मिडिल ईस्ट में बारूदी तनाव के बीच भारत आ रहे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, नई दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन में लेंगे हिस्सा; पुतिन और शी जिनपिंग के साथ महामंथन की तैयारी

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव और बारूदी टकराव के बीच कूटनीतिक हलकों से एक बहुत बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान अगले महीने भारत की आधिकारिक यात्रा पर आ रहे हैं। ईरानी राजनयिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति पेजेशकियान 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से भाग लेंगे। पद संभालने के बाद राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह पहला भारत दौरा होगा। भारत इस वर्ष ब्राजील से अध्यक्षता ग्रहण करने के बाद 18वें ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ऐसे नाजुक समय में जब खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं चरम पर हैं, ईरानी राष्ट्रपति का भारत आना वैश्विक भू-राजनीति और शांति प्रयासों के लिहाज से एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

पश्चिम एशिया में बारूदी तनाव के बीच नई दिल्ली का महामंच: क्यों खास है यह दौरा?

ईरान के राष्ट्रपति का यह दौरा सामान्य परिस्थितियों में नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया के सबसे गंभीर सुरक्षा संकट के बीच हो रहा है। फरवरी से शुरू हुए प्रत्यक्ष व परोक्ष सैन्य टकरावों, हमलों और जवाबी कार्रवाईयों के चलते पूरा खाड़ी क्षेत्र इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। फारस की खाड़ी और विशेष रूप से रणनीतिक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं।

इस भीषण संकट के बीच राष्ट्रपति पेजेशकियान का नई दिल्ली पहुंचना यह दर्शाता है कि तेहरान पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है। ईरान इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के प्रमुख देशों के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए करना चाहता है।

18वें ब्रिक्स सम्मेलन में जुटेंगे वैश्विक दिग्गज: पुतिन, शी जिनपिंग और पेजेशकियान का संगम

भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) तय किया गया है। 2024 में ईरान, मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पूर्ण सदस्य बनने और 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद ब्रिक्स समूह का यह 11 सदस्यीय विस्तारित स्वरूप नई दिल्ली में जुटेगा।

शिखर सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी नई दिल्ली पहुंचने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत इस मंच के जरिए वैश्विक आर्थिक सुधारों, वित्तीय संप्रभुता और बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा। जब दुनिया के सबसे प्रभावशाली गैर-पश्चिमी नेता एक ही छत के नीचे होंगे, तो सम्मेलन के औपचारिक एजेंडे के साथ-साथ बैक-चैनल बैठकों में पश्चिम एशिया और यूक्रेन संकट पर होने वाली चर्चाओं पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी रहेंगी।

क्या शांतिदूत बनेगा भारत? ईरान की मध्यस्थता की उम्मीदें और अराघची का बयान

इस पूरे दौरे का सबसे अहम पहलू यह है कि ईरान मौजूदा संकट के समाधान के लिए भारत को एक भरोसेमंद और निष्पक्ष वैश्विक साझेदार के रूप में देख रहा है। इससे पहले ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में भारत आए ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने नई दिल्ली में खुलकर कहा था कि मौजूदा तनाव का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता और केवल कूटनीतिक बातचीत ही आगे का रास्ता है।

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा था कि तेहरान पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए भारत द्वारा निभाई जाने वाली किसी भी रचनात्मक मध्यस्थता भूमिका का पूरे दिल से स्वागत करेगा। भारत के संबंध ईरान के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत रहे हैं, जबकि दूसरी ओर नई दिल्ली के संबंध अमेरिका, इजरायल और सऊदी-यूएई जैसे खाड़ी देशों के साथ भी बेहद प्रगाढ़ और रणनीतिक हैं। ऐसे में भारत ही वह एकमात्र प्रमुख वैश्विक शक्ति है जो दोनों पक्षों से सीधे और स्वतंत्र रूप से संवाद करने की कूटनीतिक क्षमता रखती है।

चाबहार बंदरगाह से होर्मुज तक: भारत-ईरान रणनीतिक और आर्थिक हित

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सम्मेलन के इतर होने वाली संभावित द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के साझा हितों पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात हुई थी, और हाल ही में दोनों के बीच टेलीफोन पर भी क्षेत्रीय शांति को लेकर विस्तृत वार्ता हुई थी।

भारत के लिए ईरान के साथ सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना ‘चाबहार बंदरगाह’ (Chabahar Port) है। भारत ने चाबहार के विकास के लिए दीर्घकालिक समझौता किया है, जो भारत को पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सीधी व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है।

इसके अलावा ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) की प्रगति, कच्चे तेल की सुरक्षित आपूर्ति और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक जहाजों की निर्बाध सुरक्षा भारत के मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। बैठक के दौरान भारत इन व्यापारिक और ऊर्जा मार्गों को संघर्ष से मुक्त रखने पर जोर देगा।

कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा: ब्रिक्स में आम सहमति और साझा बयान की चुनौती

मेजबान देश के रूप में भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा भी साबित होगा। ब्रिक्स के भीतर पश्चिम एशिया संकट को लेकर अलग-अलग सदस्य देशों के दृष्टिकोण में भिन्नता है। जहां ईरान चाहता है कि ब्रिक्स उसके खिलाफ हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करे, वहीं यूएई और अन्य देश अधिक संतुलित रुख के पक्षधर हैं।

मई में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में मतभेदों के चलते साझा घोषणापत्र के बजाय केवल ‘चेयर्स स्टेटमेंट’ जारी किया गया था। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भारत का प्रयास यह रहेगा कि भू-राजनीतिक विवादों के कारण ब्रिक्स का मूल आर्थिक और विकासात्मक एजेंडा प्रभावित न हो और सभी सदस्य देशों को साथ लेकर एक सर्वसम्मत संयुक्त घोषणापत्र (Joint Declaration) तैयार किया जा सके।

नई दिल्ली में वैश्विक कूटनीति का नया केंद्र

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का भारत आगमन न केवल भारत-ईरान संबंधों को नई ऊर्जा देगा, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती मध्यस्थ और संतुलनकारी शक्ति पर भी मुहर लगाएगा।

जब दुनिया ध्रुवीकरण और संघर्षों के दौर से गुजर रही है, तब नई दिल्ली से निकलने वाला कूटनीतिक संदेश यह तय करेगा कि क्या ब्रिक्स जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं 21वीं सदी के सबसे जटिल संकटों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने में दुनिया का नेतृत्व कर सकती हैं। सितंबर में होने वाला यह सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होने जा रहा है।

Check Also

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में सुप्रीम कोर्ट से समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया को बहुत बड़ी राहत, दिव्यांगजनों पर टिप्पणी मामले में दर्ज सभी FIR रद्द

यूट्यूब के लोकप्रिय और बहुचर्चित कॉमेडी शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) में दिव्यांगजनों …