
सनातन परंपरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उपवास केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धि का भी एक बड़ा माध्यम है। लेकिन अन्य सामान्य व्रतों की तुलना में जन्माष्टमी का व्रत थोड़ा कठिन और लंबा होता है, क्योंकि इसमें पूजा का मुख्य समय मध्यरात्रि यानी ठीक 12 बजे ‘निशीथ काल’ में आता है। ऐसे में व्रतियों को सुबह से लेकर आधी रात तक, और कई बार अगले दिन सूर्योदय तक भूखे-प्यासे रहना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज से लेकर दिल्ली-एनसीआर, मध्य प्रदेश और बिहार समेत पूरे देश में लाखों श्रद्धालु कान्हा के जन्मोत्सव पर उपवास रखते हैं। अक्सर देखा जाता है कि दिन ढलते-ढलते कई लोगों को तेज सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक थकान, घबराहट और पेट में जलन यानी एसिडिटी की गंभीर शिकायत होने लगती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार व्रत के दौरान कमजोरी का मुख्य कारण भोजन की कमी से ज्यादा ‘गलत खानपान’ और ‘पानी की कमी’ होता है। कई लोग पूरे दिन कुछ नहीं पीते और शाम होते ही तली-भुनी पूरियां या मीठे पकवान खा लेते हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक स्पाइक होकर क्रैश हो जाता है। यदि आप भी इस जन्माष्टमी पर बाल गोपाल की आराधना बिना किसी शारीरिक कमजोरी और थकान के पूरी ऊर्जा के साथ करना चाहते हैं, तो आपको अपनी फलाहार थाली में सही पोषक तत्वों का संतुलन बनाना होगा। सही रणनीति अपनाकर आप पूरे 24 घंटे खुद को तरोताजा और एक्टिव रख सकते हैं।
निर्जला या फलाहार: व्रत के दौरान शरीर में अचानक कमजोरी और सुस्ती क्यों आती है?
जब हम लंबे समय तक भोजन ग्रहण नहीं करते हैं, तो शरीर अपने संचित ग्लाइकोजन (ऊर्जा) का उपयोग करना शुरू कर देता है। जैसे-जैसे यह ऊर्जा कम होती है, शरीर में ग्लूकोज का स्तर गिरने लगता है, जिससे मस्तिष्क को सुस्ती का संकेत मिलता है। इसके अलावा, जन्माष्टमी का त्योहार अक्सर उमस भरे मौसम में आता है, जिसके चलते पसीने के जरिए शरीर से जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटैशियम तेजी से बाहर निकल जाते हैं।
दूसरी सबसे बड़ी वजह फलाहार में अत्यधिक तली-भुनी चीजों का अत्यधिक सेवन है। उपवास के नाम पर जब लोग बाजार की बनी मिठाइयां, साबूदाना वड़ा या ज्यादा तेल में तली कुट्टू की पूरियां खाते हैं, तो पाचन तंत्र पर अचानक भारी दबाव पड़ता है। तली हुई चीजों को पचाने के लिए शरीर की सारी ऊर्जा पेट की तरफ केंद्रित हो जाती है, जिससे व्यक्ति को भारीपन, उनींदापन और थकान घेर लेती है। वहीं खाली पेट बार-बार मीठी चाय या कॉफी पीने से पेट की अंदरूनी परत में एसिड बनने लगता है, जो सिरदर्द और जी मिचलाने का सबसे बड़ा कारण बनता है।
ऊर्जा का पावरहाउस: मखाना, भुनी मूंगफली और ड्राई फ्रूट्स से बनाएं एनर्जेटिक डाइट
व्रत के दौरान दिनभर स्थिर ऊर्जा बनाए रखने के लिए जटिल कार्बोहाइड्रेट्स (Complex Carbs), हेल्दी फैट्स और प्रोटीन का संगम बेहद जरूरी है। इसके लिए ‘मखाना’ (Fox Nuts) सबसे आदर्श विकल्प माना गया है। मखाने में कैलोरी बहुत कम होती है, लेकिन यह कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर से भरपूर होता है। एक चम्मच गाय के शुद्ध देसी घी में मखाने को सेंधा नमक और हल्की काली मिर्च के साथ भूनकर एक एयरटाइट डिब्बे में रख लें। जब भी हल्की भूख लगे, एक मुट्ठी मखाना खाएं; यह पेट को भरा रखेगा और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखेगा।
