तेहरान/वाशिंगटन/अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में शांति स्थापित करने की तमाम वैश्विक कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में पिछले हफ्ते हुए ऐतिहासिक ‘इस्लामाबाद समझौते’ और 18 जून के सीजफायर (युद्धविराम) के महज कुछ दिनों बाद ही अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सीधी सैन्य जंग छिड़ गई है.
शुक्रवार रात और शनिवार, 27 जून 2026 की सुबह दोनों महाशक्तियों ने एक-दूसरे के रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और हवाई हमले किए. इन ताजा हमलों ने न सिर्फ शांति समझौते के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र को दोबारा भीषण युद्ध की कगार पर ला खड़ा किया है.
कार्गो शिप पर ड्रोन हमले से भड़के डोनाल्ड ट्रंप, US ने की एयरस्ट्राइक
इस पूरे विवाद की दोबारा शुरुआत गुरुवार को दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) में हुई:
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ड्रोन से हमला: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल कार्गो जहाज पर अचानक ड्रोन से हमला किया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे सीजफायर का सीधा और खुला उल्लंघन करार दिया. ट्रंप ने संवाददाताओं से दो-टूक कहा, “मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि उन्होंने कल हमला किया. असल में उन्होंने एक नहीं, चार हमले किए हैं. इसका नतीजा आपको जल्द पता चल जाएगा.”
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अमेरिकी एयरस्ट्राइक: इस कड़े बयान के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान की सीमा के भीतर घुसकर उसकी मिसाइल साइट्स, ड्रोन अड्डों और तटीय रडार केंद्रों पर भीषण एयरस्ट्राइक (हवाई हमले) कर दी.
ईरान का पलटवार और सीजफायर मैनेजमेंट का अनोखा तर्क
अमेरिकी बमबारी के जवाब में ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की नेवी ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागने का दावा किया है. हालांकि, ईरान ने अमेरिका के सीजफायर तोड़ने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.
‘यह उल्लंघन नहीं, सीजफायर मैनेजमेंट है’: ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरी तरह ईरान का संप्रभु नियंत्रण है, इसलिए अमेरिकी सेना नियमों का सम्मान करे. हमारे नियंत्रण और चेकिंग को तनाव बढ़ाना न समझें, यह सीजफायर का उल्लंघन नहीं बल्कि ‘सीजफायर मैनेजमेंट’ (युद्धविराम प्रबंधन) है.”
जेडी वेंस की चेतावनी: ‘विवाद है तो फोन उठाइए…’
ईरान के इस तर्क पर भड़के अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने तेहरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि “हिंसा का जवाब सिर्फ और सिर्फ हिंसा से दिया जाएगा.” वेंस ने ईरान को नसीहत दी कि अगर सीजफायर की शर्तों या नेविगेशन को लेकर कोई भी विवाद या गलतफहमी है, तो उसे कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए, न कि जहाजों पर हमले करने चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि— “कोई समस्या है तो फोन उठाइए और बात कीजिए.”
तनाव रोकने के लिए बनी थी ‘डायरेक्ट हॉटलाइन’
ईरान की सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और मिसकम्युनिकेशन को रोकने के लिए पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में हुई बातचीत के बाद एक ‘डायरेक्ट कम्युनिकेशन चैनल’ (हॉटनलाइन) स्थापित किया गया था. इसका मकसद इस्लामाबाद समझौते को सही तरीके से जमीन पर लागू करना था, लेकिन दोनों देशों के जमीनी कमांडर इस हॉटलाइन के एक्टिव होने से पहले ही आपस में भिड़ गए.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फिर थमे जहाजों के पहिये, तेल संकट का डर
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए 14-सूत्रीय अंतरिम समझौते के बाद इस समुद्री रास्ते से ग्लोबल ट्रेड (वैश्विक व्यापार) पटरी पर लौट रहा था. बुधवार को ही यहां से रिकॉर्ड 78 व्यापारिक जहाज गुजरे थे, जो सामान्य दिनों के 130 जहाजों के औसत के करीब पहुंच रहा था.
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ईरान की जिद: ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरिबाबादी ने साफ कर दिया है कि सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों को तेहरान द्वारा तय किए गए कॉरिडोर (रास्ते) से ही गुजरना होगा, अन्यथा उनके रूट सस्पेंड कर दिए जाएंगे.
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वापस लौटे तेल टैंकर: ईरान की इसी कड़ाई और अनिश्चितता के कारण ओमान के पास संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करने वाले कम से कम दो बड़े तेल टैंकरों (Oil Tankers) को वापस लौटना पड़ा है. इस गतिरोध से आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है.
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