
पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिलने लगे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के संसद भवन में शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है। इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या एनडीए (NDA) में किसी पुराने साथी की घर वापसी होने वाली है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दोनों दल फिर से हाथ मिला सकते हैं।
संसद भवन में मुलाकात और उठाए गए मुद्दे
सूत्रों के अनुसार, सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई इस बैठक का मुख्य केंद्र पंजाब के वर्तमान राजनीतिक और प्रशासनिक हालात रहे। मुलाकात के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, अकाली दल प्रमुख ने राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि दोनों दलों की ओर से आधिकारिक तौर पर गठबंधन को लेकर कोई सीधी घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस मुलाकात को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है।
25 साल पुराना रिश्ता और किसानों के मुद्दे पर अलगाव
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी और अकाली दल का गठबंधन पंजाब में करीब ढाई दशक तक बेहद मजबूत रहा था। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने 2022 का विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा, जिसका खमियाजा दोनों ही दलों को चुनावी नतीजों में उठाना पड़ा था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपने खिसके हुए जनाधार को वापस पाने के लिए दोनों दलों को राज्य में एक-दूसरे के पूरक की जरूरत महसूस हो सकती है।
सियासी प्रतिक्रियाएं और आप का तंज
इस मुलाकात के तुरंत बाद राज्य की सत्ताधारी पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए दोनों दलों की नजदीकियों पर सवाल उठाए हैं। बहरहाल, औपचारिक बشتई और बयानों से इतर इस मुलाकात ने यह साबित कर दिया है कि राजनीति में संभावनाओं के द्वार हमेशा खुले रहते हैं और आने वाले दिनों में पंजाब की सियासत में और भी कई बड़े उलटफेर देखने को मिल सकते हैं।
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