परिसीमन बिल पर मोदी सरकार का साथ देगी DMK? उदयनिधि स्टालिन ने किया साफ; राहुल गांधी की चेतावनी के बीच पार्टी के रुख से साफ हुई तस्वीर

देश की राजनीति में लोकसभा परिसीमन (Delimitation) को लेकर मचे घमासान के बीच द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) ने अपने रुख पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि राजनीतिक समीकरणों और कुछ खास शर्तों के आधार पर डीएमके केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के इस महत्वाकांक्षी विधेयक पर नरम रुख अपना सकती है और इसका समर्थन कर सकती है। हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ नेता उदयनिधि स्टालिन ने इन सभी अटकलों और कयासों पर विराम लगाते हुए दोटूक शब्दों में कह दिया है कि डीएमके ने कभी भी परिसीमन का समर्थन नहीं किया है और पार्टी भविष्य में भी इसका कड़ा विरोध जारी रखेगी।

अटकलों पर विराम और उदयनिधि का दोटूक बयान

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि कुछ राजनीतिक शर्तों और सीटों में बढ़ोतरी के आश्वासन के बाद डीएमके परिसीमन बिल के पक्ष में जा सकती है। इन चर्चाओं के बीच उदयनिधि स्टालिन ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया विषय नहीं है और केंद्र सरकार इसे जिस तरह पेश कर रही है, उससे पार्टी के मूल स्टैंड पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने साफ किया कि दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक वजूद और अधिकारों को प्रभावित करने वाले इस परिसीमन विधेयक का विरोध डीएमके पहले भी करती रही है और आगे भी पूरी मजबूती के साथ इसका विरोध करती रहेगी।

राहुल गांधी की चेतावनी और ‘एट्टप्पन’ वाला बयान

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया चेतावनी भी काफी चर्चाओं में रही है। राहुल गांधी ने अपने बयानों में यह साफ कर दिया था कि यदि कोई भी राजनीतिक दल या नेता इस परिसीमन विधेयक का समर्थन करता है, तो इसे तमिलनाडु की जनता के साथ बड़ा धोखा माना जाएगा। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए परिसीमन के समर्थकों को ’21वीं सदी का एट्टप्पन’ (विश्वासघाती) करार दिया था, जिससे विपक्षी दलों के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर सख्त संदेश गया था।

दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताएं और भविष्य की सियासत

दक्षिणी राज्यों का मुख्य तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करने के बाद यदि 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया जाता है, तो उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में दक्षिण की राजनीतिक ताकत और संसद में उनकी आवाज कमजोर हो जाएगी। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा भी इस मुद्दे पर राज्य के सभी सांसदों की बैठक बुलाई गई है। बहरहाल, उदयनिधि स्टालिन के इस ताजा ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि संसद के आगामी सत्रों में परिसीमन के मुद्दे पर सियासी टकराव और अधिक तीखा होने वाला है।

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