वैदिक ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनि देव का राशि परिवर्तन सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में से एक माना जाता है। शनि देव जब भी अपनी राशि बदलते हैं, तो सभी 12 राशियों के जीवन में बड़े उथल-पुथल की स्थिति पैदा होती है। ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के समय को केवल कष्टकारी ही नहीं, बल्कि जीवन को सुधारने और सही राह पर लाने वाला समय माना गया है। इस समय (साल 2026 में) शनि देव गुरु बृहस्पति की मीन राशि में गोचर कर रहे हैं, लेकिन अगले साल यानी 2027 में शनि का बड़ा गोचर होने जा रहा है। विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, साल 2027 में होने वाले इस राशि परिवर्तन से सीधे तौर पर 5 राशियां प्रभावित होंगी, जिनमें से कुछ को राहत मिलेगी तो कुछ पर संकट के बादल मंडराएंगे।
साल 2027 में कब होगा शनि का महागोचर? जानिए तारीखें
पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि देव 03 जून 2027 को मीन राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। हालांकि, शनि की अतिचारी (वक्री व मार्गी की विशेष स्थिति) चाल के कारण वह 20 अक्टूबर 2027 को पुनः कुछ समय के लिए मीन राशि में लौट आएंगे। इसके बाद, अगले वर्ष 23 फरवरी 2028 को शनि पूर्ण रूप से मेष राशि में गोचर कर जाएंगे। शनि की इस लुका-छिपी वाली चाल के कारण साल 2027 में कई राशियों के समीकरण तेजी से बदलेंगे।
क्या होती है शनि की साढ़ेसाती?
ज्योतिष शास्त्र के नियम के अनुसार, जब गोचर करते हुए शनि देव किसी जातक की जन्म राशि (चंद्र राशि) से 12वें, पहले (लग्न) और दूसरे भाव से गुजरते हैं, तो उस साढ़े सात साल की अवधि को शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। इसके तीन चरण होते हैं—प्रथम, मध्य और अंतिम। प्रत्येक चरण की अवधि ढाई-ढाई वर्ष की होती है, जिसमें जातक को मानसिक, शारीरिक और व्यावहारिक तौर पर कड़े अनुभवों से गुजरना पड़ता है।
साल 2027 में इन राशियों पर मंडराएगा साढ़ेसाती का साया
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, साल 2027 की शुरुआत में 2 जून तक मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव बना रहेगा। इस समय मेष राशि पर पहला चरण, मीन राशि पर दूसरा (मध्य चरण) और कुंभ राशि पर अंतिम व तीसरा चरण चल रहा है।
बड़ा बदलाव (03 जून 2027 से): जैसे ही 3 जून को शनि मेष राशि में कदम रखेंगे, वैसे ही कुंभ राशि के जातकों को साढ़ेसाती के भारी बंधन से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी। वहीं दूसरी ओर, वृषभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रथम चरण शुरू हो जाएगा। इस प्रकार, जून 2027 से मुख्य रूप से मेष, वृषभ और मीन राशि के जातक साढ़ेसाती के प्रभाव में रहेंगे।
इन राशियों पर शुरू होगी शनि की ढैय्या: जानिए क्या है यह नियम
जिस तरह साढ़ेसाती का असर होता है, ठीक उसी तरह जब शनि देव जातक की चंद्र राशि से चौथे (चतुर्थ) या आठवें (अष्टम) भाव में गोचर करते हैं, तो उसे शनि की ढैय्या कहा जाता है। इसे ‘छोटी साढ़ेसाती’ भी कहते हैं और इसकी अवधि ढाई वर्ष की होती है।
वर्तमान समय में सिंह और धनु राशि के लोग शनि की ढैय्या का सामना कर रहे हैं। लेकिन 03 जून 2027 को जैसे ही शनि मेष राशि में प्रवेश करेंगे, सिंह और धनु राशि को ढैय्या के कष्टों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। वहीं, शनि के इस गोचर के कारण कन्या और मकर राशि के जातकों पर शनि की नई ढैय्या का प्रकोप शुरू हो जाएगा।
साढ़ेसाती और ढैय्या का जातक पर कैसा रहेगा प्रभाव?
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, साल 2027 में जो राशियां शनि के इस चक्र (साढ़ेसाती और ढैय्या) के प्रभाव में आएंगी, उन्हें जीवन के विभिन्न मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है:
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स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव: शारीरिक थकान, कमजोरी और पुरानी बीमारियों के उभरने की आशंका रहेगी।
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मानसिक तनाव व अज्ञात भय: अज्ञात चिंताओं के कारण मन विचलित रहेगा और काम में एकाग्रता की कमी होगी।
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आर्थिक तंगी व कर्ज: आय के स्रोतों में रुकावट आ सकती है और अचानक बड़े खर्च सामने आने से बजट बिगड़ सकता है, जिससे कर्ज की स्थिति बन सकती है।
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कार्यक्षेत्र में बाधाएं: नौकरी और व्यापार में अधिकारियों या पार्टनर से अनबन हो सकती है, जिससे आपकी तरक्की की रफ्तार धीमी हो सकती है।
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वाहन दुर्घटना का योग: वाहन चलाते समय अत्यंत सावधानी बरतने की जरूरत होगी, चोट-चपेट लगने की प्रबल संभावना रहेगी।
शनि के अशुभ प्रभाव को कम करने के अचूक महाउपाय
यदि आपकी राशि पर भी साल 2027 में शनि का प्रभाव रहने वाला है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। नीचे दिए गए इन धार्मिक और ज्योतिषीय उपायों को श्रद्धापूर्वक करने से शनि देव शांत होते हैं और शुभ फल प्रदान करते हैं:
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शनि मंदिर में दर्शन: प्रत्येक शनिवार को नियमपूर्वक शनि मंदिर जाएं और शांत मन से शनि देव के दर्शन करें।
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पीपल वृक्ष की पूजा: शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ की जड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं और वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करें।
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शनिवार का विशेष दान: शनिवार के दिन जरूरतमंदों या कुष्ठ रोगियों को काले वस्त्र, काले तिल, साबुत उड़द की दाल, लोहे के बर्तन और चमड़े के जूते-चप्पल दान करें।
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बजरंग बली की शरण: शनि देव हनुमान जी के भक्तों को कभी प्रताड़ित नहीं करते। इसलिए रोजाना नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।
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शिवलिंग का जलाभिषेक: भगवान शिव शनि देव के गुरु हैं। प्रत्येक सोमवार और शनिवार को शिवलिंग पर जल में काले तिल मिलाकर अभिषेक करने से शनि जनित दोषों का नाश होता है।
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