लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर खुली मरम्मत के दावों की पोल, हल्की बारिश में ही उखड़ने लगी डामर की परत और सड़कों पर उभरे गड्ढे

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को औद्योगिक नगरी कानपुर से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर हल्की सी बारिश में ही बदहाली का शिकार हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं द्वारा बीते दिनों सड़क सुधार और गड्ढा मुक्ति के नाम पर किए गए पैचवर्क के लंबे-चौड़े दावों की हवा निकल गई है। मानसून की शुरुआती और हल्की बूंदाबांदी ने ही सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य में बरती गई भारी अनियमितता और घटिया सामग्री के इस्तेमाल की कलई खोलकर रख दी है। लखनऊ के जुनाबगंज, बंथरा और सरोजनीनगर से लेकर उन्नाव के नवाबगंज, जैसीपुर और आजाद मार्ग तक कई किलोमीटर के हिस्से में हाल ही में बिछाई गई डामर (बिटुमिन) की परत उखड़कर अलग हो चुकी है। सड़क पर चारों तरफ फैली गिट्टियों के कारण दोपहिया वाहन सवार लगातार फिसलकर हादसों का शिकार हो रहे हैं, जबकि चार पहिया और भारी व्यावसायिक वाहनों के पहिए गहरे गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। प्रतिदिन लखनऊ से कानपुर और कानपुर से लखनऊ के बीच आवाजाही करने वाले लाखों यात्रियों के लिए यह सफर अब किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रह गया है।

मरम्मत के चंद दिनों बाद उखड़ी गिट्टियां, एनएचएआई के पैचवर्क की खुली पोल

लखनऊ-कानपुर मार्ग पर यातायात के दबाव को देखते हुए हाल ही में एनएचएआई के ठेकेदारों द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्सों पर हॉट-मिक्स प्लांट से डामर और गिट्टी डालकर मरम्मत का कार्य कराया गया था। दावे किए गए थे कि इस पैचवर्क से मानसून के दौरान यात्रियों को निर्बाध और सुरक्षित सफर की सुविधा मिलेगी। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों से ठीक उलट नजर आ रही है। स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, ठेकेदारों ने केवल खानापूर्ति करते हुए बिना सड़क की सतह को सही तरीके से साफ किए और बिना उचित अनुपात में बिटुमिन का छिड़काव किए ही गिट्टी-डामर का लेप चढ़ा दिया। नतीजा यह हुआ कि जैसे ही हल्की बारिश का पानी सड़क की दरारों में पहुंचा, डामर की पकड़ कमजोर पड़ गई और पूरी की पूरी परत उखड़कर अलग हो गई। बंथरा और नवाबगंज के बीच कई स्थानों पर तो आलम यह है कि सड़क में फिर से वही पुराने और गहरे गड्ढे उभर आए हैं जो मरम्मत से पहले मौजूद थे। बारिश के पानी के साथ बहकर उखड़ी हुई गिट्टियां पूरी सड़क पर फैल गई हैं, जो अब ब्रेक लगाते ही वाहनों के स्लिप होने का मुख्य कारण बन रही हैं।

हल्की बारिश बनी आफत, गड्ढों में जलभराव से हादसों का बढ़ा खतरा

मानसून की इस शुरुआती बारिश में सड़क की खराब हालत के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है। एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य और हाईवे के चौड़ीकरण के बीच बने डायवर्जन वाले रास्तों पर स्थिति सबसे ज्यादा भयावह बनी हुई है। सड़क में बने गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने के कारण वाहन चालकों को गड्ढों की गहराई का सही अंदाजा नहीं मिल पाता है। विशेष रूप से रात के समय और तड़के सुबह तेज रफ्तार वाहन इन छिपे हुए गड्ढों में गिर रहे हैं, जिससे वाहनों के सस्पेंशन टूट रहे हैं और टायर फटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। दोपहिया वाहन चालकों के लिए स्थिति सबसे ज्यादा खतरनाक बनी हुई है। बारिश में भीगी गिट्टियों पर बाइक और स्कूटी का संतुलन बिगड़ते ही लोग गिरकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। स्थानीय एम्बुलेंस सेवाओं और पुलिस पिकेट को रोजाना कई मामूली व गंभीर सड़क हादसों की सूचनाएं मिल रही हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर भारी बारिश का दौर शुरू होता है, तो यह सड़क पूरी तरह से धंस सकती है और आवागमन पूरी तरह ठप्प होने की नौबत आ सकती है।

