महाराष्ट्र में फिर महा-विस्फोट: उद्धव गुट के 6 सांसदों की बगावत; स्पीकर से बोले- ‘कांग्रेस में विलय की पक रही है खिचड़ी’

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठीक वैसा ही भूचाल आ गया है जैसा जून 2022 में देखने को मिला था। इस बार उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) को अब तक का सबसे करारा और घातक झटका लगा है। पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने एक साथ विद्रोह का बिगुल फूंकते हुए न केवल उद्धव का साथ छोड़ दिया है, बल्कि दिल्ली में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर एक सनसनीखेज दावा किया है। इन बागी सांसदों ने स्पीकर को बताया कि उद्धव ठाकरे गुट का जल्द ही कांग्रेस में विलय होने वाला है। इसी आधार पर बागियों ने मांग की है कि संसद में उनके समूह को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली ‘असली’ शिवसेना में विलय की मान्यता दी जाए।

शिवसेना (UBT) में बचे सिर्फ 3 वफादार; ये हैं बगावत करने वाले 6 चेहरे

इस ऐतिहासिक टूट के बाद उद्धव ठाकरे के कुनबे में अब केवल 3 सांसद ही बचे हैं। बगावत करने वाले 6 सांसदों में संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी) और ओमप्रकाश उर्फ ओम राजे निंबालकर (उस्मानाबाद) शामिल हैं। अब उद्धव के प्रति वफादार रहने वालों में केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बचे हैं। बागी सांसदों का आरोप है कि शिवसेना (UBT) बालासाहेब ठाकरे की मूल विचारधारा से पूरी तरह भटक चुकी है और पर्दे के पीछे कांग्रेस के साथ विलय का जो खेल चल रहा है, वे उसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।

प्राइवेट जेट से दिल्ली, नोएडा के होटल में घेराबंदी और फिर ‘तीर्थयात्रा’

इस पूरी बगावत की कूटनीति किसी सस्पेंस फिल्म की तरह बेहद गुप्त अंदाज में लिखी गई। इन सांसदों को अलग-अलग प्राइवेट जेट्स के जरिए दिल्ली लाया गया और यूपी के नोएडा स्थित एक आलीशान होटल में ठहराया गया। इस पूरे ‘ऑपरेशन’ की कमान खुद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे संभाले हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा स्पीकर को अपनी चिट्ठी सौंपने के तुरंत बाद ये सभी सांसद ‘धार्मिक यात्रा’ पर निकल गए हैं। नागेश आष्टीकर तिरुपति बालाजी गए हैं, भाऊसाहेब वाघचौरे बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी में हैं, जबकि संजय देशमुख और संजय जाधव अयोध्या में रामलला के दरबार में पहुंच चुके हैं।

उद्धव खेमे में मची खलबली, संजय राउत ने स्पीकर से लगाई गुहार

इस अप्रत्याशित झटके से मातोश्री पूरी तरह हिल गया है। उद्धव ठाकरे ने आनन-फानन में व्हिप जारी कर आपातकालीन बैठक बुलाई थी, लेकिन जब बैठक में सिर्फ 3 सांसद पहुंचे तो साफ हो गया कि जमीन खिसक चुकी है। शिवसेना (यूबीटी) ने इन 6 बागियों को 7 दिन का ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया है। वहीं, राज्यसभा सांसद संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर गुहार लगाई है कि वे पार्टी का आधिकारिक पक्ष सुने बिना इस अलग हुए गुट को कोई मान्यता न दें। इस सियासी ड्रामे का सीधा फायदा केंद्र की एनडीए (NDA) सरकार को मिलता दिख रहा है, जिसे अब महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे आगामी बड़े विधेयकों को संसद में पास कराने के लिए इन 6 सांसदों का मजबूत कूटनीतिक समर्थन मिल सकता है।

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