
अयोध्या में स्थित करोड़ों राम भक्तों की आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को एक नया और पेशेवर स्वरूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। इस महत्वपूर्ण नियुक्ति के साथ ही अयोध्या के धार्मिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पिछले कई महीनों से इस पद के लिए चल रही लंबी और बेहद कड़ी चयन प्रक्रिया का आधिकारिक रूप से समापन हो गया, जब ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम पर मुहर लगा दी गई।
इस उच्च पद के लिए देश भर से प्रशासनिक और सैन्य सेवा से जुड़े दिग्गजों ने दावेदारी पेश की थी। आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रतिष्ठित पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे, जो इस पद की गंभीरता और महत्ता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। कई चरणों की कठिन स्क्रीनिंग, एआई आधारित मूल्यांकन, ऑनलाइन इंटरव्यू और उच्च स्तरीय पैनल की समीक्षा के बाद अंततः रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस जिम्मेदारी के लिए सबसे योग्य पाया गया। उनकी नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर के दैनिक कामकाज, सुरक्षा, वित्त और कानूनी मामलों को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है।
कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा? देवरिया से लेकर आसमान तक का सफर
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले छोटे से भोपतपुरा गांव से ताल्लुक रखने वाले जितेंद्र मिश्रा का जीवन अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और देशसेवा की एक प्रेरणादायक मिसाल रहा है। उनका परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का है, हालांकि उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली और देश के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर बीता है। उनके पिता नथुनी मिश्रा दिल्ली के एक कॉलेज में लेक्चरर रह चुके हैं, जबकि उनका पूरा परिवार शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है।
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में एक फाइटर पायलट के रूप में कमीशन प्राप्त किया था। अपने लगभग चार दशक (39 साल) के लंबे और गौरवशाली सैन्य करियर के दौरान उन्होंने देश के लिए कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनों में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। वे पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, साल 1999 के कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) के दौरान मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बम तैनात करने वाली विशेष टीम में उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही थी। हाल ही में, बहुचर्चित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी उन्होंने वेस्टर्न कमांड के प्रमुख के रूप में सामरिक कौशल का परिचय दिया था। पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), बेंगलुरु के एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले मिश्रा के पास 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का शानदार अनुभव है।
नई जिम्मेदारी और प्राथमिकताएं: ‘बनाएंगे अपनी टीम, जीतेंगे लोगों का भरोसा’
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ का पद संभालने के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका मुख्य फोकस एक मजबूत और पेशेवर टीम का गठन करना होगा, ताकि मंदिर आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को बेहतरीन सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने संकेत दिया है कि संगठन के आकार और प्रकृति के अनुरूप नए प्रशासनिक नियम, प्रणालियां और कार्यसंस्कृति विकसित की जाएगी। अयोध्या में प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, ऐसे में भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और सुगम दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शुमार है।
ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों और मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा का भी मानना है कि मंदिर के विशाल स्वरूप को देखते हुए एक पूर्णकालिक और अनुभवी सीईओ की सख्त आवश्यकता थी, जो बिना किसी सरकारी प्रत्यक्ष दखल के स्वतंत्र रूप से काम करते हुए महासचिव को रिपोर्ट करे। जितेंद्र मिश्रा का यह प्रशासनिक अनुभव मंदिर के वित्तीय, कानूनी और प्रशासनिक ढांचे को एक नई मजबूती देगा। उनका स्पष्ट संदेश है कि लोगों का अटूट विश्वास ही इस संस्था की असली ताकत है, और उस विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करना तथा व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाना ही उनका मुख्य ध्येय रहेगा।
राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों की भी हुई एंट्री
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के साथ-साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक विस्तार के तहत तीन नए ट्रस्टियों के नामों की भी घोषणा की है। अयोध्या में संपन्न हुई ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में दिल्ली के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं समाजसेवी महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव को नया ट्रस्टी बनाया गया है। महेश भागचंदका राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी चेहरों में से एक रहे दिवंगत अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं। इन नए चेहरों के शामिल होने से ट्रस्ट की कार्यक्षमता में और अधिक विस्तार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी यह नियुक्तियां काफी अहम मानी जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर अयोध्या के मदन मोहन पांडे को प्रतिनिधित्व मिलने से क्षेत्रीय समन्वय और बेहतर होगा। राम मंदिर के भव्य गर्भगृह और संपूर्ण परिसर के निर्माण कार्य के अंतिम चरणों के बीच इस प्रकार के प्रशासनिक फेरबदल से व्यवस्था को एक सुव्यवस्थित गति मिलेगी।
स्थानीय विकास और एआई-संचालित आधुनिक प्रबंधन पर जोर
अयोध्या नगर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के साथ-साथ मंदिर के आंतरिक प्रशासन को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना भी नए सीईओ के एजेंडे में सबसे ऊपर है। चयन प्रक्रिया के दौरान जिस प्रकार आधुनिक तकनीक और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित स्क्रीनिंग का उपयोग किया गया था, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मंदिर प्रबंधन पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक तौर-तरीकों पर काम करेगा। श्रद्धालुओं के प्रवेश, निकास, दान काउंटर, विश्राम गृह और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं को डेटा-ड्राइविंग तरीकों से मॉनिटर किया जाएगा।
पूर्व सैन्य अधिकारी होने के नाते जितेंद्र मिश्रा की कार्यशैली में अनुशासन और समयबद्धता का विशेष महत्व है, जो राम मंदिर जैसी विशाल संस्था के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। देश के कोने-कोने से आने वाले राम भक्तों को सुलभ दर्शन और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराने की यह पहल निश्चित रूप से सनातन संस्कृति के इस सबसे बड़े केंद्र को वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बनाएगी।
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