
सावन के पवित्र महीने में शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व है। इस कठिन यात्रा के दौरान शिव भक्त गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। यदि आप इस साल पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो इसके कड़े नियमों और मान्यताओं के बारे में पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि यात्रा में कोई त्रुटि न हो।
कांवड़ को जमीन पर रखने से जुड़े नियम और सावधानियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगाजल उठाने के बाद कांवड़ को कभी भी सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है। यात्रा के दौरान यदि थकान हो जाए, तो कांवड़ को जमीन पर रखने के बजाय रास्ते में बने विशेष स्टैंड पर रखना चाहिए या किसी साथी को पकड़ाकर विश्राम करना चाहिए। यदि गलती से कांवड़ जमीन पर रख जाए या गिर जाए, तो इसे अशुभ मानकर कई स्थानों पर दोबारा पवित्र जल भरकर नए सिरे से यात्रा शुरू करने का विधान है।
पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाले रखें इन 6 बातों का ध्यान
कांवड़ यात्रा को पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ पूरा करने के लिए कुछ मुख्य बातों का पालन करना अनिवार्य माना गया है:
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जलाभिषेक तक पूरी तरह सात्विक रहें और मांस, मदिरा या तंबाकू जैसी चीजों से दूर रहें।
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रोज स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और कांवड़ को छूने से पहले पवित्रता का ध्यान रखें।
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यात्रा के दौरान मन को शांत रखें, किसी से विवाद न करें और अपशब्द बोलने से बचें।
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चमड़े (लेदर) से बनी वस्तुएं जैसे जूते, बेल्ट या पर्स का उपयोग बिल्कुल न करें।
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मार्ग में निरंतर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ें।
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केवल पैदल चलने तक सीमित न रहें, बल्कि हर नियम का पालन करते हुए सबके प्रति सम्मान भाव रखें।
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