
इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और आधुनिक युग के महानतम टेस्ट बल्लेबाजों में शुमार जो रूट ने अपनी हालिया फॉर्म और बल्लेबाजी शैली को लेकर उठ रहे सवालों पर चुप्पी तोड़ी है। खेल के सबसे लंबे प्रारूप में रनों का अंबार लगाने वाले रूट ने अपने आलोचकों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 14,000 से अधिक टेस्ट रन महज संयोग या किस्मत के दम पर नहीं बनते, बल्कि इसके पीछे सालों का कड़ा अनुशासन, तकनीक और मानसिक मजबूती होती है। पिछले कुछ मुकाबलों में उम्मीद के मुताबिक बड़ी पारियां न खेल पाने के कारण क्रिकेट गलियारों में उनकी तकनीक और इंग्लैंड के आक्रामक ‘बैजबॉल’ अंदाज के साथ उनके तालमेल पर सवाल खड़े किए जा रहे थे, जिसका अब इस स्टार बल्लेबाज ने सीधे शब्दों में जवाब दिया है।
आलोचकों को जो रूट का कड़ा संदेश: फॉर्म अस्थायी है और क्लास हमेशा स्थायी
जो रूट ने एक मीडिया बातचीत के दौरान अपनी फॉर्म को लेकर चल रही चर्चाओं को पूरी तरह खारिज किया। रूट ने साफ किया कि जब कोई खिलाड़ी एक दशक से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सर्वोच्च स्तर पर खेलता है, तो उतार-चढ़ाव उसके करियर का स्वाभाविक हिस्सा होते हैं। उन्होंने कहा कि बाहर बैठकर समीक्षा करना और राय बनाना बेहद आसान है, लेकिन 22 गज की पिच पर दुनिया के सबसे तेज और सटीक गेंदबाजों का सामना करते हुए लगातार रन बनाना बिल्कुल अलग चुनौती होती है।
रूट ने जोर देकर कहा कि वे बाहर के शोर या सोशल मीडिया पर चलने वाली बहसों पर ध्यान देने के बजाय अपनी बुनियादी तकनीक, नेट प्रैक्टिस और रूटीन पर भरोसा करते हैं। टेस्ट क्रिकेट में निरंतरता ही एक महान खिलाड़ी की पहचान होती है और उन्होंने यह लगातार साबित किया है। जब कोई बल्लेबाज 14 हजार टेस्ट रनों के पहाड़ जैसे आंकड़े तक पहुंचता है, तो उसे अपनी क्षमताओं पर संदेह करने की आवश्यकता नहीं होती।
बैजबॉल और पारंपरिक तकनीक का संतुलन: रूट की अनोखी बल्लेबाजी शैली
इंग्लैंड की टेस्ट टीम में जब से मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम और कप्तान बेन स्टोक्स की जोड़ी आई है, तब से टीम का खेलने का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। इस अति-आक्रामक ‘बैजबॉल’ रणनीति में कई बार जो रूट के स्वाभाविक खेल को लेकर सवाल उठे कि क्या उन्हें भी अंधाधुंध शॉट्स खेलने चाहिए या अपनी पारंपरिक शैली पर टिके रहना चाहिए।
रूट ने इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा टीम की जरूरत के अनुसार अपने खेल को ढाला है। चाहे रिवर्स स्कूप जैसे आधुनिक और जोखिम भरे शॉट्स खेलना हो या फिर कठिन परिस्थितियों में क्रीज पर खूंटा गाड़कर लंबी पारियां खेलना, वे दोनों ही शैलियों में सहज हैं। उनका मुख्य लक्ष्य हमेशा इंग्लैंड को मैच जिताना और विरोधी टीम पर दबाव बनाना रहा है। रूट का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट में प्रासंगिक बने रहने के लिए अपने शॉट्स के दायरे को बढ़ाना जरूरी है, लेकिन अपनी बुनियादी रक्षात्मक तकनीक को कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
सचिन तेंदुलकर के विश्व रिकॉर्ड के करीब: क्या इतिहास रचेंगे जो रूट?
टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (15,921 रन) के नाम दर्ज है। जो रूट वर्तमान में सक्रिय खिलाड़ियों में इस ऐतिहासिक मुकाम के सबसे करीब हैं। रूट जिस गति और निरंतरता से रन बना रहे हैं, उसे देखते हुए कई पूर्व दिग्गजों का मानना है कि वे सचिन के इस रिकॉर्ड को तोड़ने वाले पहले बल्लेबाज बन सकते हैं।
जब रूट से इस संभावित विश्व रिकॉर्ड और निजी उपलब्धियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही परिपक्वता से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे कभी भी व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स या आंकड़ों को ध्यान में रखकर मैदान पर नहीं उतरते। उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान इंग्लैंड के लिए खेलना और टीम को जीत दिलाना है। अगर इस प्रक्रिया में कोई रिकॉर्ड बनता है या टूटता है, तो वह एक सुखद अनुभव है, लेकिन उनका ध्यान सिर्फ अगली गेंद और अगले मैच पर केंद्रित रहता है।
इंग्लैंड की बल्लेबाजी की रीढ़: सिर्फ रन मशीन नहीं, बल्कि युवाओं के मेंटॉर
जो रूट का महत्व सिर्फ उनके बनाए गए रनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में अनुभव के सबसे बड़े स्तंभ हैं। युवा बल्लेबाज जैसे हैरी ब्रूक, जैक क्रॉली और ओली पोप लगातार रूट के मार्गदर्शन में निखर रहे हैं। दबाव भरे क्षणों में मैदान पर शांत रहकर पारी को संभालने की रूट की कला युवा खिलाड़ियों के लिए एक खुली किताब की तरह है।
इसके अलावा स्लिप कॉर्डन में उनकी फील्डिंग और जरूरत पड़ने पर अपनी ऑफ-स्पिन गेंदबाजी से महत्वपूर्ण साझेदारियां तोड़ना उन्हें एक संपूर्ण टेस्ट क्रिकेटर बनाता है। कई बार जब इंग्लैंड के मुख्य स्पिनर नाकाम रहे हैं, तब रूट ने अपनी चतुराई भरी गेंदबाजी से मैच का रुख पलटा है।
आगामी टेस्ट सीरीज और एशेज पर जो रूट की पैनी नजर
आगामी टेस्ट सीजन इंग्लैंड के लिए बेहद व्यस्त और चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसी शीर्ष टीमों के खिलाफ होने वाली आगामी सीरीज को लेकर जो रूट पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलियाई धरती पर होने वाली एशेज सीरीज हमेशा से रूट के लिए एक बड़ी चुनौती रही है, जहां वे बल्ले से अपनी सर्वश्रेष्ठ छाप छोड़ने के लिए बेताब हैं।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ पारियों की नाकामी किसी भी खिलाड़ी के कद को कम नहीं कर सकती, खासकर तब जब वह खिलाड़ी जो रूट जैसा आधुनिक लीजेंड हो। रूट का यह बेबाक बयान यह साबित करता है कि उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है और वे आने वाले मैचों में एक बार फिर अपने बल्ले से आलोचकों को चुप कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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