
संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोलने के बाद सत्ताधारी दल (BJP) ने उनके खिलाफ कड़ा मोर्चा खोल दिया है। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने राहुल गांधी के बयानों को तथ्यहीन और झूठ का पुलिंदा बताते हुए उनसे सदन और देश से माफी मांगने की मांग की है।
जगदंबिका पाल का तीखा प्रहार: ‘केवल कहानियां सुनाते हैं राहुल’
वरिष्ठ भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके पास कोई ज्ञान या ठोस तथ्य नहीं है। उन्होंने कहा:
“वह केवल कहानियां सुनाते हैं। कोई ज्ञान नहीं, केवल तथ्यहीन बातें करते हैं। स्पीकर बार-बार मना कर रहे थे, लेकिन इसके बाद भी वह लगे रहे। उन्होंने कितनी बार पीएम को नहीं बोलने दिया, राजनाथ सिंह और पूरी पार्टी को कुछ भी बोलते जा रहे थे और फिर उन्होंने गृहमंत्री के खिलाफ भी बातें करना शुरू कर दिया।”
गिरिराज सिंह बोले- ‘बिना सबूत के गालियां दे रहे हैं’
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में एक साधारण सदस्य भी बिना सबूतों के कुछ नहीं बोल सकता, लेकिन विपक्ष के नेता होने के नाते राहुल गांधी बिना किसी तर्क और सबूत के आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, “ये कोई गुड्डे-गुड़ियों का खेल है क्या? हम सबूत मांग रहे हैं कि किस ऑर्डर से फायरिंग हुई। उनको इतना भी समझ नहीं है कि आंसू गैस के गोले छोड़ना फायरिंग नहीं होती।”
पीयूष गोयल की मांग: ‘माफी मांगें राहुल गांधी’
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पास बहस के विषय पर बोलने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए उन्होंने सिर्फ झूठ का सहारा लिया। पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि जब कोई फायरिंग हुई ही नहीं, तो राहुल गांधी झूठा आरोप लगा रहे हैं और इसके लिए उन्हें सदन व देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
क्या था पूरा विवाद?
लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई। राहुल गांधी के इस बयान और कुछ कथित असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर सत्ता पक्ष भड़क गया। बाद में लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशानुसार उन शब्दों और बयानों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
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