नो बॉल फेंकने में नंबर-1 बने रवींद्र जडेजा! टॉप-5 टेस्ट स्पिनर्स की लिस्ट ने क्रिकेट जगत को चौंकाया; जानिए क्यों बार-बार क्रीज लांघ रहे ‘सर जडेजा’

क्रिकेट की दुनिया में स्पिन गेंदबाजों को उनकी कसी हुई लाइन-लेंथ, धीमी रफ्तार और क्रीज के भीतर सटीक नियंत्रण के लिए जाना जाता है। तेज गेंदबाजों के लंबे और आक्रामक रन-अप में तो पैर का फिसलना या ओवरस्टेप होना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन महज तीन से चार कदमों के रन-अप वाले किसी विश्वस्तरीय स्पिनर का बार-बार नो बॉल फेंकना किसी पहेली से कम नहीं है। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख ऑलराउंडर और टेस्ट में 350 से अधिक विकेट ले चुके रवींद्र जडेजा ने एक ऐसा अनचाहा और शर्मनाक रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है, जिसने दुनिया भर के क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों को हैरान कर दिया है। साल 2021 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो जडेजा टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो बॉल फेंकने वाले दुनिया के नंबर-1 स्पिनर बन चुके हैं।

जडेजा का हैरान करने वाला आंकड़ा: दूसरे नंबर के गेंदबाज से दोगुने से भी ज्यादा आगे

अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में साल 2021 से लेकर अब तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रवींद्र जडेजा ने अकेले 88 नो बॉल फेंकी हैं। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इस सूची में दूसरे स्थान पर मौजूद पाकिस्तानी स्पिनर नोमान अली उनसे कोसों दूर हैं। नोमान अली ने इस दौरान 40 नो बॉल की हैं, जो जडेजा के आंकड़े के आधे से भी कम है।

यदि जडेजा के बाद आने वाले दुनिया के शीर्ष पांच स्पिनरों की कुल नो बॉल को एक साथ जोड़ भी दिया जाए, तो भी वे जडेजा के आंकड़े से बहुत ज्यादा आगे नहीं निकल पाते। जडेजा के नीचे मौजूद पांच स्पिनर्स ने मिलकर कुल 126 नो बॉल फेंकी हैं। श्रीलंका के खिलाफ हालिया टेस्ट सीरीज के दौरान भी जडेजा ने दोनों मैचों की चार पारियों में कुल 8 नो बॉल फेंकीं। पहले टेस्ट की दूसरी पारी में तो श्रीलंकाई कप्तान धनंजय डिसिल्वा को जडेजा की नो बॉल के चलते एक बड़ा जीवनदान मिला, जिसने मैच के एक नाजुक मोड़ पर टीम इंडिया की मुश्किलें बढ़ा दी थीं।

साल 2021 से टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा नो बॉल फेंकने वाले टॉप-5 स्पिनर्स

  • रवींद्र जडेजा (भारत): 88 नो बॉल

  • नोमान अली (पाकिस्तान): 40 नो बॉल

  • लसिथ एम्बुलडेनिया (श्रीलंका): 33 नो बॉल

  • जैक लीच (इंग्लैंड): 19 नो बॉल

  • जोमेल वारिकन (वेस्टइंडीज) / जहीर खान (अफगानिस्तान): 17-17 नो बॉल

यह सूची साफ दर्शाती है कि इंग्लैंड के जैक लीच (19) या वेस्टइंडीज के जोमेल वारिकन (17) जैसे नियमित स्पिनर भी अपनी क्रीज अनुशासन को लेकर काफी सतर्क रहे हैं, जबकि जडेजा का 88 का आंकड़ा किसी फ्रंटलाइन स्पिनर के लिए एक असामान्य अपवाद (Outlier) बन चुका है।

स्पिनर के लिए नो बॉल क्यों मानी जाती है अक्षम्य गलती?

