केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी वकीलों की फीस में 11 साल बाद भारी बढ़ोतरी, जानें किसे कितना मिलेगा लाभ

नई दिल्ली: अदालतों में केंद्र सरकार का पक्ष रखने वाले वकीलों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सरकारी वकीलों की फीस में संशोधन कर दिया है। लगभग 11 साल के लंबे इंतजार के बाद की गई यह बढ़ोतरी 1 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार का यह फैसला महंगाई और प्रतिभाशाली वकीलों को पैनल में बनाए रखने की आवश्यकता को देखते हुए लिया गया है।

फीस का नया गणित: ग्रुप-ए से ग्रुप-सी तक को फायदा

केंद्रीय कानून मंत्रालय द्वारा 5 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, वकीलों की फीस को उनकी कैटेगरी और मामले की प्रकृति के आधार पर संशोधित किया गया है।

वकीलों की श्रेणी पुरानी फीस (प्रति दिन/केस) नई फीस (प्रति दिन/केस)
ग्रुप ‘A’ वकील (नियमित अपील/अंतिम सुनवाई) ₹13,500 ₹21,600
ग्रुप ‘B’ व ‘C’ वकील (नियमित अपील/अंतिम सुनवाई) ₹9,000 ₹14,400
सुप्रीम कोर्ट लॉ ऑफिसर (रिट/अपील) ₹38,000
SLP और अन्य आवेदन ₹24,000

इसके अलावा, विभिन्न मंत्रालयों के साथ होने वाली कॉन्फ्रेंस और दिल्ली या राज्य की राजधानियों से बाहर पेश होने वाले वकीलों के भत्तों में भी इजाफा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के लॉ ऑफिसर्स को दिल्ली के बाहर सुनवाई के लिए अब ₹96,000 प्रति दिन तक मिलेंगे।

क्यों जरूरी था यह संशोधन?

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव अंजू राठी राणा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि यह प्रक्रिया उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई थी। उन्होंने बताया कि सरकारी पैनल में काबिल वकीलों को जोड़े रखने के लिए यह वृद्धि अनिवार्य थी। पिछले एक दशक में कानूनी सेवाओं की लागत और महंगाई बढ़ने के कारण वकील लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। आखिरी बार यह फीस अक्टूबर 2015 में बढ़ाई गई थी।

मुख्य बातें: किसे मिलेगा लाभ?

  • पैनल वकील: सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, ट्रिब्यूनल और जिला अदालतों में केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी वकील।

  • रिटेनर फीस: अटॉर्नी जनरल (AG) की रिटेनर फीस बढ़ाकर ₹1,20,000 प्रति माह और सॉलिसिटर जनरल (SG) की ₹96,000 कर दी गई है।

  • बीमा योजना: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने वकीलों के लिए मेडिकल और ग्रुप इंश्योरेंस योजना लाने के संकेत भी दिए हैं।

इस कदम से न केवल वकीलों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि अदालतों में सरकार की पैरवी भी अधिक प्रभावी ढंग से होने की उम्मीद है।

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