
आधुनिक तकनीक और सटीक बिलिंग के नाम पर लगाए जा रहे बिजली के स्मार्ट मीटर एक बार फिर आम उपभोक्ताओं के लिए भारी सिरदर्द साबित हो रहे हैं। अचानक आए एक बड़े तकनीकी और सॉफ्टवेयर फॉल्ट के कारण एक ही झटके में हजारों उपभोक्ताओं के घरों की बिजली गुल हो गई, जबकि उनके स्मार्ट मीटर ऐप में पर्याप्त रिचार्ज बैलेंस मौजूद था। कई जगहों पर उपभोक्ताओं के मोबाइल पर अचानक संदेश आने लगे कि उनका बैलेंस माइनस में चला गया है और अगले ही पल बिजली आपूर्ति स्वतः बाधित हो गई। इस अप्रत्याशित समस्या ने शहर से लेकर कस्बाई इलाकों तक हाहाकार मचा दिया। भीषण गर्मी और रोजमर्रा के कामकाज के बीच लोग अंधेरे में बैठने को मजबूर हो गए। देखते ही देखते बिजली विभाग के सब-स्टेशनों और हेल्पलाइन नंबरों पर शिकायतों की बाढ़ आ गई, जिससे पावर डिस्कॉम (बिजली वितरण निगम) के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए।
जेब पर भारी पड़ रही तेज रफ्तार रीडिंग और अचानक बैलेंस कटने की मार
उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि स्मार्ट मीटर में बिलिंग और बैलेंस कटने की प्रक्रिया पूरी तरह रहस्यमयी बन चुकी है। कई उपभोक्ताओं ने साक्ष्य दिखाते हुए शिकायत की कि रात के समय जब घर के अधिकांश भारी उपकरण जैसे एसी, फ्रिज और गीजर बंद थे, तब भी उनका बैलेंस दोगुनी गति से कट गया। कुछ मामलों में तो चंद घंटों के भीतर सैकड़ों रुपये का बैलेंस गायब हो गया और खाता नकारात्मक शेष (माइनस बैलेंस) में चला गया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की तुलना में स्मार्ट प्रीपेड मीटर अप्रत्याशित रूप से तेज भाग रहे हैं। आम नागरिकों का कहना है कि न तो उन्हें दैनिक खपत का सही ब्योरा समय पर ऐप में दिखाई देता है और न ही रिचार्ज करने के बाद मीटर तुरंत अपडेट होता है। इस असमंजस ने मध्यमवर्गीय परिवारों के मासिक बिजली बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है।
सर्वर क्रैश और डेटा सिंक में गड़बड़ी: आखिर क्यों बार-बार फेल हो रही है स्मार्ट प्रणाली
ऊर्जा विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों के अनुसार इस पूरे संकट की जड़ में बिजली निगमों का कमजोर और ओवरलोड सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर है। स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम पूरी तरह ‘मीटर डेटा मैनेजमेंट’ (एमडीएम) और ऑटोमेटेड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) पर काम करता है। जब हजारों मीटरों का डेटा एक साथ केंद्रीय सर्वर पर सिंक होता है, तो सर्वर पर लोड बढ़ने से सॉफ्टवेयर में ग्लिच आ जाता है। सर्वर और मीटर के बीच रियल-टाइम कम्युनिकेशन टूटने के कारण सिस्टम उपभोक्ताओं के सही बैलेंस को पहचान नहीं पाता और ऑटोमेटेड कमांड भेजकर बिजली कनेक्शन काट देता है। तकनीकी खामी के कारण कई बार रिचार्ज का पैसा बैंक से कट जाने के 24 से 48 घंटे बाद भी मीटर में क्रेडिट नहीं होता। इसी डिजिटल विसंगति के कारण निर्दोष उपभोक्ताओं को अंधेरे की सजा भुगतनी पड़ रही है।
सब-स्टेशनों पर उमड़ी उपभोक्ताओं की भारी भीड़ और विभागीय लाचारी
बिजली कटने और मीटर में गड़बड़ी की समस्या से आक्रोशित हजारों लोग अपने नजदीकी बिजली उपकेंद्रों और अधिशासी अभियंता कार्यालयों पर पहुंच गए। कई जगह उपभोक्ताओं और विभागीय कर्मचारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। स्थिति तब और बिगड़ गई जब स्थानीय लाइनमैनों और सब-स्टेशन ऑपरेटरों ने यह कहकर अपने हाथ खड़े कर दिए कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह रिमोट और सर्वर से संचालित होते हैं, इसलिए वे स्थानीय स्तर पर सीधे मीटर को चालू या बंद नहीं कर सकते। उपभोक्ताओं को ऑनलाइन कस्टमर केयर नंबरों पर संपर्क करने को कहा गया, जो सर्वर डाउन होने के कारण लगातार व्यस्त या अनुत्तरित आ रहे थे। इस प्रशासनिक और तकनीकी लाचारी ने डिजिटल इंडिया और स्मार्ट गवर्नेंस के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आपके स्मार्ट मीटर में भी तो नहीं हुई यह गड़बड़ी? ऐसे करें तुरंत पहचान और जांच
यदि आपके घर में भी स्मार्ट बिजली मीटर लगा हुआ है, तो आपको सतर्क रहने और नियमित रूप से कुछ जरूरी जांच करने की सख्त आवश्यकता है। सबसे पहले अपने डिस्कॉम के आधिकारिक उपभोक्ता ऐप (जैसे यूपीपीसीएल, टाटा पावर, अडाणी इलेक्ट्रिसिटी या संबंधित राज्य का पावर ऐप) में जाकर अपने दैनिक लोड और यूनिट खपत का नियमित मिलान करें। यदि आपके घर में सामान्य दिनों की तुलना में लोड या यूनिट में अप्रत्याशित उछाल दिखता है, तो तुरंत इसका स्क्रीनशॉट लें। मीटर की डिस्प्ले स्क्रीन पर दिख रही रीडिंग और ऐप में अपडेटेड रीडिंग का अंतर जांचें। इसके अलावा अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले डिडक्शन मैसेज पर नजर रखें। यदि आपका बैलेंस अचानक असामान्य रूप से कम होता दिखाई दे या मीटर पर लाल/पीली लाइट लगातार ब्लिंक कर रही हो, तो समझ जाएं कि मीटर सर्वर से ठीक से कम्युनिकेट नहीं कर पा रहा है।
आपात स्थिति में क्या करें उपभोक्ता: पावर कॉरपोरेशन के निर्देश और सुधार के कदम
बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने तकनीकी विंग को 24 घंटे के भीतर सर्वर को पूरी तरह रीस्टोर करने और फॉल्ट को ठीक करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन गलत सर्वर कमांड के कारण कट गए थे, उन्हें राहत देने के लिए अस्थायी रूप से ‘इमरजेंसी क्रेडिट’ और मैनुअल रीकनेक्शन की सुविधा शुरू की जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन उपभोक्ताओं का बैलेंस तकनीकी खामी की वजह से कटा है, उनके खातों में राशि को ऑडिट के बाद वापस क्रेडिट किया जाएगा। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि किसी भी प्रकार की विसंगति होने पर टोल-फ्री हेल्पलाइन 1912 पर कॉल करके अपनी कंप्लेंट टिकट दर्ज करवाएं और मीटर की रीयल-टाइम फोटो खींचकर स्थानीय विद्युत एक्सईएन कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराएं ताकि भविष्य में होने वाले वित्तीय नुकसान से बचा जा सके।
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