
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार आज 22 जुलाई 2026 (बुधवार) को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी भड़ली नवमी (भड़रिया नवमी) मनाई जा रही है। शास्त्रों में भड़ली नवमी को अक्षय तृतीया की तरह ही अत्यंत पवित्र और ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है।
मान्यता है कि इस दिन विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और किसी भी प्रकार की खरीदारी करने के लिए अलग से कोई शुभ समय या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
चातुर्मास से पहले मांगलिक कार्यों का अंतिम अवसर
भड़ली नवमी के ठीक बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ हो जाता है, जिसके बाद अगले चार महीनों के लिए विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है।
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अबूझ मुहूर्त का महत्व: जिन लोगों के विवाह के लिए कोई अन्य नक्षत्र या शुभ मुहूर्त नहीं मिल पा रहा हो, उनका विवाह भड़ली नवमी के दिन पूरे शास्त्र सम्मत तरीके से किया जा सकता है।
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गुप्त नवरात्रि का समापन: भड़ली नवमी के दिन आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है, इसलिए इस दिन कन्या पूजन और दान-पुण्य करने का विशेष धार्मिक महत्व है।
पूजन एवं खरीदारी के शुभ मुहूर्त (Muhurat Sheet)
22 जुलाई को उदया तिथि के अनुसार भड़ली नवमी मनाई जा रही है। दिनभर खरीदारी और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ हैं:
| कार्य / मुहूर्त का प्रकार | समय / अवधि | धार्मिक महत्व |
| अमृत काल (खरीदारी का समय) | सुबह 09:56 बजे से 11:41 बजे तक | सोने-चांदी, वाहन और नए सामान की खरीदारी हेतु |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 04:32 बजे से शाम 05:34 बजे तक | नए व्यापार और नए काम की शुरुआत के लिए |
| रवि योग | शाम 07:33 बजे से पूरी रात | सभी बाधाओं को दूर करने वाला अत्यंत शुभ योग |
भड़ली नवमी पर क्या करें और किसकी पूजा करें?
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देव पूजन: इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन में आर्थिक समृद्धि और सुख-शांति का वास होता है।
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शुभ शुरुआत: नया वाहन, प्रॉपर्टी, आभूषण खरीदने के साथ-साथ नए मकान में गृह प्रवेश के लिए भी यह दिन सबसे उत्तम माना गया है।
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दान एवं कन्या पूजन: गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि होने के कारण कन्याओं को भोजन कराकर वस्त्र या सामर्थ्य अनुसार दान देने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है।
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