
टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय और प्रतिष्ठित ज्ञान आधारित रियलिटी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) के मंच पर यूं तो देश के कोने-कोने से हर रोज एक से बढ़कर एक प्रतिभागी अपनी किस्मत आजमाने आते हैं, लेकिन हाल ही में प्रसारित एपिसोड में एक ऐसा प्रतियोगी हॉटसीट पर पहुंचा जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया। फटे हुए जूतों और सादगी भरे लिबास में जब एक साधारण दिहाड़ी मजदूर ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के सामने हॉटसीट पर कदम रखा, तो किसी ने यह कल्पना नहीं की थी कि यह इंसान ज्ञान और धैर्य की एक जीती-जागती मिसाल बनकर उभरेगा। जीवन भर केवल अभावों, कर्जों और कड़े शारीरिक परिश्रम के बीच रहने वाले इस व्यक्ति ने यह साबित कर दिखाया कि यदि मन में कुछ सीखने की अटूट लगन हो, तो आर्थिक तंगी इंसान के सपनों की उड़ान को कभी रोक नहीं सकती।
दो वक्त की रोटी का संघर्ष: दिन में मजदूरी और रात में किताबों से यारी
हॉटसीट पर बैठकर जब प्रतियोगी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों की कहानी साझा की, तो स्टूडियो में मौजूद हर एक दर्शक की आंखें नम हो गईं। प्रतियोगी ने बताया कि उसका बचपन कभी स्कूल की सामान्य सुविधाओं को नहीं देख पाया। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी जर्जर थी कि 10-12 वर्ष की अल्पायु में ही उसे ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर बोझा ढोने और पत्थर तोड़ने के काम में लगना पड़ा। दिनभर चिलचिलाती धूप में पसीना बहाने के बाद शाम को जो 150 से 200 रुपये की दिहाड़ी मिलती थी, उससे केवल परिवार का पेट भर पाता था।
लेकिन इस भयानक गरीबी के बीच भी उसने अपने भीतर के विद्यार्थी को कभी मरने नहीं दिया। जहां दिन में उसके हाथ औजार और सीमेंट उठाते थे, वहीं रात को वह मोहल्ले के बच्चों की पुरानी, फटी हुई किताबों और रद्दी से जुटाए गए पुराने अखबारों को स्ट्रीट लाइट और दीये की रोशनी में घंटों पढ़ा करता था। प्रतियोगी ने बताया कि वह अक्सर काम के बीच मिलने वाले 15 मिनट के लंच ब्रेक में भी अखबार के टुकड़ों से सामान्य ज्ञान, इतिहास और भूगोल की जानकारियां याद किया करता था ताकि खुद को अंधेरे से बाहर निकाल सके।
अमिताभ बच्चन भी नहीं रोक पाए आंसू: जब बयां हुआ 100 रुपये की दवा का दर्द
प्रतियोगी की सबसे भावुक कर देने वाली दास्तान वह थी जब उसने अपनी मां की बीमारी और परिवार के संघर्ष का जिक्र किया। उसने रोते हुए बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब उसकी मां गंभीर रूप से बीमार थीं और डॉक्टर द्वारा लिखी गई महज 100 रुपये की दवा खरीदने के लिए भी उसकी जेब में पैसे नहीं थे। उस दिन उसने कई लोगों के आगे हाथ फैलाए, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। उसी दिन उसने यह संकल्प लिया था कि वह अपनी गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएगा और शिक्षा के दम पर अपने परिवार का सम्मान वापस लौटाएगा।
इस हृदयविदारक घटना को सुनकर शो के होस्ट अमिताभ बच्चन भी अपने जज्बात पर काबू नहीं रख पाए और उनकी आंखें छलक आईं। बिग बी अपनी कुर्सी से उठे और उन्होंने मंच पर आकर उस प्रतियोगी को गले से लगा लिया। अमिताभ बच्चन ने भारी आवाज में कहा कि यह मंच केवल पैसे जीतने की जगह नहीं है, बल्कि यह उन अनाम हीरों को दुनिया के सामने लाने का माध्यम है जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी अपने स्वाभिमान और ज्ञान के साथ लड़ना जानते हैं।
सटीक जवाबों से बांधा समां: एक-एक कर पार किए मुश्किल सवालों के पड़ाव
खेल की शुरुआत होते ही इस प्रतियोगी ने अपने ज्ञान के अद्भुत स्तर से सभी को हैरान कर दिया। खेल के शुरुआती आसान पड़ावों से लेकर कठिन से कठिन ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और भौगोलिक प्रश्नों का उसने जिस आत्मविश्वास, स्पष्टता और तार्किकता के साथ उत्तर दिया, उसने वहां बैठे विशेषज्ञों को भी चकित कर दिया।
बिना किसी औपचारिक कोचिंग या बड़े स्कूल की शिक्षा के, केवल स्वाध्याय और समाचार पत्रों के नियमित अध्ययन के दम पर उसने 10वीं और 11वीं स्तर के प्रश्नों को चुटकियों में हल कर लिया। उसकी सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उसने अपनी लाइफलाइन्स का उपयोग बेहद समझदारी और संयम के साथ किया। जहां सामान्य प्रतियोगी लाखों के पड़ाव पर आकर घबरा जाते हैं, वहीं इस दिहाड़ी मजदूर के चेहरे पर एक गजब का ठहराव और शांति थी। उसने 12.50 लाख, 25 लाख और 50 लाख रुपये के कठिन सवालों को पार करते हुए खुद को 1 करोड़ रुपये के सबसे बड़े प्रश्न के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया।
1 करोड़ रुपये के सवाल का महामुकाबला: क्या इतिहास रच पाएगा यह कर्मवीर?