टोल वसूली पर भड़के राहगीर, खराब सड़क के बावजूद वसूला जा रहा पूरा टैक्स

खराब सड़क और जानलेवा गड्ढों के बावजूद टोल प्लाजा पर पूरा टोल टैक्स वसूले जाने से यात्रियों और वाहन चालकों में भारी रोष व्याप्त है। नवाबगंज टोल प्लाजा पर रोजाना गुजरने वाले कार चालकों, बस ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि एनएचएआई यात्रियों से विश्वस्तरीय सड़क सुविधाओं के नाम पर मोटा टोल वसूलता है, लेकिन बदले में उन्हें जर्जर, गड्ढायुक्त और असुरक्षित सड़क दी जा रही है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब तक सड़क की पुख्ता और टिकाऊ मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक टोल की दरों में छूट दी जानी चाहिए या टोल वसूली पर अस्थायी रोक लगानी चाहिए। यात्रियों का आरोप है कि टोल एजेंसियां केवल राजस्व वसूलने में दिलचस्पी दिखाती हैं, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सड़क के रखरखाव जैसे बुनियादी मानकों पर पूरी तरह से आंखें मूंद लेती हैं। रोजाना अप-डाउन करने वाले सरकारी व निजी कर्मचारियों ने शिकायत की है कि 80 किलोमीटर की दूरी तय करने में जो समय पहले एक से डेढ़ घंटा लगता था, अब गड्ढों और यातायात जाम के कारण ढाई से तीन घंटे का समय लग रहा है।

प्रशासनिक सुस्ती और एनएचएआई का रुख, अधिकारियों ने जांच के दिए आदेश

सड़क की दुर्दशा और लगातार हो रहे हादसों की खबरें मीडिया और सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों में हलचल शुरू हो गई है। एनएचएआई के संबंधित परियोजना निदेशक और तकनीकी अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थिति का जायजा लेने के लिए अपनी टीमें मौके पर भेजी हैं। एनएचएआई अधिकारियों का पक्ष है कि एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य के चलते कुछ पैच पर भारी वाहनों की अत्यधिक आवाजाही और जल निकासी (ड्रेनेज) की समस्या के कारण डामर उखड़ा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि गुणवत्ता से समझौता करने वाली ठेकेदार कंपनियों और एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है और उन्हें बिना अतिरिक्त भुगतान के तुरंत री-कार्पेटिंग (दोबारा डामर बिछाने) और वाटरप्रूफिंग के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को अधिकारियों के इन मौखिक आश्वासनों पर ज्यादा भरोसा नहीं है, क्योंकि हर बार बारिश के सीजन में यही प्रक्रिया दोहराई जाती है और कुछ ही दिनों में स्थिति जस की तस हो जाती है।

मानसून में कैसे होगा सफर? जल्द पुख्ता मरम्मत न होने पर आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ-कानपुर मार्ग केवल दो बड़े शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है, बल्कि यह पूर्वांचल, अवध और बुंदेलखंड को आपस में जोड़ने वाला राज्य का सबसे व्यस्ततम इकोनॉमिक कॉरिडोर है। इस मार्ग पर प्रतिदिन 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में अगर आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश होती है, तो यह जर्जर सड़क पूरे क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह से ठप्प कर सकती है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और व्यापार मंडलों ने शासन और एनएचएआई को अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर उखड़ी हुई सड़क की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत नहीं कराई गई और उखड़ी गिट्टियों को हटाकर यातायात सुचारु नहीं किया गया, तो वे टोल प्लाजा पर प्रदर्शन करने और विरोध जताने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या पर कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है या फिर राहगीरों को इस मानसून में भी जान हथेली पर रखकर ही सफर करने को मजबूर होना पड़ेगा।

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