Dharmendra Pradhan Paper Leak Flashback: जब पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर उतरे थे आज के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, खाई थीं पुलिस की लाठियां

नई दिल्ली: देश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली पर जारी विवाद के बीच संसद से लेकर जंतर-मंतर तक राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्षी दल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, इतिहास के पन्नों में एक ऐसा विरोधाभासी मोड़ दर्ज है जहाँ खुद धर्मेंद्र प्रधान ने एक छात्र नेता के रूप में ‘पेपर लीक’ के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए पुलिस की बर्बर लाठियां खाई थीं और अस्पताल पहुंचे थे।

1997 का भुवनेश्वर आंदोलन: जब ABVP नेता के रूप में घायल हुए थे धर्मेंद्र प्रधान

बात वर्ष 1997 की है जब ओडिशा में जानकी वल्लभ पटनायक के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। उस समय राज्य में एक बड़े प्रश्नपत्र लीक (Question Paper Leak) मामले ने तूल पकड़ा था:

  • सचिवालय का घेराव: उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी की पढ़ाई कर रहे 28 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव थे। उन्होंने करीब 1,500 छात्रों के साथ भुवनेश्वर स्थित राज्य सचिवालय का घेराव किया।

  • पुलिस लाठीचार्ज में गंभीर चोटें: तत्कालीन मीडिया रिपोर्टों और सहयोगियों के अनुसार, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर भीषण लाठीचार्ज किया। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान को गंभीर फ्रैक्चर और चोटें आई थीं।

  • छात्र राजनीति से भाजपा तक: 18 साल की उम्र में छात्र राजनीति शुरू करने वाले प्रधान 1994 से 1997 तक ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे। इसके बाद वे सक्रिय रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए।

29 साल बाद बदला किरदार: 1997 बनाम 2026

समय के चक्र ने धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका को पूरी तरह बदल दिया है:

समय / वर्ष धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका मुद्दा और परिस्थिति
1997 (ओडिशा) ABVP छात्र नेता (विपक्ष) कांग्रेस सरकार के खिलाफ पेपर लीक पर सड़क पर प्रदर्शन और लाठीचार्ज।
2026 (केंद्र) केंद्रीय शिक्षा मंत्री (सत्ता) NEET-UG पेपर लीक पर संसद में विपक्ष के निशाने पर और इस्तीफे की मांग।

संसद से जंतर-मंतर तक NEET मुद्दे पर घमासान

संसद के मानसून सत्र में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और निष्पक्ष जांच के लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा जरूरी है।

दूसरी ओर, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और वह परीक्षा सुधारों व छात्रों के भविष्य को लेकर संसद में हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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