
सनातन धर्म में श्रावण मास के सोमवार व्रत का महात्म्य अवर्णनीय माना गया है। भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना सभी महीनों में सर्वाधिक पावन और कल्याणकारी होता है। सावन के पूरे महीने में की गई शिव साधना, जलाभिषेक और उपवास का समापन सावन के अंतिम सोमवार पर होता है, जिसे ‘सावन सोमवार की पूर्णाहुति’ भी कहा जाता है। साल 2026 में सावन का आखिरी सोमवार 24 अगस्त को पड़ रहा है।
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सावन का यह अंतिम सोमवार अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जा रहा है। पंचांगीय गणना के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग और चंद्रमा की शुभ स्थिति का ऐसा त्रिवेणी संयोग बन रहा है, जो कई दशकों में एक बार देखने को मिलता है। इस दिन सच्चे मन से महादेव और माता पार्वती की आराधना करने से न केवल संपूर्ण सावन मास के व्रतों का फल प्राप्त होता है, बल्कि कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष, शनि की साढ़ेसाती और चंद्र दोष से भी मुक्ति मिलती है। यह पावन संयोग विशेष रूप से 4 राशि के जातकों के लिए भाग्योदय और अपार आर्थिक उन्नति लेकर आ रहा है।
सावन के अंतिम सोमवार पर शुभ मुहूर्त और दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
वैदिक पंचांग के अनुसार 24 अगस्त को सावन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि और श्रवण नक्षत्र का शुभ प्रभाव रहेगा। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ भगवान विष्णु की कृपा का भी अद्भुत संगम देखने को मिलेगा क्योंकि यह पुत्रदा एकादशी के पारण का भी समय रहेगा।
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ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:26 AM से 05:10 AM तक (शिव ध्यान और संकल्प के लिए सर्वोत्तम)
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अमृत काल मुहूर्त: प्रातः 06:15 AM से 08:00 AM तक
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 AM से 12:49 PM तक (सर्वश्रेष्ठ कार्य सिद्धि मुहूर्त)
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गोधूलि व प्रदोष काल मुहूर्त: सायं 06:45 PM से रात्रि 08:55 PM तक (शिवलिंग रुद्राभिषेक और महाआरती का समय)
इस दिन प्रदोष काल में किए गए रुद्राभिषेक और मंत्र जप से साधक को अमोघ फल की प्राप्ति होती है और जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है।
इन 4 भाग्यशाली राशियों पर बरसेगी महादेव की विशेष कृपा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 24 अगस्त को ग्रहों की स्थिति और शिव योग के प्रभाव से निम्नलिखित 4 राशियों के जातकों को करियर, व्यापार, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में चमत्कारी लाभ मिलने के प्रबल संकेत हैं:
1. मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए सावन का आखिरी सोमवार वरदान साबित होने वाला है। आपकी कुंडली में कर्म भाव और धन भाव सक्रिय होने से कार्यक्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही रुकावटें दूर होंगी। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति और वेतन वृद्धि के शुभ समाचार मिल सकते हैं। यदि आपका कोई बड़ा प्रोजेक्ट या सरकारी काम अटका हुआ था, तो वह इस दिन के बाद गति पकड़ेगा। व्यापार में नए निवेश से भारी मुनाफा होने की संभावना है। पारिवारिक जीवन में शांति रहेगी और जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर बनेंगे।
2. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के स्वामी स्वयं चंद्रदेव हैं, जिन्हें भगवान शिव ने अपने मस्तक पर धारण किया हुआ है। इसलिए सावन के अंतिम सोमवार का सबसे अधिक भावनात्मक और आर्थिक लाभ कर्क राशि वालों को मिलेगा। मानसिक तनाव, अनिद्रा और बेचैनी से मुक्ति मिलेगी। आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद सुलझेंगे और रुका हुआ धन वापस मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए यह समय एकाग्रता और प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने वाला रहेगा।
3. तुला राशि (Libra) तुला राशि के जातकों के लिए यह दिन ऐश्वर्य, भौतिक सुख-सुविधाओं और नए अवसरों के द्वार खोलेगा। व्यापार में नई साझेदारी से बड़ा लाभ मिलने के योग हैं। जो जातक नई नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें प्रतिष्ठित संस्थानों से आकर्षक प्रस्ताव मिल सकते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। यदि आप नया वाहन, भूमि या मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके प्रयास सफल होंगे। दांपत्य जीवन में चल रही गलतफहमियां दूर होंगी और प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
