
तेल अवीव/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे ने सामरिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। बेन-गुरियन एयरपोर्ट पर इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने प्रोटोकॉल तोड़कर पीएम मोदी का स्वागत किया। 2017 के ऐतिहासिक दौरे के बाद यह दूसरा अवसर है जब भारत और Israel के रिश्ते रक्षा सहयोग के नए अध्याय की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक करीब 10 अरब डॉलर की बहुचर्चित डिफेंस डील पर सहमति बन सकती है, जिसमें ऐसे एडवांस हथियार शामिल हैं जिन्हें अब तक इजरायल ने सीमित देशों को ही दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार भारत की प्राथमिकता मल्टी-लेयर एयर डिफेंस शील्ड तैयार करना है, ताकि चीन और पाकिस्तान जैसे मोर्चों पर किसी भी संभावित खतरे से एक साथ निपटा जा सके। खासतौर पर ड्रोन स्वार्म और लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा पर जोर है।
एयर डिफेंस शील्ड: Iron Dome से Arrow तक बड़ी तैयारी
रक्षा सूत्रों का कहना है कि बातचीत में अलग-अलग रेंज वाले कई सिस्टम शामिल हैं। इनमें Rafael Advanced Defense Systems और Israel Aerospace Industries द्वारा विकसित तकनीकें प्रमुख हैं। संभावित सूची में Iron Dome, David’s Sling और Arrow जैसे सिस्टम शामिल बताए जा रहे हैं।
भारत पहले ही Barak-8 को अपनी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल कर चुका है। अब कोशिश लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम Arrow सिस्टम को जोड़ने की है, जिससे देश की एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ सकती है।
‘सुदर्शन चक्र’ के जरिए देसी-विदेशी टेक्नोलॉजी का संगम
सूत्रों के मुताबिक भारत अपने स्वदेशी एयर डिफेंस नेटवर्क ‘सुदर्शन चक्र’ को इजरायली टेक्नोलॉजी से जोड़ना चाहता है। योजना यह है कि Iron Dome और David’s Sling जैसी प्रणालियों को भारतीय कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम में इंटीग्रेट किया जाए, ताकि लो-रेंज से लेकर हाई-एल्टीट्यूड खतरे तक एकीकृत सुरक्षा मिल सके।
ड्रोन स्वार्म का तोड़: Iron Beam पर खास नजर
ड्रोन हमलों के बदलते ट्रेंड को देखते हुए भारत की दिलचस्पी Iron Beam में बताई जा रही है। यह लेजर आधारित एयर डिफेंस सिस्टम रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। प्रति शॉट बेहद कम लागत और हाई-स्पीड इंटरसेप्शन इसकी खासियत मानी जाती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन स्वार्म सबसे बड़ी चुनौती होंगे और Iron Beam जैसी प्रणाली गेमचेंजर साबित हो सकती है।
नेक्स्ट जेन UAV: Heron TP और Mk2 पर बातचीत
सीमा निगरानी और प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने के लिए एडवांस्ड ड्रोन डील पर भी चर्चा है। भारत Heron TP और Heron Mk2 जैसे हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस UAV के अधिग्रहण और संभावित को-प्रोडक्शन पर विचार कर रहा है। ये ड्रोन 40 घंटे से अधिक उड़ान भरने और रियल-टाइम सर्विलांस के साथ स्ट्राइक मिशन अंजाम देने में सक्षम माने जाते हैं।
लंबी दूरी की मारक क्षमता: Rampage और Air LORA
वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए Rampage और Air LORA मिसाइलों पर भी संभावित सहमति की चर्चा है। Rampage को सुखोई-30 और मिग-29 जैसे फाइटर जेट्स पर तैनात किया जा सकता है, जबकि Air LORA लगभग 400 किलोमीटर तक सटीक वार करने में सक्षम बताई जाती है। को-प्रोडक्शन मॉडल पर समझौता ‘मेक इन इंडिया’ को भी मजबूती दे सकता है।
समुद्री सुरक्षा और सबमरीन टेक्नोलॉजी पर फोकस
हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा के बीच नेवल टेक्नोलॉजी सहयोग भी एजेंडे में है। सबमरीन से लॉन्च होने वाली क्रूज मिसाइल, एडवांस सोनार सिस्टम और समुद्री निगरानी क्षमता बढ़ाने पर दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना जताई जा रही है।
रणनीतिक साझेदारी का नया दौर
विश्लेषकों का मानना है कि यह संभावित 10 अरब डॉलर की डील भारत-इजरायल रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और Benjamin Netanyahu की अगुवाई में यह सहयोग सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जॉइंट डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन पर भी केंद्रित होगा। यदि समझौते पर मुहर लगती है तो भारत की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस रणनीति को बड़ा बल मिलेगा और दक्षिण एशिया की सामरिक तस्वीर बदल सकती है।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया