
नई दिल्ली: मरीजों की जान बचाने में दिन-रात लगे रहने वाले डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ पर बढ़ते हमले अब एक वैश्विक संकट बन चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल Atención Primaria में प्रकाशित हालिया रिपोर्ट्स ने अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
WHO के अनुसार, दुनिया भर में बड़ी संख्या में हेल्थकेयर प्रोफेशन्ल्स को अपने सेवा काल के दौरान शारीरिक और मानसिक हिंसा का सामना करना पड़ता है।
WHO रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े: हिंसा का भयावह रूप
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40% (हर 10 में से 4): स्वास्थ्यकर्मी अपने करियर में कम से कम एक बार गंभीर शारीरिक हिंसा (Physical Assault) के शिकार होते हैं।
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62% स्वास्थ्यकर्मी: गाली-गलौज, धमकी, मौखिक दुर्व्यवहार और बदसलूकी जैसी घटनाओं को झेलते हैं।
किन देशों में सबसे ज्यादा डॉक्टर झेलते हैं हिंसा? (Global Data Sheet)
चिकित्सा अध्ययन के मुताबिक, डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा सिर्फ विकासशील देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकसित राष्ट्रों में भी स्थिति चिंताजनक है:
| देश | हिंसा झेलने वाले डॉक्टरों / हेल्थकेयर वर्कर्स का प्रतिशत |
| जर्मनी | 91% |
| चीन | 90% |
| पेरू | 84.5% |
| तुर्की | 84% |
| भारत | 77.3% |
| जॉर्डन | 63% |
| अमेरिका (इमरजेंसी डॉक्टर) | 47% |
डॉक्टरों पर क्यों बढ़ रहे हैं हमले?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हिंसा के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
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अस्पतालों में बुनियादी ढांचे की कमी: डॉक्टरों की तुलना में मरीजों का भारी दबाव और लंबा वेटिंग टाइम।
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कम्यूनिकेशन गैप: डॉक्टर और मरीज के परिजनों के बीच समय पर सही संवाद न हो पाना।
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कम होता धैर्य (Patience): पूर्व IMA अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम के अनुसार, लोग इलाज पर भारी खर्च के बाद शत-प्रतिशत त्वरित परिणाम की उम्मीद करते हैं, और अनहोनी होने पर गुस्सा डॉक्टरों पर निकालते हैं।
वैश्विक सुरक्षा मॉडल और भारत की स्थिति
डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दुनिया के कई देशों ने बेहद कड़े कानून लागू किए हैं:
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स्पेन: डॉक्टरों पर हमले को ‘राज्य के खिलाफ अपराध’ (Crime against the State) माना गया, जिससे मामलों में 16% की गिरावट आई।
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सिंगापुर: अभद्र व्यवहार करने पर 5,000 सिंगापुर डॉलर का जुर्माना और 1 साल तक की जेल का प्रावधान है।
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यूनाइटेड किंगडम (UK): हिंसक व्यवहार करने वाले मरीजों को स्वास्थ्य प्रणाली में चिह्नित कर दिया जाता है और उनका नाम जीपी लिस्ट से हटा दिया जाता है।
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भारत की स्थिति: भारत के 19 राज्यों में सुरक्षा कानून लागू हैं (जैसे महाराष्ट्र में 2010-2021 के बीच 738 मामले दर्ज हुए)। हालांकि, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले के अनुसार, राज्यों के अलग-अलग कानूनों के बजाय पूरे देश में एक सख्त केंद्रीय/राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (Central Protection Act) की सख्त जरूरत है।
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