मखाने के साथ-साथ मुट्ठी भर भुनी हुई मूंगफली, 4 से 5 भीगे हुए बादाम और 2 अखरोट का सेवन करें। मूंगफली को गरीबों का बादाम कहा जाता है क्योंकि यह प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, जो मांसपेशियों की कमजोरी को तुरंत दूर करती है। किशमिश और खजूर को भी अपनी डाइट में शामिल करें; खजूर में मौजूद प्राकृतिक फ्रुक्टोज और ग्लूकोज शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देते हैं, जिससे चक्कर आने की समस्या तुरंत खत्म हो जाती है।
कुट्टू और सिंघाड़े का आटा: भारी तली पूरियों के बजाय बनाएं हल्के और सुपाच्य विकल्प
जन्माष्टमी के फलाहार में कुट्टू (Buckwheat) और सिंघाड़े (Water Chestnut) के आटे का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है। लेकिन इन दोनों की तासीर और गुणों में बड़ा अंतर होता है। कुट्टू की तासीर गर्म होती है, जबकि सिंघाड़े की तासीर ठंडी और शीतल होती है। यदि आप केवल कुट्टू के आटे से बनी तली हुई पूरियां खाएंगे, तो शरीर में पित्त बढ़ सकता है, जिससे पेट में जलन और घबराहट हो सकती है।
इस समस्या से बचने के लिए कुट्टू और सिंघाड़े के आटे को बराबर मात्रा में मिलाएं। पूरियां या पकौड़े तलने के बजाय उबले हुए आलू या लौकी को कद्दूकस करके इस आटे में गूंथ लें और नॉन-स्टिक तवे पर हल्का सा देसी घी लगाकर पौष्टिक ‘चीला’ या पतली ‘रोटी’ बनाएं। यह पचने में बेहद हल्की होती है और शरीर को कई घंटों तक लगातार ऊर्जा देती है। इसके साथ ताजा दही या पुदीने-धनिया की हरी चटनी का सेवन करने से पाचन अग्नि संतुलित रहती है।
हाइड्रेशन का अचूक फॉर्मूला: नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी से बनाए रखें इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस
यदि आप फलाहारी व्रत रख रहे हैं, तो केवल सादा पानी पीने के बजाय ‘इलेक्ट्रोलाइट रिच ड्रिंक्स’ का सेवन करें। नारियल पानी व्रत के लिए अमृत के समान है। इसमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स, पोटैशियम और मिनरल्स होते हैं जो शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाते हैं और रक्तचाप को गिरने नहीं देते। दिन में कम से कम एक या दो नारियल पानी अवश्य पिएं।
इसके अलावा घर पर बनी ताजी छाछ या मट्ठा पिएं। छाछ में थोड़ा सा भुना जीरा और सेंधा नमक मिलाकर पीने से आंतों को ठंडक मिलती है और एसिडिटी की समस्या जड़ से खत्म होती है। दोपहर के समय नींबू पानी में सेंधा नमक और थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर सामान्य बना रहता है। जो लोग निर्जला व्रत रख रहे हैं, उन्हें व्रत शुरू करने से पहले यानी भोर के समय पर्याप्त मात्रा में पानी और नारियल पानी पी लेना चाहिए ताकि दिनभर शरीर में नमी का स्तर बना रहे।
मौसमी फल और दही: दिनभर ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म को कैसे रखें स्थिर?
