लाइट जलाकर सोते हैं? मशहूर गायनेकोलॉजिस्ट ने दी चेतावनी, इस छोटी सी आदत से बिगड़ सकता है हार्मोनल बैलेंस और बढ़ सकती हैं कई गंभीर बीमारियां

भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव के बीच अच्छी नींद लेना हर किसी के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि, कई लोगों को आदत होती है कि वे रात को बेडरूम में हल्की लाइट या नाइट लैंप जलाकर सोते हैं। अगर आप भी इसी आदत के शिकार हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ी चेतावनी हो सकती है। हाल ही में कई मशहूर गायनेकोलॉजिस्ट और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने सोशल मीडिया और मेडिकल मंचों के जरिए यह खुलासा किया है कि रात के समय कृत्रिम रोशनी (Artificial Light) में सोना हमारे शरीर के आंतरिक तंत्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

मेलाटोनिन हॉर्मोन का उत्पादन होता है प्रभावित

हमारे शरीर में एक नेचुरल बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) होती है, जो दिन और रात के हिसाब से काम करती है। जब हम अंधेरे में सोते हैं, तो शरीर में मेलाटोनिन (Melatonin) नामक हार्मोन का स्राव तेजी से होता है, जो गहरी और सुकून भरी नींद के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन जब कमरे में लाइट जलती रहती है, तो मस्तिष्क इस हार्मोन के प्रोडक्शन को कम कर देता है। इससे न केवल नींद की गुणवत्ता खराब होती है, बल्कि नर्वस सिस्टम पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ने लगता है।

महिलाओं के हार्मोनल बैलेंस पर सबसे बुरा असर

गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, रात में लगातार रोशनी के संपर्क में रहने से महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन पर सबसे गहरा असर पड़ता है। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है, जिसके कारण पीरियड्स का अनियमित होना, पीसीओएस (PCOS) के लक्षण गंभीर होना और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा, मेटाबॉलिज्म धीमा होने से वजन बढ़ने और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा भी पैदा हो जाता है।

बेहतर सेहत के लिए अपनाएं ये जरूरी बदलाव

इस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह है कि सोते समय कमरे की सभी लाइट्स और डिजिटल स्क्रीन्स को पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। यदि बच्चों या किसी अन्य कारण से रोशनी की जरूरत पड़े, तो बहुत हल्की लाल या एंबर रंग की मद्धम रोशनी का इस्तेमाल किया जा सकता है जो मेलाटोनिन को ज्यादा बाधित नहीं करती। पूरी तरह अंधेरे और शांत कमरे में सोने से न केवल हार्मोनल बैलेंस दुरुस्त रहता है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है और अगले दिन शरीर तरोताजा महसूस करता है।

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