4. मकर राशि (Capricorn) मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं, जो भगवान शिव को अपना परम गुरु और आराध्य मानते हैं। सावन के अंतिम सोमवार पर मकर राशि के जातकों पर शनिदेव और महादेव दोनों की संयुक्त कृपा बरसेगी। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के नकारात्मक प्रभावों में भारी कमी आएगी। स्वास्थ्य से जुड़ी पुरानी समस्याओं में सुधार होगा। व्यवसाय में नए ग्राहकों का आगमन होगा और आय के नए स्रोत बनेंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।
सावन के आखिरी सोमवार पर ऐसे करें महादेव का संपूर्ण रुद्राभिषेक
सावन के अंतिम दिन भगवान शिव की विधिवत पूजा और अभिषेक करने से जीवन भर के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें और गंगाजल युक्त जल से स्नान कर श्वेत अथवा हल्के पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा की शुरुआत घर के मंदिर या शिवालय में शिवलिंग की स्थापना के साथ करें। सबसे पहले तांबे के लोटे से शुद्ध जल और गंगाजल की पतली धार अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत (गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और शक्कर) से शिवलिंग का रुद्राभिषेक करें। पंचामृत के बाद पुनः शुद्ध जल और इत्र से अभिषेक करें।
भगवान शिव को सफेद चंदन का त्रिपुंड लगाएं, अक्षत (अखंडित चावल), भस्म, जनेऊ, 108 बेलपत्र (जिस पर चंदन से ‘ॐ’ या ‘राम’ लिखा हो), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल और मौसमी फल अर्पित करें। माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर और सुहाग सामग्री भेंट करें। भोग के रूप में मावे की मिठाई, पंचमेवा और मखाने की खीर अर्पित करें।
पूजा के दौरान निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा महामृत्युंजय मंत्र ‘ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्’ का कम से कम 108 बार स्पष्ट उच्चारण करते हुए जप करें। अंत में कर्पूर और घी के दीप से शिव चालीसा व शिव आरती का गायन करें।
मनोकामना पूर्ति और धन लाभ के लिए अचूक शिव उपाय
सावन के अंतिम सोमवार को अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन चमत्कारी उपायों को अवश्य अपनाएं:
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आर्थिक तंगी दूर करने के लिए: शिवलिंग पर गन्ने का रस अथवा शहद से अभिषेक करें और ‘ॐ ऋणमुक्तेश्वराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है और व्यापार में बरकत होती है।
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संतान और पारिवारिक सुख के लिए: गाय के कच्चे दूध में थोड़ा केसर और मिश्री मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। साथ ही माता पार्वती को 16 श्रृंगार की सामग्री दान करें।
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शनि दोष और रोग शांति के लिए: तांबे या कांसे के पात्र में जल लेकर उसमें काले तिल और शमी के 21 पत्ते डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे गंभीर रोगों से राहत मिलती है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
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मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए: 21 साबुत बेलपत्रों पर पीले चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर एक-एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें और अपनी मनोकामना मन में दोहराएं।
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गौ सेवा और दान का महत्व: पूजा संपन्न होने के बाद किसी भूखी गाय को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाएं। किसी जरूरतमंद या वेदपाठी ब्राह्मण को सवा किलो अन्न, वस्त्र और यथाशक्ति दक्षिणा अवश्य दें।
प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और तीर्थ क्षेत्रों में अंतिम सोमवार का भव्य उल्लास
सावन के अंतिम सोमवार पर देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों और प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ता है। काशी विश्वनाथ (वाराणसी) में इस दिन बाबा विश्वनाथ का विशेष राजराजेश्वर श्रृंगार किया जाता है और मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक अखंड हर-हर महादेव का उद्घोष गूंजता है।
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल की भव्य सवारी नगर भ्रमण पर निकलती है, जहां लाखों भक्त बाबा के दर्शन कर निहाल होते हैं। वहीं झारखंड के बैद्यनाथ धाम (देवघर), उत्तराखंड के हरिद्वार व ऋषिकेश, गुजरात के सोमनाथ और मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में कांवड़िए पवित्र गंगाजल व नर्मदा जल से महादेव का अंतिम जलाभिषेक कर अपनी कांवड़ यात्रा की पूर्णाहुति करते हैं।
सावन का यह अंतिम सोमवार आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उत्थान और समस्त भौतिक सुखों की प्राप्ति का सर्वोत्तम अवसर है। पूर्ण निष्ठा, सात्विक आचरण और अटूट विश्वास के साथ महादेव की शरण में जाने से भक्तों की हर अधूरी मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होती है।
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