
नई दिल्ली: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को परम पवित्र और पूजनीय माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, तुलसी के पौधे में साक्षात माता लक्ष्मी का वास होता है और यह भगवान श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। नियमित रूप से तुलसी जी की पूजा और उन्हें जल अर्पित करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा सुख-समृद्धि एवं बरकत का वास होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि तुलसी में जल अर्पित करते समय सही विधि और मंत्रों का जाप किया जाए, तो पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
तुलसी में जल चढ़ाते समय बोलें ये 2 पवित्र मंत्र
जल अर्पित करते वक्त अपनी श्रद्धा अनुसार नीचे दिए गए मंत्रों का जाप कर सकते हैं:
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मुख्य तुलसी मंत्र:
“महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।”
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अर्थ: हे माता तुलसी! आप सभी प्रकार के सौभाग्य को बढ़ाने वाली हैं और नित्य ही हर प्रकार के कष्ट, रोग व मानसिक व्याधियों का हरण करती हैं। मैं आपको बारंबार प्रणाम करता/करती हूँ।
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लघु मंत्र (सरल जप हेतु):
“ॐ श्री तुलस्यै नमः”
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यदि मुख्य मंत्र बोलने में कठिनाई हो, तो जल चढ़ाते समय इस सरल मंत्र का कम से कम 3 बार जाप करें।
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जल अर्पित करने का सही समय, दिशा और विधि
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शुभ समय: सूर्योदय के पश्चात स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत मन से तुलसी जी को जल अर्पित करें।
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पात्र और दिशा: जल चढ़ाने के लिए हमेशा तांबे के लोटे का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। जल अर्पित करते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
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पूजन विधि: जल अर्पित करने के बाद तुलसी मां को रोली व अक्षत लगाएं, उनके समक्ष दीपक प्रज्वलित करें और भक्ति भाव से परिक्रमा करें।
तुलसी पूजा में भूलकर भी न करें ये 4 गलतियां
| क्रम | क्या न करें? | धार्मिक कारण / नियम |
| 1. | रविवार और एकादशी | इन दिनों में तुलसी जी निर्जला व्रत रखती हैं, अतः जल न चढ़ाएं और न ही पत्ते तोड़ें। |
| 2. | बिना स्नान किए स्पर्श | बिना स्नान किए या अशुद्ध हाथों से तुलसी के पौधे को स्पर्श करना वर्जित है। |
| 3. | अत्यधिक जल डालना | जरूरत से ज्यादा पानी डालने से पौधे की जड़ें खराब हो सकती हैं। |
| 4. | अकारण पत्ते तोड़ना | शाम के समय या बिना आवश्यकता के तुलसी के पत्र न तोड़ें। |
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