जैसे ही बिग बी ने कंप्यूटर स्क्रीन पर 1 करोड़ रुपये का 15वां सवाल खोला, पूरा स्टूडियो सन्नाटे में डूब गया। यह सवाल एक अत्यंत दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज और प्राचीन भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ था। 1 करोड़ के इस सवाल के सामने खड़े प्रतियोगी के पास अब कोई लाइफलाइन शेष नहीं बची थी। नियम के अनुसार, यदि उत्तर गलत होता, तो वह सीधे 3 लाख 20 हजार रुपये के पड़ाव पर गिर सकता था।
प्रतियोगी ने सवाल को बहुत गहराई से समझा और अपने ज्ञान के आधार पर विकल्पों का विश्लेषण करना शुरू किया। उसने बिग बी को बताया कि उसने इस विषय के बारे में एक पुरानी पत्रिका में पढ़ा था, लेकिन चूंकि यह उसके पूरे परिवार के भविष्य का सवाल है और 50 लाख रुपये की सुरक्षित राशि भी उसके पूरे जीवन की मजदूरी से कई गुना अधिक है, इसलिए उसे बेहद सोच-समझकर कदम उठाना होगा। उसने अपने आत्मसम्मान और परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खेल में आगे बढ़ने या बुद्धिमानी से क्विट (छोड़ने) करने के विकल्प पर विचार किया। भले ही अंतिम निर्णय खेल के नियमों के अधीन रहा, लेकिन 1 करोड़ के सवाल तक पहुंचने की उसकी यात्रा अपने आप में किसी महाविजय से कम नहीं थी।
पैसों से पहले आत्मसम्मान की जीत: समाज के लिए प्रेरणा बनी यह दास्तान
इस एपिसोड ने समाज के उस वर्ग को एक बहुत बड़ा संदेश दिया है जो परिस्थितियों और संसाधनों की कमी का रोना रोकर अपनी किस्मत को कोसता रहता है। इस साधारण मजदूर ने दिखाया कि सफलता किसी बड़े शहर, महंगे स्कूल या अमीर परिवार की बपौती नहीं होती। ज्ञान किसी भी वर्गभेद या जातिगत सीमाओं को नहीं मानता; वह केवल उस व्यक्ति के पास आता है जो उसके लिए सच्ची साधना करता है।
प्रतियोगी ने बताया कि इस मंच से जो भी धनराशि वह जीतकर ले जाएगा, उसका पहला उपयोग अपने पुराने कर्जों को चुकाने, अपने कच्चे मकान की छत को पक्का करने और अपने छोटे भाई-बहनों को उच्च शिक्षा दिलाने में करेगा ताकि उनके परिवार की अगली पीढ़ी को कभी मजदूरी के लिए विवश न होना पड़े।
‘ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार’: केबीसी के मंच से देश को मिला मजबूत संदेश
सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने खेल के समापन पर प्रतियोगी की सराहना करते हुए कहा कि आज पूरे भारत को इस युवा पर गर्व है। यह कहानी हर उस युवा के लिए एक मशाल की तरह है जो अभावों के अंधेरे में जी रहा है। केबीसी के इस ऐतिहासिक मंच ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब तक इंसान के पास ज्ञान का हथियार और स्वाभिमान का संबल है, तब तक दुनिया की कोई भी गरीबी उसे पराजित नहीं कर सकती। यह एपिसोड केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह मानवीय संघर्ष, गरिमा और अदम्य इच्छाशक्ति का एक अमर दस्तावेज बन गया।
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