रक्षाबंधन पर भद्रा का संकट खत्म, लेकिन 1 घंटा 36 मिनट का राहुकाल बना बड़ा रोड़ा; जानें आज किस समय भूलकर भी न बांधें भाई को राखी और क्या हैं दिनभर के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का महापर्व रक्षाबंधन आज श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। रक्षाबंधन के पर्व पर सबसे बड़ा संशय भद्रा काल को लेकर रहता है, परंतु पंचांगीय गणना के अनुसार आज भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो चुकी है। ऐसे में पूरे दिन भद्रा का कोई व्यवधान नहीं रहेगा। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज के दिन करीब 1 घंटा 36 मिनट का राहुकाल रहेगा, जिसे मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत वर्जित और अशुभ माना गया है। विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों का स्पष्ट मत है कि राहुकाल की इस संवेदनशील समयावधि में बहनों को अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से पूरी तरह बचना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।

राहुकाल का 1 घंटा 36 मिनट: इस समयावधि में भूलकर भी न बांधें रक्षासूत्र

पंचांग गणना के अनुसार आज रक्षाबंधन के दिन राहुकाल प्रातः 10 बजकर 46 मिनट से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। यह कालखंड कुल 1 घंटा 36 मिनट की अवधि का है।

वैदिक ज्योतिष में राहु को एक मायावी और छाया ग्रह का दर्जा प्राप्त है। राहु काल प्रत्येक दिन लगभग 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे के लिए प्रभावी होता है और प्रत्येक वार को इसका समय भिन्न होता है। जब राहु का प्रभाव सक्रिय रहता है, उस समय वायुमंडल में नकारात्मक और भ्रम उत्पन्न करने वाली तरंगों की प्रधानता मानी जाती है। मान्यता है कि इस कालखंड में आरंभ किया गया कोई भी शुभ कार्य निष्फल हो जाता है अथवा उसके विपरीत और अनिष्टकारी परिणाम प्राप्त होते हैं। इसी कारण बहनों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह 10:46 से दोपहर 12:22 बजे के बीच राखी बांधने का कार्यक्रम स्थगित रखें और इसके बीत जाने के बाद ही रक्षासूत्र बांधें।

वैदिक ज्योतिष में राहुकाल का महत्व और वर्जित कार्य

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु भ्रम, असंतुलन, मानसिक तनाव और अप्रत्याशित आकस्मिक घटनाओं का कारक ग्रह है। राहुकाल में जातक द्वारा लिए गए निर्णय अक्सर भटकाव की ओर ले जाते हैं और कार्यों में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।

शास्त्रों में राहुकाल के दौरान निम्नलिखित कार्यों को पूर्णतः वर्जित बताया गया है:

  • विवाह, सगाई, उपनयन अथवा नामकरण जैसे कोई भी संस्कार आरंभ करना।

  • नए भवन का गृह प्रवेश, शिलान्यास अथवा भूमि पूजन करना।

  • किसी भी लंबी दूरी की नई यात्रा पर प्रस्थान करना।

  • भूमि, भवन, स्वर्ण आभूषण अथवा नए वाहन की खरीदारी और उसका पंजीकरण कराना।

  • रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधना और मांगलिक संकल्प लेना।

पूर्णिमा तिथि और राखी बांधने के श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि आज प्रातः 09 बजकर 48 मिनट तक ही विद्यमान है। यद्यपि उदयातिथि के नियम से रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जाएगा, परंतु जो बहनें पूर्णिमा तिथि के प्रत्यक्ष प्रभाव में राखी बांधना चाहती हैं, उनके लिए सुबह का समय सबसे अनुकूल है।

  • पूर्णिमा तिथि युक्त प्रातःकालीन मुहूर्त: प्रातः 05 बजकर 57 मिनट से प्रातः 09 बजकर 48 मिनट तक। इस शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 03 घंटे 51 मिनट की है, जो प्रातःकाल राखी बांधने के लिए अत्यंत उत्तम मानी गई है।

