
पश्चिम बंगाल की राजनीति और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अंदरूनी हलकों में उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के राज्यसभा सांसद और ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन (GCPA) के प्रमुख अनंत महाराज को दिए गए सम्मान को औपचारिक रूप से वापस लेने का ऐलान कर दिया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर अनंत महाराज द्वारा की गई कथित अमर्यादित और विवादित टिप्पणी के बाद पैदा हुए भारी जन-आक्रोश को देखते हुए शुभेंदु अधिकारी को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।
पश्चिम बंगाल में नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक ऐतिहासिक या राजनीतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि बंगाली अस्मिता, स्वाभिमान और जन-भावनाओं के सबसे बड़े प्रतीक हैं। ऐसे में बीजेपी के ही एक प्रमुख सांसद द्वारा नेताजी के योगदान पर सवाल उठाए जाने और आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने से पार्टी बैकफुट पर आ गई थी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे ‘बंगाल विरोधी और महान स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान’ करार दिया था।
अनंत महाराज ने ऐसा क्या कहा था? जानिए विवाद की पूरी जड़
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब कूचबिहार से बीजेपी के राज्यसभा सांसद नागेंद्र नाथ रॉय उर्फ ‘अनंत महाराज’ ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए भारत की आजादी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान पर बेहद विवादित बयान दे दिया था। अनंत महाराज ने दावा किया था कि भारत को आजादी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज या स्वतंत्रता संग्राम से नहीं, बल्कि अन्य वजहों से मिली थी। उन्होंने नेताजी की भूमिका को कम आंकते हुए कुछ ऐसी बातें कह दीं, जिसे बंगाली समुदाय और इतिहासकारों ने ऐतिहासिक तथ्यों का मरोड़ना और स्वतंत्रता सेनानी का घोर अपमान माना।
अनंत महाराज के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरे पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों के संगठनों, प्रबुद्ध वर्ग और आम लोगों ने अनंत महाराज के खिलाफ सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की और उनकी संसद सदस्यता रद्द करने तथा माफी मांगने की मांग की।
शुभेंदु अधिकारी का सार्वजनिक ऐलान: ‘नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं’
अनंत महाराज के बयान से बने प्रतिकूल माहौल और जनता के गुस्से को भांपते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने सार्वजनिक मंच से अनंत महाराज के बयान से खुद को और पार्टी को पूरी तरह अलग कर लिया। शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि बीजेपी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का सर्वोच्च सम्मान करती है और उनके खिलाफ किसी भी तरह की अनर्गल टिप्पणी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
शुभेंदु अधिकारी ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि उन्होंने पहले अनंत महाराज को एक सामाजिक प्रतिनिधि के रूप में जो सम्मान और अभिनंदन दिया था, वे उसे पूरी तरह से वापस (Withdraw) लेते हैं। उन्होंने कहा, “नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश के महानतम नायकों में से एक हैं। उनका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है, चाहे ऐसा बयान देने वाला व्यक्ति किसी भी पद पर क्यों न हो।” शुभेंदु अधिकारी के इस सख्त रुख को पार्टी की छवि बचाने और बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने से खुद को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तर बंगाल का राजनीतिक समीकरण और अनंत महाराज का प्रभाव
अनंत महाराज उत्तर बंगाल (North Bengal) के कूचबिहार और राजबंशी (Rajbanshi) समुदाय के बीच एक बेहद प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। वे ‘ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन’ के जरिए अलग कूचबिहार राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की मांग करते रहे हैं। राजबंशी वोट बैंक पर उनके मजबूत प्रभाव को देखते ही बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।
उत्तर बंगाल में बीजेपी का दबदबा काफी मजबूत रहा है और लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनावों तक राजबंशी समुदाय ने बीजेपी का खुलकर समर्थन किया है। लेकिन अनंत महाराज के इस विवादित बयान और शुभेंदु अधिकारी द्वारा सम्मान वापस लिए जाने से उत्तर बंगाल के बीजेपी संगठन के भीतर गुटबाजी और तनाव गहराने की आशंका जताई जा रही है। तृणमूल कांग्रेस इस मौके को भुनाकर राजबंशी बहुल क्षेत्रों में बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने में जुट गई है।
बैकफुट पर बीजेपी, टीएमसी का चौतरफा हमला
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर बीजेपी और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि बीजेपी के नेता बार-बार बंगाल के महापुरुषों—चाहे वह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर हों, ईश्वरचंद्र विद्यासागर हों या नेताजी सुभाष चंद्र बोस—का अपमान करते रहे हैं। टीएमसी ने मांग की है कि केवल सम्मान वापस लेने से काम नहीं चलेगा, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व को अनंत महाराज को पार्टी से बर्खास्त करना चाहिए और पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।
वहीं, बीजेपी प्रदेश नेतृत्व इस पूरे मामले पर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अनंत महाराज को उनके बयान के लिए केंद्रीय नेतृत्व द्वारा कड़ी चेतावनी दी गई है और भविष्य में इस तरह के बयानों से बचने की हिदायत दी गई है। बहरहाल, शुभेंदु अधिकारी के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव से पहले बंगाली अस्मिता के संवेदनशील मुद्दे पर बीजेपी कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया