साल 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘400 पार’ के नारे के बावजूद 293 सीटों पर सिमटने वाले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए पिछले कुछ दिनों से संसद से लगातार बड़ी खुशखबरी आ रही है। विपक्षी खेमे में मची चौतरफा भगदड़ और क्षेत्रीय दलों में हुई ऐतिहासिक टूट के बाद अब एनडीए लोकसभा में पहली बार ‘दो-तिहाई बहुमत’ के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंचता दिख रहा है। यदि सत्ता पक्ष इस आंकड़े को छू लेता है, तो यह देश के संसदीय इतिहास में एनडीए का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड होगा।
ममता की TMC में बगावत से शुरू हुआ सीटों का खेल
एनडीए के कुनबे में सीटों का इजाफा पिछले महीने तब शुरू हुआ, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 15 साल बाद करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। बंगाल की सत्ता हाथ से जाते ही ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी। पहले विधानसभा में 64 विधायकों ने बगावत की, और फिर इसकी आंच लोकसभा तक पहुंच गई। लोकसभा में टीएमसी के 20 सांसदों ने काकोली घोष के नेतृत्व में विद्रोह कर दिया और ‘नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में अपने गुट के विलय का एलान कर दिया। यह 20 सांसदों वाला नया गुट आगामी मानसून सत्र से संसद में अलग बैठेगा और एनडीए को सीधा कूटनीतिक समर्थन देगा।
उद्धव गुट के 6 सांसदों के आने से 319 पहुंचा आंकड़ा
टीएमसी के बाद महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को भी अब तक का सबसे तगड़ा झटका लगा है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने एक साथ बगावत का बिगुल फूंक दिया और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अलग बैठने के लिए पत्र सौंप दिया। ये 6 सांसद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना के जरिए एनडीए का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
| लोकसभा सीटों का नया समीकरण (2026) | सीटों की संख्या |
| मूल एनडीए सीटें (2024 चुनाव) | 293 |
| टीएमसी से अलग हुआ बागी गुट (NCPI) | + 20 |
| शिवसेना यूबीटी से अलग हुए बागी सांसद | + 06 |
| वर्तमान संभावित एनडीए आंकड़ा | 319 |
543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 सीटों की आवश्यकता होती है। बागियों के समर्थन के बाद एनडीए का आंकड़ा 293 से बढ़कर सीधे 319 पर पहुंच गया है, लेकिन आधिकारिक रूप से दो-तिहाई के आंकड़े से यह अभी भी 43 सीटें दूर है।
क्या अब अखिलेश यादव की सपा में होने जा रही है बड़ी टूट?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि एनडीए इस 43 सीटों की दूरी को कैसे पाटेगा? इस सस्पेंस को यूपी के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयानों ने और हवा दे दी है। दोनों नेताओं ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के करीब 25 से 26 सांसद पाला बदलने की तैयारी में हैं। हालांकि, सपा ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है। लेकिन अगर टीएमसी और शिवसेना (UBT) की तरह सपा में भी दो-तिहाई की टूट (25 सांसद) होती है, तो एनडीए का आंकड़ा 344 से 345 के आसपास पहुंच जाएगा, जिससे वह दो-तिहाई के बिल्कुल मुहाने पर खड़ा हो जाएगा।
परिसीमन संशोधन विधेयक को पास कराना है असली कूटनीतिक लक्ष्य
एनडीए के इतिहास में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन साल 2019 में रहा था जब उसने 353 सीटें जीती थीं, जो दो-तिहाई से महज 9 सीटें कम था। इस बार जोड़-तोड़ करके दो-तिहाई का आंकड़ा जुटाने के पीछे सरकार का एक बड़ा विधायी एजेंडा है। दरअसल, अप्रैल महीने में सरकार संसद में ‘परिसीमन संशोधन विधेयक’ (Delimitation Amendment Bill) लेकर आई थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण यह ऐतिहासिक बिल लटक गया था। इस कानून के पास होते ही देश में लोकसभा की सीटें बढ़कर सीधे 850 हो जाएंगी। यदि एनडीए विपक्षी दलों में सेंध लगाकर 362 का जादुई नंबर हासिल कर लेता है, तो आगामी सत्रों में इस बिल को दोबारा पेश कर पास कराया जा सकता है।
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