  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक। (यद्यपि यह स्वयं सिद्ध मुहूर्त है, परंतु राहुकाल दोपहर 12:22 बजे समाप्त होने के बाद 12:22 से 12:48 के बीच इसका उपयोग करना अधिक श्रेयस्कर रहेगा)।

  • विजय मुहूर्त: अपराह्न 04 बजकर 08 मिनट से सायं 05 बजकर 03 मिनट तक। यह समय शत्रुओं पर विजय और भाई के पराक्रम में वृद्धि करने वाला माना जाता है।

  • अमृत काल: अपराह्न 04 बजकर 14 मिनट से सायं 05 बजकर 53 मिनट तक।

  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 08 बजकर 41 मिनट से रात्रि 09 बजकर 02 मिनट तक।

  • सायाह्न सन्ध्या मुहूर्त: सायं 08 बजकर 41 मिनट से रात्रि 09 बजकर 43 मिनट तक।

रक्षाबंधन पर दिनभर के अमृत, लाभ और शुभ चौघड़िया मुहूर्त

चौघड़िया मुहूर्त ज्योतिष में किसी भी शुभ कार्य को संपन्न करने के लिए अत्यंत प्रामाणिक माना जाता है। यदि आप प्रातःकालीन पूर्णिमा मुहूर्त में राखी नहीं बांध पाए हैं, तो दिनभर उपलब्ध श्रेष्ठ चौघड़िया मुहूर्तों का लाभ उठा सकते हैं:

  • लाभ चौघड़िया: प्रातः 07 बजकर 33 मिनट से प्रातः 09 बजकर 10 मिनट तक (उन्नति और व्यापारिक लाभ के लिए उत्तम)।

  • अमृत चौघड़िया: प्रातः 09 बजकर 10 मिनट से प्रातः 10 बजकर 46 मिनट तक (दीर्घायु और पारिवारिक सुख के लिए सर्वश्रेष्ठ)।

  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से दोपहर 01 बजकर 58 मिनट तक (राहुकाल समाप्त होते ही मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल)।

  • चर चौघड़िया: सायं 05 बजकर 11 मिनट से सायं 06 बजकर 47 मिनट तक (गतिशीलता और यात्रा संबंधी कार्यों के लिए शुभ)।

शास्त्र सम्मत राखी पूजन विधि और वैदिक मंत्र

रक्षाबंधन के पावन दिन प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा की थाली तैयार करें। थाली में शुद्ध रोली, अक्षत (अखंडित चावल), चंदन, पीली सरसों, दूर्वा, दीपक, ताजे पुष्प, मिष्ठान और सूती अथवा रेशमी रक्षासूत्र रखें। सबसे पहला रक्षासूत्र भगवान श्रीगणेश और अपने ईष्टदेव को समर्पित करें।

राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए और बहन का मुख पश्चिम दिशा में हो। भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर अक्षत लगाएं। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाकर रक्षासूत्र बांधें और इस वैदिक रक्षा मंत्र का उच्चारण करें:

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

मंत्रोच्चारण के पश्चात बहन भाई की आरती उतारे, जिससे सभी प्रकार की नकारात्मक दृष्टियां दूर हों। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और भाई अपनी बहन को उपहार देकर जीवनपर्यंत उसके सम्मान व सुरक्षा का संकल्प लें।

देश के प्रमुख शहरों में स्थानीय प्रभाव और सावधानियां

दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश (लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, नोएडा), बिहार (पटना, गया), मध्य प्रदेश (भोपाल, इंदौर), राजस्थान (जयपुर, जोधपुर) और महाराष्ट्र (मुंबई, पुणे) सहित पूरे देश में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार चौघड़िया और राहुकाल के समय में कुछ मिनटों का स्थानीय अंतर हो सकता है। तथापि, सभी स्थानों पर सुबह 10:46 से 12:22 बजे के मध्य राहुकाल का प्रभाव मुख्य रूप से रहेगा। इसलिए बहनों को समय का विशेष ध्यान रखते हुए राहुकाल बीतने के उपरांत ही शुभ चौघड़िया में रक्षासूत्र बांधना चाहिए।

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