व्रत में फलों का चयन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए। कई लोग केवल केले और सेब पर निर्भर रहते हैं। केला तुरंत ऊर्जा तो देता है, लेकिन केवल मीठे फल खाने से कुछ समय बाद भूख और तेज लगने लगती है। अपनी डाइट में पानी से भरपूर फल जैसे खीरा, पपीता, सेब, नाशपाती और अनार शामिल करें। खीरे में 95 प्रतिशत पानी होता है, जो शरीर को अंदर से ठंडा रखता है।
फलों के साथ ‘दही’ का सेवन व्रत में अनिवार्य रूप से करें। दही एक बेहतरीन प्रोबायोटिक है जो आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को सुरक्षित रखता है और गैस बनने से रोकता है। आप एक कटोरी ताजे दही में अनार के दाने, खीरा और मखाना मिलाकर एक स्वादिष्ट ‘फ्रूट रायता’ बना सकते हैं। यह प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो भूख को शांत रखता है और दिनभर काम करने का स्टैमिना प्रदान करता है।
साबूदाने की खिचड़ी: स्टार्च को ऊर्जा में बदलें, तली हुई चीजों से पूरी तरह बनाएं दूरी
साबूदाना व्रत का सबसे लोकप्रिय भोजन है, लेकिन इसे बनाने का तरीका आपकी सेहत तय करता है। अधिकांश लोग साबूदाने के बड़े-बड़े वड़े बनाकर डीप फ्राई करते हैं, जो सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। इसके बजाय कम घी में बनी ‘साबूदाना खिचड़ी’ खाएं।
खिचड़ी बनाते समय उसमें उबले आलू के साथ-साथ ढेर सारी भुनी हुई मूंगफली का दरदरा पाउडर, हरी मिर्च, कढ़ी पत्ता और बारीक कटा हरा धनिया जरूर डालें। मूंगफली मिलाने से साबूदाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो जाता है, जिससे खाने के बाद अचानक सुस्ती नहीं आती। साबूदाना शरीर को भरपूर कार्बोहाइड्रेट देता है, जिससे पूजा की तैयारियों और भागदौड़ के बीच शरीर की कार्यक्षमता कमजोर नहीं पड़ती।
एसिडिटी, सिरदर्द और कमजोरी से बचने के लिए इन बड़ी गलतियों से रहें सावधान
व्रत के दौरान बहुत से लोग जाने-अनजाने कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो उनकी सेहत बिगाड़ देती हैं। सबसे पहली गलती है खाली पेट बार-बार चाय पीना। चाय में मौजूद कैफीन और टैनिन खाली पेट में एसिडिटी को भड़काते हैं, जिससे माइग्रेन का दर्द शुरू हो जाता है। यदि आपको गर्म पेय की तलब हो, तो हर्बल टी, ग्रीन टी या तुलसी का काढ़ा पिएं।
दूसरी गलती है सेंधा नमक का बिल्कुल त्याग कर देना। कई लोग व्रत में नमक नहीं खाते; यदि आप स्वस्थ हैं तो ठीक है, लेकिन जिन्हें लो ब्लड प्रेशर या चक्कर आने की समस्या है, उन्हें दिन में एक बार सेंधा नमक का सेवन जरूर करना चाहिए। सेंधा नमक शरीर में सोडियम के संतुलन को बनाए रखता है। तीसरी बड़ी गलती है दोपहर में तेज धूप में बिना वजह घूमना या ज्यादा शारीरिक परिश्रम करना; इससे पसीना अधिक निकलता है और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
निशीथ काल पूजा के बाद और अगले दिन पारण में क्या खाएं ताकि हाजमा न बिगड़े
आधी रात को 12 बजे जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव संपन्न हो जाए, तो कई लोग तुरंत भारी भोजन करने की गलती करते हैं। 12 से 14 घंटे के उपवास के बाद पाचन तंत्र बहुत संवेदनशील और धीमा हो चुका होता है। ऐसे में पूजा के तुरंत बाद सबसे पहले एक या दो चम्मच पंचामृत और चरणामृत ग्रहण करें। इसके बाद धनिये की पंजीरी और माखन-मिश्री का छोटा सा भोग प्रसाद के रूप में लें।
यदि आपको रात में भूख महसूस हो रही है, तो आधा गिलास गुनगुना दूध जिसमें थोड़ा सा मखाना या बादाम मिला हो, पी सकते हैं। अगले दिन सुबह जब आप व्रत का विधिवत पारण करें, तो शुरुआत हल्का गुनगुना पानी पीकर करें। पारण की थाली में ज्यादा मिर्च-मसाले, छोले-भटूरे या तली हुई पूरियां शामिल न करें। मूंग दाल की पतली खिचड़ी, सादा चावल-दाल, उबली लौकी या तोरई की सब्जी और रोटी से ही व्रत खोलें। यह आपके पाचन तंत्र को झटका दिए बिना सामान्य स्थिति में ले आएगा और आप व्रत के बाद भी पूरी तरह ऊर्जावान और स्वस्थ महसूस करेंगे।
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