र जगह पर स्थान देते हैं, तो इससे कुंडली का शनि दोष एक्टिव हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप:
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आपके बनते हुए काम ऐन वक्त पर बिगड़ने लगते हैं।
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करियर और बिजनेस में लगातार रुकावटें और अनचाही देरी (Delays) होने लगती है।
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जातक को भारी आर्थिक तंगी और कर्ज के जाल का सामना करना पड़ता है।
विशेष नोट: वास्तु के अनुसार, जूतों को हमेशा साफ और एक निश्चित शू-रैक में व्यवस्थित रखने से शनि देव का अशुभ प्रभाव स्वतः ही कम होने लगता है।
इन 3 जगहों पर भी जूते-चप्पल ले जाना है पूरी तरह वर्जित
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रसोई घर (Kitchen): रसोई को मां अन्नपूर्णा का साक्षात स्थान माना जाता है। यहाँ जूते पहनकर जाने से घर की बरकत खत्म होती है, बीमारियां पैर पसारती हैं और धन की भारी कमी होने लगती है।
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पूजा कक्ष (Mandir): मंदिर देवताओं का निवास स्थान है। यहाँ भूलकर भी जूते-चप्पल लेकर न जाएं, अन्यथा पूजा का कोई फल नहीं मिलता और पितृ दोष लग सकता है।
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मुख्य द्वार (Main Gate): घर का मुख्य द्वार वह मार्ग है जहाँ से मां लक्ष्मी और सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती हैं। मुख्य द्वार के ठीक सामने जूते बिखेर कर रखने से देवी लक्ष्मी रुष्ट होकर वापस लौट जाती हैं।
जानिए जूते-चप्पल रखने का सही वास्तु उपाय और दिशा
अगर आप अपने घर में सुख-समृद्धि, शांति और धन का प्रवाह बनाए रखना चाहते हैं, तो आज ही अपनी इस आदत को बदलें और इन नियमों का पालन करें:
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शू रैक की सही दिशा: जूतों की अलमारी या शू रैक को हमेशा घर के दक्षिण या पश्चिम दिशा के कोने में रखें। उत्तर या पूर्व दिशा में शू रैक रखना पूरी तरह वर्जित है।
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नियमित सफाई: अपने जूतों को कभी भी गंदा न छोड़ें। घर के बाहर ही उन्हें साफ करें और शू रैक के अंदर बंद करके व्यवस्थित तरीके से रखें ताकि उनकी नेगेटिव एनर्जी बाहर न फैले।
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