क्रिकेट के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार, किसी स्पिन गेंदबाज द्वारा ओवरस्टेप करना ‘अपराध’ के समान माना जाता है। तेज गेंदबाज 20 से 30 मीटर की दूरी से पूरी ताकत के साथ दौड़कर आते हैं, जहां उनके शरीर का संतुलन और मोमेंटम कभी-कभी लैंडिंग क्रीज के पार चला जाता है। इसके विपरीत, रवींद्र जडेजा जैसे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर का रन-अप बहुत छोटा और मापा हुआ होता है।

स्पिन गेंदबाजी में गेंद को गति शरीर के झटके से नहीं, बल्कि उंगलियों और कलाई के रोटेशन से दी जाती है। ऐसे में यदि कोई स्पिनर नियमित अंतराल पर क्रीज लांघ रहा है, तो यह दर्शाता है कि यह कोई तात्कालिक चूक नहीं, बल्कि एक गहरी तकनीकी या आदतन समस्या है जिसे बार-बार चेतावनी के बावजूद सुधारा नहीं जा पा रहा है।

जडेजा की नो बॉल का खौफनाक इतिहास: जब भारत ने गंवाए बड़े खिताब

रवींद्र जडेजा की इस ओवरस्टेपिंग की आदत ने केवल टेस्ट क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के कई ऐतिहासिक नॉकआउट मुकाबलों में भारी कीमत वसूली है:

2016 का टी20 विश्व कप सेमीफाइनल: मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए सेमीफाइनल मैच में जडेजा ने लेंडल सिमंस को आउट कर दिया था, लेकिन सायरन बजने पर वह गेंद नो बॉल निकली। उस समय सिमंस सस्ते में पवेलियन लौट रहे थे, लेकिन जीवनदान मिलने के बाद उन्होंने नाबाद मैच जिताऊ पारी खेलकर भारत को विश्व कप से बाहर कर दिया।

2017 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल: पाकिस्तान के खिलाफ ओवल के मैदान पर जसप्रीत बुमराह के साथ-साथ स्पिन विभाग के अनुशासनात्मक दबाव में भी नो बॉल की गलतियां देखने को मिली थीं, जिसने मैच का रुख मोड़ दिया था।

रेड-बॉल टेस्ट क्रिकेट में भी जडेजा के करियर में ऐसे कई मौके आए हैं जब उनके द्वारा चटकाए गए विकेट अंपायर द्वारा नो बॉल करार दिए जाने के कारण खारिज हो गए और विरोधी बल्लेबाजों ने बड़ी साझेदारियां बना डालीं।

क्या है इस तकनीकी खामी की असली वजह?

क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व स्पिन गेंदबाजों का मानना है कि रवींद्र जडेजा की नो बॉल समस्या के पीछे उनकी गेंदबाजी शैली और रफ्तार में छिपा लालच है:

तेजी से गेंद डालने का प्रयास: जडेजा दुनिया के उन चुनिंदा स्पिनरों में से हैं जो 90 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकते हैं। उनकी ‘आर्म बॉल’ और स्किड कराने वाली गेंदों पर गति हासिल करने के लिए वे अक्सर डिलीवरी स्ट्राइड (गेंद फेंकने वाले अंतिम कदम) को सामान्य से ज्यादा लंबा खींचते हैं।

क्रीज के मुहाने से गेंद रिलीज करना: बल्लेबाज को फ्लाइट और लेंथ का अंदाजा न लगाने देने के लिए जडेजा अक्सर स्टंप्स के बिल्कुल नजदीक और पॉपिंग क्रीज की अंतिम सीमा रेखा तक जाकर गेंद रिलीज करने की कोशिश करते हैं। इस प्रक्रिया में मिलीसेकंड की चूक भी पैर को सफेद रेखा के पार पहुंचा देती है।

थकावट के दौरान एकाग्रता का टूटना: टेस्ट मैचों में लंबे स्पेल (20 से 30 ओवर) फेंकने के दौरान जब शरीर थकता है, तो कदमों का तालमेल बिगड़ने लगता है और क्रीज के प्रति सजगता कम हो जाती है।

टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ के लिए चिंता का सबब

रवींद्र जडेजा आधुनिक भारतीय टेस्ट क्रिकेट के निर्विवाद मैच-विनर हैं। टेस्ट में उनके बल्ले और गेंद का संतुलन उन्हें महान ऑलराउंडरों की श्रेणी में खड़ा करता है। लेकिन उनका यह अनचाहा रिकॉर्ड भारतीय टीम प्रबंधन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। भारतीय स्पिन गेंदबाजी कोच और सहयोगी स्टाफ ने नेट्स में जडेजा के रन-अप को री-कैलिब्रेट करने और क्रीज अनुशासन सुधारने के लिए कई विशेष अभ्यास सत्र तैयार किए हैं।

आने वाले दिनों में जब भारतीय टीम को विदेशी और घरेलू पिचों पर बेहद कड़े मुकाबले खेलने हैं, जहां एक-एक रन और एक-एक विकेट का महत्व निर्णायक होता है, वहां जडेजा को अपनी इस पुरानी आदत पर तुरंत लगाम लगानी होगी।

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