नई दिल्ली/हेल्थ डेस्क: हम अक्सर अपने चेहरे, दिल और पेट की सेहत का तो पूरा ख्याल रखते हैं, लेकिन शरीर का पूरा वजन उठाने वाले पैरों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. अमूमन लोग पैरों पर तब ध्यान देते हैं जब उनमें तेज दर्द शुरू हो जाए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके पैर शरीर का ‘आईना’ होते हैं? पैरों में होने वाला मामूली सा दर्द, सुन्नपन या उनका हमेशा ठंडा रहना शरीर के भीतर पनप रही किसी बड़ी और गंभीर बीमारी का शुरुआती अलार्म (Early Warning Signs) हो सकता है.
इंसान के हर एक पैर में 26 हड्डियां और 100 से ज्यादा मांसपेशियां, टेंडन व लिगामेंट होते हैं, जो पूरे शरीर का संतुलन बनाते हैं. फोर्टिस गुरुग्राम के फुट एंड एंकल सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. अनुज चावला के अनुसार, पैरों में दिखने वाले बदलावों को हल्के में लेना भविष्य में भारी पड़ सकता है. आइए जानते हैं कि पैरों के ये संकेत किस बीमारी की ओर इशारा करते हैं:
पैर के ये 5 बड़े संकेत और उनसे जुड़ी बीमारियां
| पैरों में दिखने वाले लक्षण | संभावित अंदरूनी बीमारी/समस्या |
| पैर हमेशा ठंडे रहना या सुन्न होना | नसों की कमजोरी (Neuropathy) या खराब ब्लड सर्कुलेशन |
| टखनों (Ankles) और पैरों में लगातार सूजन | दिल (Heart), किडनी या लिवर की बीमारी का संकेत |
| एड़ियों का अत्यधिक फटना या रूखापन | डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) या थायरॉयड (Thyroid) की गड़बड़ी |
| नाखूनों का रंग बदलना या मोटा होना | फंगल इंफेक्शन या शरीर में पोषक तत्वों की भारी कमी |
| छोटे घाव या छालों का जल्दी ठीक न होना | हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज (Diabetes) |
डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए ‘रेड अलर्ट’
डायबिटीज के रोगियों के लिए पैरों में सुन्नपन होना सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है.
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नसों का डैमेज होना: डॉ. चावला के मुताबिक, लंबे समय तक शुगर लेवल हाई रहने से पैरों की नसें डैमेज हो जाती हैं और वहां खून की सप्लाई कम हो जाती है.
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गैंग्रीन का खतरा: संवेदनशीलता (Sensation) खत्म होने के कारण मरीजों को पैर में लगी छोटी सी चोट, छाले या मोच का पता नहीं चलता. धीरे-धीरे यह घाव सड़ने लगता है और इंफेक्शन इतना बढ़ जाता है कि यह गैंग्रीन का रूप ले लेता है. ऐसी स्थिति में संक्रमण को शरीर में फैलने से रोकने के लिए पैर काटने (Amputation) तक की नौबत आ सकती है. ‘इंडियन जर्नल ऑफ एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डायबिटीज के मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने का एक बहुत बड़ा कारण पैर की यही समस्याएं हैं.
आपकी खराब लाइफस्टाइल भी है जिम्मेदार
आजकल युवाओं में भी पैरों की दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका मुख्य कारण उनकी दिनचर्या है:
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घंटों बैठकर काम करना: ऑफिस में लगातार कई घंटों तक बैठे रहने से पैरों में खून का प्रवाह (Blood Flow) धीमा हो जाता है.
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गलत जूतों का चयन: बहुत टाइट, हाई हील्स या बिना आर्च सपोर्ट वाले गलत जूते पहनने से मांसपेशियों और जोड़ों पर गलत दबाव पड़ता है.
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बढ़ता वजन: शरीर का मोटापा सीधे तौर पर पैरों के लिगामेंट्स पर अतिरिक्त बोझ डालता है, जिससे ‘फ्लैट फुट’ (Flat Foot) जैसी समस्याएं पैदा होती हैं.
बचाव और देखभाल के लिए अपनाएं ये 5 आदतें
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रोजाना पैरों की जांच करें: रोज रात को सोने से पहले पैरों के तलवों को चेक करें कि कहीं कोई छाला, कट या कड़ापन (Callus) तो नहीं आ रहा है.
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सही फिटिंग के जूते: हमेशा आरामदायक और सही कुशनिंग वाले जूते ही पहनें.
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शुगर और वजन कंट्रोल: यदि आप शुगर के मरीज हैं, तो नियमित जांच कराएं और अपने वजन को नियंत्रित रखें.
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फिजिकल एक्टिविटी: पैरों की नसों को एक्टिव रखने के लिए रोज थोड़ी देर वॉक (सैर) या पैरों की हल्की स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज करें.
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साफ-सफाई और मॉइस्चराइजर: पैरों को साफ रखें और रूखेपन से बचाने के लिए मॉइस्चराइजर या नारियल तेल लगाएं.
एक्सपर्ट की सलाह: अगर आपके पैरों में लगातार सुन्नपन बना रहता है या कोई छोटा सा घाव हफ्ते भर बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो बिना समय गंवाए डॉक्टर या पोडियाट्रिस्ट (फुट स्पेशलिस्ट) से संपर्क करें. आजकल आधुनिक मेडिकल साइंस में बेहद कम चीरे वाली (Minimally Invasive) सर्जरी उपलब्ध हैं, जिससे रिकवरी बहुत तेजी से होती है.
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