
उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी रामाशीष राय ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी के लिए इसे एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अपने त्यागपत्र में रामाशीष राय ने पार्टी की कार्यशैली और नीतियों पर इशारों में कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, साथ ही किसानों, युवाओं और देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
व्यवस्था परिवर्तन का अधूरा सपना और तीखे आरोप
रामाशीष राय ने अपने इस्तीफे में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के “संपूर्ण क्रांति” आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि देश में आज भी व्यवस्था परिवर्तन का सपना अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय राजनीति धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली लोगों के शिकंजे में कसती जा रही है, जिससे समाज में जाति और संप्रदाय के आधार पर दूरियां बढ़ रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयानों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में बढ़ती परिवारवाद और आर्थिक ताकत की संस्कृति लोकतंत्र के लिए खतरनाक साबित हो रही है, जिससे किसान और युवा दोनों बुरी तरह पिस रहे हैं।
समाजवादी पार्टी या कांग्रेस? कहां होगी अगली सियासी पारी
रामाशीष राय के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। हाल ही में जयंत चौधरी द्वारा अनुपम मिश्रा को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने के कयास लगाए जा रहे थे। अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे जल्द ही समाजवादी पार्टी (SP) का दामन थाम सकते हैं या फिर कांग्रेस के टिकट पर देवरिया से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक अपनी अगली राजनीतिक मंजिल को लेकर आधिकारिक तौर पर खुलकर कुछ नहीं कहा है।
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